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यूएन महासचिव बान की मून ने बढ़ती असहिष्णुता को लेकर चिंता जताई

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) महासचिव बान की मून ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ‘मुसलमानों के साथ भेदभाव’ और हिंसा के अन्य रूपों के खिलाफ बोलने की अपील की है.

उन्होंने कहा है कि वह विश्व भर में बढ़ती असहिष्णुता और ‘नफरत के आधार पर हिंसा’ की घटनाओं से चिंतित हैं. मून की यह प्रतिक्रिया उस दौर में आई है, जब भारत में भी असहिष्णुता के विषय पर सड़क से लेकर संसद तक बहस चल रही है.

बान की मून ने नस्लीय भेदभाव उन्मूलन’ अंतरराष्ट्रीय दिवस पर कल आयोजित एक महासभा को संबोधित करते हुए कहा कि नस्ल के आधार पर किसी पर संदेह करने और विशेष समुदायों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं. यूएन महासचिव ने विभाजनकारी एवं खतरनाक मिथकों को भड़काने के लिए ‘अतिवादी दक्षिणपंथी’ राजनीतिक दलों को दोषी ठहराया.

उन्होंने कहा कि मैं विश्व भर में असहिष्णुता, नस्लवादी विचारों और नफरत आधारित हिंसा के बढने से चिंतित हूं. आर्थिक कठिनाई और राजनीतिक अवसरवाद, अल्पसंख्यकों के खिलाफ शत्रुता बढ़ा रहे हैं. ऐसा सबसे प्रत्यक्ष रूप से शरणार्थी विरोधी, प्रवासी विरोधी और खासकर, मुस्लिम विरोधी हमलों और हिंसा में दिखने को मिल रहा है.

मून ने कहा कि यहां तक कि कभी मध्यमार्गी रही पार्टियों ने वर्तमान परिदृश्य में अपने विचारों को कट्टर कर लिया है, कभी उदारवादी रहे देशों में अब विदेशी लोगों को नापसंद किए जाने की घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है और कभी संयमित रही आवाजों ने पिछली सदी के सबसे काले अध्यायों के खतरों को एक खरतनाक तरीके से भुनाया है. इन सभी ने सामाजिक स्थिरता और संघर्ष को बढावा दिया है.

गौरतलब है कि भारत में भी पिछले काफी समय से असहिष्णुता को लेकर लंबी बहस चल रही है. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर कांग्रेस की ओर से लगातार आरोप लगाए जा रहे हैं कि सरकार धर्म विशेष के लिए तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है.

First published: 20 March 2016, 8:54 IST
 
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