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ट्रंप भारत को बड़ा झटका देने की तैयारी में, नौकरी के लिए अमेरिका जाना नहीं होगा आसान

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 May 2019, 16:38 IST

 

H1-B वीजा आवेदन शुल्क को दोगुना करने के तीन साल के भीतर एक बार फिर अमेरिकी सरकार इस पर विचार कर रहा है. अगर अमेरिका इसे बढ़ाता है तो भारत में शीर्ष आईटी कंपनियों जैसे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इन्फोसिस, और विप्रो को प्रभावित होगा. कांग्रेस कमेटी में यूएस लेबर सेक्रेटरी अलेक्जेंडर अकोस्टा ने कहा कि वे इस वीज़ा एप्लीकेशन फीस में बढ़ोतरी का प्रस्ताव दे रहे हैं, और प्राप्त धनराशि का इस्तेमाल देश के युवाओं को तकनीक में प्रशिक्षित करने के लिए करेंगे. हालांकि अकोस्टा ने बढ़ोतरी की सीमा का उल्लेख नहीं किया है.

साथ ही उन श्रेणियों का उल्लेख नहीं किया है जहां यह वृद्धि शुल्क लागू होगी. बराक ओबामा प्रशासन के दौरान की गई आखिरी बढ़ोतरी के बाद, वीजा दाखिल करने की फीस 1,600 डॉलर के बीच है और आवेदन के आधार पर 7,000 डॉलर से अधिक हो गई है. दिसंबर 2016 में अंतिम परिवर्तन के दौरान, सरकार ने उन कंपनियों की फीस में बदलाव किया, जिनके 50 से अधिक कर्मचारी हैं.


 

भारतीय आईटी कंपनियों के गैर-आप्रवासी एच 1-बी वीजा के कई आवेदक हैं. H1-B वीजा में बढ़ोतरी से उच्च राजस्व प्रशिक्षुता कार्यक्रम के तहत गतिविधियों की संख्या का विस्तार करने में जाएगा. चालू वित्त वर्ष के लिए ट्रम्प प्रशासन ने अपने प्रशिक्षु कार्यक्रम का विस्तार करने के लिए 160 मिलियन डॉलर का बजट रखा है. माना जा रहा है कि यह बदलाव भारतीय आईटी कंपनियों द्वारा पहले से ही घट रहे वीजा आवेदनों को प्रभावित करेगा.

पिछले कुछ वर्षों में वीजा स्वीकृतियों की संख्या भी आधी हो गई है. डोनाल्ड ट्रम्प के सत्ता में आने के तुरंत बाद उन्होंने 'बाय अमेरिकन और हायर अमेरिकन' (Buy American and Hire American) कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए जो अपने श्रमिकों के लिए रोजगार दर बढ़ाने और उनकी मजदूरी बढ़ाने का प्रयास करता है. यह उनके आव्रजन कानूनों को सख्ती से लागू करने और प्रशासित करने के तरीके से किया जाना है. सरकार अपने श्रमिकों की सहायता के लिए एक तीन सूत्री एजेंडा का पालन कर रही है.

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First published: 7 May 2019, 16:06 IST
 
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