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अब बनेगा केवल ड्रोन के लिए एयरपोर्ट

रंजन क्रास्टा | Updated on: 23 January 2016, 18:47 IST
QUICK PILL
  • बोल्डर सिटी नेवाडा दुनिया का पहला ड्रोनपोर्ट बनाने की योजना पर तेजी से काम रहा है जबकि इस शहर की आबादी महज 15,000 है.
  • अफ्रीकी देश रवांडा भी ड्रोन के इस्तेमाल की दिशा में आगे कदम बढ़ा चुका है हालांकि वहां पर इसका इस्तेमाल केवल जरूरी दवाओं की आपूर्ति के लिए किया जाएगा.

ड्रोन को पूरी तरह से नजरअंदाज करना असंभव है. कम से काम बातचीत के दौरान तो आप इसे खारिज नहीं कर सकते. प्रयोग से लेकर हमले तक में, ड्रोन की प्रगति जबर्दस्त रही है. कह सकते हैं कि कुछ ही समय के भीतर ड्रोन विस्फोटक गति से आगे बढ़ने में सफल रहा है.

अभी तक की खोज ने हमें कई तरह के ड्रोन दिए हैं. मसलन हमला करने वाले ड्रोन से लेकर ऐसा ड्रोन जो सेल्फी खींचता है. अभी तक ड्रोन को उसका एयरपोर्ट नहीं मिला था लेकिन अब ऐसा लगता है कि इसका भी समय आ चुका है.

अल डोराडो ड्रोनपोर्ट

Droneport

जब छोटे शहरों को निवेश आकर्षित करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है वैसे में बोल्डर सिटी नेवाडा एक ऐसी खोज पर काम कर रहा है जिससे उसके काम के घंटों में जबरदस्त तरीके से कमी आ सकती है.

इससे पहले जब दुनिया में सौर ऊर्जा की लोकप्रियता में तेजी से बढ़ोतरी हो रही थी तब नेवाडा दुनिया का सबसे बड़ा सोलर प्लांट बनाने में सफल रहा. शहर की आबादी करीब 15,000 है और अब इसकी नजर ऐसी तकनीक  पर है जो इसे एक बार फिर से दुनिया का सबसे स्मार्ट शहर बना देगी. एयरोड्रम के साथ मिलकर बोल्डर सिटी दुनिया का पहला व्यावसायिक एयरपोर्ट विकसित करने जा रहा है जो विशेष तौर पर ड्रोन के लिए ही होगा.

ड्रोन का बाजार फिलहाल सोने के खदान के कारोबार जैसा है और अगले 10 सालों में इसका कारोबार बढ़कर 82 अरब डॉलर होने की उम्मीद है. पहला ड्रोनपोर्ट अलडोराडो वैली में होगा और इसका नाम अल डोराडो ड्रोनपोर्ट होगा. ड्रोन ऑपरेटर्स के प्रशिक्षण और प्रमाणीकरण के लिए यह उन छह स्थानों में से एक है जिसे फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने मंजूरी दी है.

हालांकि अभी तक 50 एकड़ के एरिया को पूरी तरह से डिवेलप नहीं किया जा सका है लेकिन इसे 2018 तक पूरा कर लिया जाएगा. फिलहाल यहां की 5 एकड़ भूमि का इस्तेमाल किया जा रहा है और पूरी तरह से ऑपरेशनल होने के बाद इसे सोलर एनर्जी से ऑपरेट किया जा सकेगा.

ड्रोनपोर्ट की जरूरत

अमेरिका में करीब वैसी 25,000 कंपनियां हैं जिनके पास एफएए का लाइसेंस हैं जो ड्रोन को ऑपरेट कर सकती हैं और इनकी संख्या में बढ़ोतरी ही हो रही है. ड्रोन इंडस्ट्री को उम्मीद है कि आने वाले समय में उसे एग्रीकल्चर से लेकर रियल एस्टेट बिजनेस में काम करने का मौका मिलेगा. इसके अलावा ई-कॉमर्स में भी जबरदस्त संभावनाएं हैं जैसा कि एमेजॉन का डिलीवरी ड्रोन प्लान.

इन कंपनियों के कमर्शियल ड्रोन प्रोग्राम में होने वाले संभावित विस्तार के बाद करीब 100,000 से अधिक नौकरियां मिलने की उम्मीद है. एयरोड्रम की तरफ से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, 'ड्रोन इंडस्ट्री से निकलने वाली नौकरियां पूरी तरह से नई विशेषज्ञता पर आधारित होंगी ताकि इसे सुरक्षा के साथ चलाया जा सके.'

एयरोड्रोम की नजर इसी अंतर को भरने की है. ड्रोनपोर्ट में न केवल ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षण और सर्टिफिकेट दिया जाएगा बल्कि यहां पर ड्रोन के रख-रखाव, उसकी मरम्मत और अन्य कार्यों के लिए प्रशिक्षण का कार्यक्रम भी चलाया जाएगा. यहां न केवल पायलटों को प्रशिक्षण दिया जाएगा बल्कि ड्रोन इस्तेमाल करने की तकनीक से भी लोगों को अवगत कराया जा सकेगा.

एयरोड्रोम पहले से ही डेट्रॉएट, मिशीगन, हेंडरसन और नेवादा में ड्रोन प्रशिक्षण केंद्र चलाता रहा है. अल डोराडो कंपनी के ऑपरेशन की दिशा में सबसे बड़ा कदम साबित होगा. आने वाले समय में ड्रोन की बढ़ती संभावित जरूरतों को देखते हुए इस बात की उम्मीद नहीं की जा सकती कि ड्रोनपोर्ट की अवधारणा बेकार हो जाएगी.

रवांडा में भी ड्रोनपोर्ट को बनाने की योजना है. हालांकि इसका इस्तेमाल अफ्रीकी देशों में जरूरी दवाओं की आपूर्ति में किया जाएगा. सवाल यह है कि अगर रवांडा ड्रोन के इस्तेमाल की दिशा में सोचते हुए आगे कदम बढ़ा सकता है तो क्या भारत और बाकी के देश इस दिशा में पीछे  रहने का जोखिम उठा सकते हैं?

First published: 23 January 2016, 18:47 IST
 
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