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पेरिस जलवायु समझौता: अमेरिका के बाद तुर्की ने किया किनारा

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 July 2017, 8:29 IST

जी-20 शिखर सम्मेलन में शनिवार को भारत और समूह के 19 अन्य सदस्यों ने पेरिस जलवायु समझौते को 'बदला नहीं जा सकने वाला' करार दिया. वहीं अमेरिका ने इस ऐतिहासिक समझौते का समर्थन करने से इंकार कर दिया.

वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के पैरिस समझौते से अलग होने के फैसले के बाद अब तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने धमकी के लहजे में कहा है कि उनका देश पैरिस जलवायु समझौते की (स्वीकृति की) पुष्टि नहीं करेगा. एर्दोआन का यह बयान G20 शिखर सम्मेलन के खत्म होने से ठीक पहले आया. इससे पहले शनिवार को ही खबर आई थी कि अमेरिका को छोड़कर बाकी 19 G20 देश पैरिस समझौते पर कायम रहेंगे. लेकिन सम्मेलन खत्म होने के तुरंत बाद एक न्यूज कॉन्फ्रेन्स में एर्दोआन ने कहा कि तुर्की अब और पैरिस समझौते का निश्चित उम्मीदवार नहीं है.

दो दिवसीय जी-20 शिखर सम्मेलन में भारतीय पक्ष को आतंकवाद को रोकने और वैश्विक व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा देने के संकल्प में महत्वपूर्ण योगदान देते देखा गया. इस शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा मेजबान जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत विश्व के कई शीर्ष नेताओं ने भाग लिया. इस दौरान शहर में हिंसक प्रदर्शन हुए जहां हजारों पूंजीवाद विरोधी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच संघर्ष हुआ.

एंजेला ने कहा कि दुर्भाग्यवश अमेरिका पेरिस समझौते के खिलाफ खड़ा रहा लेकिन अन्य सभी सदस्यों ने इस समझौता का समर्थन किया. पेरिस समझौते से अमेरिका के पीछे हटने के फैसले को ध्यान में रखते हुए जी-20 की आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि अन्य जी-20 सदस्यों के नेताओं ने सहमति जताई कि पेरिस समझौते में परिवर्तन नहीं किया जा सकता. विज्ञप्ति में भ्रष्टाचार, कर चोरी, आतंकवाद को मिलने वाली वित्तीय मदद और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ मिलकर लड़ने की प्रतिबद्धता जताई गई.

नेताओं ने भ्रष्टाचार के खिलाफ संगठित होने संबंधी जी-20 के उच्च स्तरीय सिद्धांतों को सम्मेलन में पारित किया जिनमें कहा गया कि भ्रष्टाचार सरकार के दक्ष और प्रभावी संचालन के अलावा निर्णय लेने में निष्पक्षता और सरकारी सेवाओं को उचित तरीके से मुहैया कराने की प्रक्रिया को बाधित करता है. जी-20 भ्रष्टाचार रोधी कार्य योजना 2017-18 भ्रष्टाचार के खिलाफ संगठित होने समेत सार्वजनिक क्षेत्र की अखंडता और पारदर्शिता को प्राथमिकता मानती है.

First published: 9 July 2017, 8:29 IST
 
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