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अमेरिकी एनजीओ के बाहर निकाले जाने की धमकी पर सरकार की सफ़ाई

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 December 2016, 7:42 IST
(मलिक/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • अमेरिका की गैर सरकारी संस्था कंपैशन ने कहा है कि भारत सरकार संस्था पर धर्म परिवर्तन का आरोप लगाकर उसकी गतिविधियों में रोड़ा अटका रही है. 
  • वहीं सरकार ने कहा है कि देश में 30 लाख से ज़्यादा एनजीओ सक्रिय हैं और कानून के दायरे में रहकर काम करने वाली सभी संस्थाओं का स्वागत है. 

अमेरिकी एनजीओ कंपैशन इंटरनेशनल गृह मंत्रालय में पहले से सुर्खियों में बना हुआ है. उस पर एफसीआरए एक्ट के उल्लंघन का आरोप है. अब एनजीओ ने धमकी दी है कि वह भारत को सहायता राशि देना बंद कर देगा क्योंकि उस पर ‘सरकार की वर्तमान विचारधारा के विपरीत अवैध गतिविधियों में संलग्न होने का आरोप लगा कर निशाना बनाया जा रहा है.’ वहीं सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कानून के दायरे में रहकर काम करने वाले सभी संगठनों का देश में स्वागत है. 

जब अमेरिकी कांग्रेस की विदेश मामलों की समिति ने इसके बारे में सुना, तो उसने भी संगठन का समर्थन किया. पहले इस मुद्दे को अमेरिकी राज्य सचिव जॉन केरी ने उठाया था, जब वे पिछले दिनों नई दिल्ली आए थे. जिस एनजीओ पर पूरा भरोसा था, वह आज विवादों में घिर गई है क्योंकि सरकार को शक है कि वह लोगों का धर्म परिवर्तन करने में लगी है. उसे गृह मंत्रालय से पहले मंजूरी लेने वालों की सूची में शामिल कर दिया गया है. अब एनजीओ केंद्र की मंजूरी के बिना विदेशी फंड नहीं ले सकते.

कंपैशन इंटरनेशनल पर आरोप है कि वह अपने उन साथी एनजीओ को अवैध रूप से फंड ट्रांसफर करती रही है, जो एफसीआरए एक्ट के अधीन पंजीकृत नहीं हैं. कई भारतीय एनजीओ भी केंद्र की कार्रवाई से नाराज थे. पिछले दिनों सरकार ने उनके एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिए थे, या फिर पहले मंजूरी लेने वालों की सूची में डाल दिया था. 

एनजीओ का दावा

संगठन के उपाध्यक्ष और मुख्य सलाहकार स्टीफन ओकले ने अमेरिकी कांग्रेस की विदेश मामलों की समिति को कहा, ‘कंपेशन इंटरनेशनल भारत में अपनी मानवीय गतिविधियों को तीन महीने में स्थाई रूप से रोक देगी.’ ओकले ने समिति से भारत सरकार को कहने को कहा कि ‘वह गृह मंत्रालय से पहले मंजूरी लेने वाली बात को रद्द कर दे ताकि कंपैशन अपनी देखरेख में प्रायोजित बच्चों को फंड दे सके.’

ओकले ने जोर देकर कहा कि आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय और इंटेलिजेंस ब्यूरो सहित भारतीय एजेंसियां परेशान कर रही हैं. उन्होंने अपने दो सहयोगी एनजीओ- करुणा बाल विकास और कंपैशन ईस्ट इंडिया के लाइसेंस की भी मांग की. करुणा बाल विकास की जांच आयकर विभाग कर रहा है और कंपैशन ईस्ट इंडिया की प्रवर्तन निदेशालय. दोनों जांचें लंबित पड़ी हैं.

  

ओकले का दावा है कि आयकर विभाग ने करुणा बाल विकास पर धार्मिक ट्रस्टों को पैसा ट्रांसफर करने के लिए 18 मिलियन कर का अनुमान लगाया है. विभाग ने यह जांच करना या निश्चित करना अनिवार्य नहीं समझा कि ये गतिविधियां धार्मिक थीं या धर्मार्थ.

