Home » इंटरनेशनल » Tightening us citizenship regime hits american dreams for indians
 

भारतीयों के लिए क्यों मुश्किल होता जा रहा है अमेरिका में बसना ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 March 2018, 13:07 IST

भारतीय लोगों को अमेरिकी नागरिकता लेना का सपना पूरा नहीं होने में दिक्कतें आ रही हैं. इसके लिए उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. पिछले एक दशक में भारतीयों को अमेरिकी नागरिकता देने के मामले में कमी दर्ज की गई है. एक अमेरिकी डाटा के मुताबिक पिछले 30 वर्षों में अमेरिका इस मामले में 2008 में सबसे ज्यादा उदार रहा है. इस साल 65,971 भारतीयों को अमेरिका की नागरिकता मिली थी. वहीं 1995 से 2000 के बीच हर साल लगभग 1,20,000 कुशल वर्कर अमेरिका जाते थे.

वहीं पिछली साल अमेरिका 49,601 भारतीयों की ही एंट्री हो पाई. इस दशक में यह आंकड़ा 2014 में सबसे कम रहा. जो सिर्फ 37,854 था. साल 2014 से 2017 के बीच इमिग्रेशन में भी खासी कमी देखने को मिली. जानकारों का कहना है कि H-1B मामले को देखते हुए अब कंपनियां काफी सावधानी बरत रही हैं. ऐसे में अमेरिका को अब कम भारतीय इंजिनियरों की जरूरत है.

बता दें कि 1990 से भारत ऐसा तीसरा देश था, जिसे अमेरिकी नागरिकता मिलती थी. पहले नंबर पर चीन और मैक्सिको थे. अधिकतर भारतीयों को उच्च कौशल के आधार पर वर्क वीजा मिलता था लेकिन इमिग्रेशन में कमी आने के बाद अमेरिका में भारतीय इंजिनियरों और एमबीए प्रोफेशनल्स की मांग घट गई. इसी के साथ अमेरिकी कंपनियां अपने देश के लोगों को तवज्जो देने लगीं.

एक इमिग्रेशन लॉयर मार्क डेवीस ने बताया, 'जब अमेरिका की इमिग्रेशन पॉलिसी ने उदारता दिखाई तो बड़ी संख्या में भारतीय जाने लगे. इसके बाद परिवार के लोगों ने भी ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाइ किया लेकिन उनका वेटिंग पीरियड बढ़ गया.' सबसे ज्यादा आईटी कंपनियों ने अमेरिका में भारतीयों को नौकरियां दी थीं लेकिन ट्रंप की नीति के अनुसार विदेशियों को मिलने वाली नौकरियों में भारी कमी आ गई है.

ये भी पढ़ें- फेसबुक पर लगा एक और सनसनीखेज आरोप, आपके मैसेज और फोन नंबर पर सेंध

First published: 27 March 2018, 13:08 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी