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चीन को लेकर दलाई लामा बोले, भारत ने मेरा कभी रणनीतिक इस्तेमाल नहीं किया

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 April 2017, 13:25 IST

बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा को लेकर चीन के साथ भारत का मौखिक विवाद बढ़ता जा रहा है. इसके बाद दलाई लामा की प्रस्तावित तवांग यात्रा से बुरी तरह बिफरे चीन के विदेश मंत्रालय ने विरोध दर्ज कराते हुए भारतीय राजदूत विजय गोखले को समन भेजा है. उधर, बौद्ध धर्म गुरु का कहना है कि तिब्बत चीन से सिर्फ आजादी नहीं, स्वायत्तता चाहता है.

दलाई लामा ने खुद को प्राचीन भारतीय विचारों और मूल्यों का दूत बताते हुए कहा, "चीन को चुनौती देने के लिए भारत मेरा रणनीतिक इस्तेमाल नहीं कर रहा है." गौरतलब है कि लामा की अरुणाचल यात्रा से बौखलाए चीन ने इससे पहले भारत पर आरोप लगाया था कि भारत, चीन को चुनौती देने के लिए दलाई लामा का रणनीतिक तौर पर इस्तेमाल कर रहा है. अब दलाई लामा ने चीन को जवाब देते हुए इन आरोपों को खारिज किया है.

लामा ने कहा, "भारत ने मेरा कभी रणनीतिक इस्तेमाल नहीं किया. मैं जहां भी जाता हूं, लोगों को भारतीय अहिंसा, करुणा और धार्मिक सौहार्द के दर्शन के बारे में बताता हूं.

इससे पहले चीनी विदेश प्रवक्ता हुआ शुनिंग ने कहा, "हम भारत से मांग करते हैं कि वो तिब्बती धर्मगुरु का सहारा लेकर ऐसा कुछ भी न करे, जो चीन के हित में न हो. बेवजह भारत और चीन के बीच के संवेदनशील मुद्दों को तूल न दिया जाए."

 

2008 के बाद पहली बार चीन ने भारतीय राजदूत को समन भेजा है. साल 2008 में चीन ने तत्कालीन राजदूत निरुपमा राव को समन भेजा गया था. उस वक्त तिब्बती शरणार्थियों की तरप से चीन में होने वाले ओलंपिक के विरोध को लेकर समन भेजा था. दिल्ली में तिब्बती शरणार्थी ओलंपिक के विरोध में सड़कों पर उतरे थे.

वहीं, दूसरी तरफ केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू का भी कहना था कि अरुणाचल भारत का अभिन्न हिस्सा है. चीन को दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए.

दलाई लामा ने बुधवार को कहा कि भारत ने उनका इस्तेमाल कभी भी चीन के खिलाफ नहीं किया. उन्होंने चीन से तिब्बत को 'स्वशासन' तथा 'स्वायत्तता' प्रदान करने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा, "चीन में कई लोग हैं, जो भारत से प्रेम करते हैं, लेकिन अपने विचारों के कारण कुछ संकीर्ण मानसिकता के राजनीतिज्ञ हैं. वे मुझे शैतान मानते हैं."

उन्होंने कहा, "मैं भारत में बेहद लंबे समय से मेहमान के रूप में रह रहा हूं. भारत ने कभी भी मुझे चीन के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया." दलाई लामा ने कहा, "तिब्बत भौतिक रूप से भले ही पिछड़ा है, लेकिन आध्यात्मिक रूप से वह बेहद समृद्ध है. भौतिक रूप से विकास के लिए हमें चीन के साथ रहने की जरूरत है, क्योंकि यह हमारे हित में है. सरकार (चीन) को परस्पर लाभ के लिए अच्छा महसूस करना चाहिए."

First published: 6 April 2017, 13:25 IST
 
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