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अमेरिकाः भारत की एनएसजी सदस्यता पाने की राह का रोड़ा बना चीन

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 January 2017, 16:49 IST

अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासनिक अमले ने न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) में भारत को सदस्यता मिलने की राह में रोड़ा अटकाने वाले मुल्क के रूप में चीन का नाम लिया है. एनएसजी के सदस्य देशों की राय से बिल्कुल अलग जाकर चीन ने गैरों जैसा व्यवहार किया और भारत का रास्ता रोक दिया.

चीन पर भारत की सदस्यता न मिलने की जिम्मेदारी डालते हुए ओबामा प्रशासन में असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर साउथ एंड सेंट्रल एशिया निशा देसाई बिस्वाल ने कहा, "भारत को एनएसजी सदस्यता न मिलने के लिए अगर कोई जिम्मेदार है तो वह चीन ही है और इस मुद्दे का समाधान किए जाने की आवश्यकता है."

अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक चीन द्वारा किए गए विरोध के चलते ही भारत का एनएसजी में दाखिला नहीं हो पाया और वो भी तब जब भारत इसके लिए जरूरी सभी औपचारिकताओं को पूरा कर चुका था.

निशा ने आगे कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा इस बात को लेकर पूर्णतया स्पष्ट थे कि भारत को एनएसजी में सदस्यता मिलनी ही चाहिए. अमेरिका ने इसको लेकर काम भी किया लेकिन फिर भी यह संभव नहीं हो पाया."

अमेरिका ने भारत के आवेदन का पूरी तरह समर्थन किया और राष्ट्रपति ने विदेश मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार और अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर यह काम किया. सदस्य राष्ट्रों की कुछ चिंताएं थीं जिन्हें दूर करने का प्रयास किया.

उन्होंने विश्वास जताया कि अमेरिका की नई सरकार भी भारत के इस आवेदन का यूं ही समर्थन करेगी. वह चीन के भेदभाव वाले रुख से निपटने में कामयाब होगी और भारत को यह सदस्यता दिलाने में कामयाब होगी.

गौरतलब है कि ओबामा प्रशासन द्वारा यह महत्वपूर्ण बयान ऐसे वक्त में जारी किया गया है जब अमेरिका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कुछ दिन बाद राष्ट्रपति की कुर्सी संभालने वाले हैं. 

First published: 15 January 2017, 16:49 IST
 
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