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अमेरिका ने चीन की मिलिट्री एजेंसी पर लगाया प्रतिबंध, इस कानून के उल्लंघन का आरोप

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 September 2018, 13:04 IST
(file photo )

अमेरिका ने कानून के उल्लंघन के आरोप में चीन की की मिलिट्री एजेंसी इक्विपमेंट डिवेलपमेंट डिपार्टमेंट पर प्रतिबंध लगा दिया है. इसके साथ ही उसके निदेशक ली शांगफु को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है. ये प्रतिबंध रूस से सैन्य उपकरण खरीदने के दौरान अमेरिकी कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगा है. प्रतिबंध के बाद चीन की ये मिलिट्री एजेंसी अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में निर्यात लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं कर पाएगी. इसके अलावा फॉरेन एक्सचेंज ट्रांजेक्शन में भी भाग नहीं ले पाएगी.

मीडिया खबरों के मुताबिक, आरोप है कि चीन की मिलिट्री एजेंसी ने अमेरिका के एक कानून का उल्लंघन किया है. उसने कानून का उल्लंघन कर रूस की हथियार निर्यात कंपनी से डील की है. इसके तहत चीन की कंपनी ने रूस से साल 2017 में हथियार खरीदे थे. इसमें 10 सुखोई, 35 लड़ाकू विमान और 2018 में जमीन से हवा में मार करने वाली एस-400 मिसाइल शामिल हैं. इसको लेकर अमेरिका ने चीन की मिलिट्री एजेंसी को प्रतिबंधित कर दिया है. अमेरिका ने ये प्रतिबंध अपने एक कानून के उल्लंघन पर लगाया है.

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने जानकारी देते हुए बताया कि साल 2017 में काउंटरिंग अमेरिकाज अडवर्सरजी थ्रू सैंक्शंस एक्ट-काटसा (सीएएएसएसी) लागू किया गया था. इसके अनुसार, ईरान, उत्तरी कोरिया और रूस पर प्रतिबंध लगाया गया है. इसमें रूस से रक्षा उपकरण खरीदने पर भी रोक लगाई गई है. ट्रंप प्रशासन ने रूस की मिलिट्री और खुफिया एजेंसी से जुड़े 33 लोगों और कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है. इनके साथ डील करने वाले किसी भी देश पर अमेरिका कार्रवाई कर सकता है.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि चीन की एजेंसी पर लगे प्रतिबंध का असल निशाना रूस है. इस प्रतिबंध की मदद से अमेरिका का उद्देश्य किसी देश की रक्षा क्षमता को कमजोर करना नहीं है. इसका उद्देश्य रूस को उसकी गलत हरकत की कीमत चुकाना है.

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First published: 21 September 2018, 13:04 IST
 
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