ओकले ने एनडीए सरकार पर ही आरोप नहीं लगाए. उन्होंने कहा कि यूपीए-2 द्वारा एफसीआरए एक्ट में किए गए परिवर्तन उन्हें निशाना बनाने का आधार बने हैं. सरकार ने इसका इस्तेमाल ‘धार्मिक चैरिटीज को निशाना बनाने के लिए किया है, जो वैध गतिविधियों में संलग्न हैं, पर वर्तमान सरकार उसे अपने सिद्धांतों के विपरीत मानती है.’ 

ओकले का आरोप है कि, ‘भारत सरकार ने कंपेशन पर अवैध धर्मांतरण और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में होने का आरोप लगाकर अपने ही कानूनों की अनदेखी और उल्लंघन किया है.’ सुनवाई में ओकले ने इसका भी प्रस्ताव रखा कि जिन पार्टनर्स के लिए सरकार चिंतित है, उन्हें हटा दिया जाए. ‘यदि किसी पार्टनर विशेष को लेकर परेशानी है, तो हम उसे अपने नेटवर्क से हटा देंगे.’

सहयोग की दुहाई

विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष एड रॉयस ने कंपैशन को ‘गरीब बच्चों की मदद करने वाला एकमात्र सबसे बड़ा एनजीओ’ बताते हुए कहा, ‘हमने इस संबंध में नौ महीने और सैकड़ों घंटे भारतीय नौकरशाही के साथ गुजारे हैं, और अब लगता है कि नौकरशाही हाथ खड़े कर रही है.’ 

ओकले ने आगे कहा, ‘अभी हाल की बात है, गृह मंत्रालय ने 330,000 डॉलर की वापसी को रोक दिया, जो कंपैशन ने अपने भारतीय पार्टनर को मदद के लिए ट्रांसफर किए थे. जिस पार्टनर को भारत में वह राशि मिलनी थी, नहीं मिली और ना ही कंपैशन के पास लौटी. गृह मंत्रालय का निचले स्तर पर उत्पीड़न और धमकी काफी व्यापक है, यह महज कंपैशन तक सीमित नहीं है.’ 

एशिया पॉलिसी डाइरेक्टर ऑफ ह्यूमन राइट्स वॉच के जॉन शिफ्टन ने भी हाउस कमेटी को कहा कि वह भारत सरकार से एनजीओ को परेशान नहीं करने का अनुरोध करें. कहा जा रहा है कि उन्होंने सुनवाई में यह कहा, ‘अमेरिकी अधिकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी अनुरोध करें कि वे एनजीओ पर हो रहे सरकारी उत्पीड़न को खत्म कराए. साथ ही संसद में एफसीआरए एक्ट में संशोधन करने को प्रेरित करें, ताकि भ्रष्टाचार पर नियंत्रण हो और गृह मंत्रालय के अधिकारी एनजीओ का फंड ब्लॉक नहीं करें.’

कंपैशन की अहमियत

ओबामा प्रशासन में राज्य के निवर्तमान सचिव कैरी जब पिछले दिनों नई दिल्ली आए थे, उन्होंने भारत-अमेरिकी रणनीतिक और वाणिज्यिक वार्ता के दौरान केवल कंपैशन पर चर्चा की. उन्होंने नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी सहित अमेरिका के अन्य संगठनों को अनदेखा किया. उन पर भी गृह मंत्रालय की ओर से उच्च स्तर की समीक्षा चल रही है. नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी खुद को अनूठा द्विदलीय संगठन बताता है, जिसे अमेरिकी कांग्रेस का समर्थन प्राप्त है. 

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने तब कैली से कहा था कि भारत की सभी संगठनों से गुजारिश है कि वे देश के नियमों-विनियमों की पालना करें. हालांकि उन्होंने गृह मंत्रालय को इस मामले पर विचार करने को कहा था. नतीजतन 19 सहयोगी एनजीओ को छूट मिली. उन्हें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से फंड्स लेने की अनुमति दी गई.

गृह मंत्रालय का पक्ष

देश में गैर सरकारी संगठनों के कामकाज की एक पूरी व्यवस्था है. फिलहाल देश में 30 लाख से ज़्यादा एनजीओ सक्रिय हैं जो दुनिया में एनजीओ के सबसे बड़े नेटवर्क में से एक है. हम देश में कानून सम्मत एनजीओ गतिविधि का स्वागत करते हैं. भारत सरकार को आशा है कि वह यूएस कांग्रेस और प्रशासन के साथ काम करता रहेगा ताकि भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में और बेहतरी आए. 

First published: 9 December 2016, 7:42 IST
 
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