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भारतीय मूल के दो बच्चों ने जीती अमेरिकी स्पेलिंग-बी चैंपियनशिप

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST
(फेसबुक)

अमेरिका की विश्व प्रतिष्ठित स्पेलिंग बी प्रतियोगिता में एक बार फिर भारतीय मूल के दो अमेरिकी बच्चों ने जीत हासिल कर भारत की प्रतिभा का लोहा मनवाया है. यूएस की स्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बी प्रतियोगिता में भारतीय मूल के दो छात्रों को संयुक्त रूप से विजेता घोषित किया गया है. इनमें से एक छात्र ने सबसे कम उम्र में प्रतियोगिता जीतने की उपलब्धि हासिल की है.

अमेरिका में हर साल होने वाली स्पेलिंग चैंपियनशिप में भारतीय मूल के के जयराम जगदीश हथवार (13) और निहार साईं रेड्डी जंगा (11) को अंतिम 10 प्रतिभागियों के बीच हुए कड़े मुकाबले के बाद संयुक्त रूप से प्रतियोगिता का विजेता घोषित किया गया.

दोनों विजेताओं को 45 हजार डॉलर और ट्रॉफी मिली. चौंकाने वाली बात ये है कि पिछले तीन साल से इस चैंपियनशिप में कोई एक बच्चा विजेता नहीं बन रहा है. लगातार तीन साल से प्रतियोगिता में टाई हो रहा है. 

चैंपियनशिप में भारत का दबदबा किस हद तक कायम है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि अंतिम दौर में पहुंचे 10 प्रतिभागियों में से सात भारतीय मूल के थे. यह तीसरा साल है, जब इस प्रतियोगिता का नतीजा ड्रॉ के जरिए हुआ और दो प्रतिभागियों को संयुक्त रूप से विजेता घोषित किया गया.

पांचवीं क्लास में पढ़ने वाले निहार टेक्सास से हैं और सातवीं के छात्र जयराम न्यूयॉर्क से है. निहार इस प्रतियोगिता का सबसे युवा विजेता है, जो एक रिकॉर्ड है.

जीत के बाद निहार ने कहा, "मेरे पास बोलने के लिए शब्द नहीं हैं. मैं कुछ नहीं कह सकता. मैं बस पांचवीं क्लास में पढ़ता हूं." निहार ने अपनी सफलता का श्रेय मां को दिया है.

आठवीं में पढ़ने वाली कैलिफोर्निया की स्नेहा गणेश कुमार तीसरे स्थान पर रही हैं. पिछले साल वह चौथे स्थान पर रही थीं. अंतिम दौर में जयराम, निहार और स्नेहा के अलावा रुतविक गांधारी, श्री निकेत वोगोती, जशुन पलुरु और स्मृति उपाध्यायुला ने जगह बनाई थी. कड़ी चुनौती के बाद निहार और जयराम को संयुक्त विजेता घोषित किया गया.

फाइनल राउंड से ठीक पहले 24वें राउंड में निहार ने ‘जेसैलशाफ्ट’ की सही स्पेलिंग बताई, जबकि जयराम ने ‘फेल्डेनक्रिएज’ की सही स्पेलिंग बताई. इस प्रतियोगिता के लिए फाइनलिस्ट काफी मुश्किल परीक्षा के बाद चुने जाते हैं. दो दिन तक लिखित और मौखिक परीक्षा होती है. पिछले 9 साल से यह प्रतियोगिता दक्षिण एशियाई मूल के बच्चे जीत रहे हैं. 2014 में जयराम का भाई भी चैंपियन बना था.

First published: 28 May 2016, 2:42 IST
 
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