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दोस्त बदल सकते हैं लेकिन पड़ोसी नहीं: अब्दुल बासित

आवेश तिवारी | Updated on: 5 December 2016, 8:10 IST
(फाइल फोटो )
QUICK PILL
  • पाकिस्तान के हाई कमिश्नर अब्दुल बासित पिछले दिनों \'पत्रिका\' समूह के एक कार्यक्रम में शरीक होने लखनऊ आए थे. पेशावर के रहने वाले अब्दुल बासित ने तमाम मुद्दों पर खुलकर बातचीत की. 
  • बुरहान वानी पर दिए गए बयान पर बासित अभी भी क़ायम हैं. उन्होंने कहा कि अगर आपको मुझपर शक़ है तो ख़ुद बुरहान वानी के पिता से पूछ लीजिए कि वो अपने बेटे को किस रूप में देखते हैं.

भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने एक सवाल के जवाब में कहा है कि दोनों मुल्क़ों की अपनी कमज़ोरियां हैं और अपनी ताक़त. कई मोर्चों पर भारत का कोई मुक़ाबला नहीं तो कुछ मामलों में वह ख़ुद को बेहतर बताते हैं. उन्होंने अपने देश के मीडिया को ख़ासतौर पर ज़्यादा आज़ाद बताया. उन्होंने कहा, 'हमारा मीडिया सुबह-शाम सरकार की आलोचना करता है.' पढ़िए उनसे हुई बातचीत का हिस्सा.

सवाल-जवाब

एक पाकिस्तानी राजनयिक के लिए हिन्दुस्तान आना एक दोस्त के यहां आने जैसा है, एक पड़ोसी के यहां आने जैसा है या एक दुश्मन के यहां आने जैसा?

पड़ोसी पड़ोसी होता है. आप दोस्त बदल सकते हैं लेकिन पड़ोसी नहीं बदल सकते हैं. यह अच्छा हो कि हम मिलजुल कर रहें. दो मुल्कों के बीच जो ताल्लुक होते हैं, उनमें कोई बड़ा छोटा नहीं होता है. अगर हम यह बात मान लें तो हमारी सारी परेशानियों का हल खुद-बखुद निकल जाएगा. 

आपने जर्मनी में भी काम किया है ,रूस और न्यूयॉर्क में भी रहे हैं. उन मुल्क़ों के मुक़ाबले भारत में काम करना आसान है या मुश्किल?

हिन्दुस्तान हमारे लिए अहम मुल्क है. बेशक दोनों मुल्कों के बीच तनाव के हालात हैं, ऐसे में चुनौतियां ज़ाहिर हैं. लेकिन यह भी सही है कि चूंकि जुबान एक जैसी है, जान-पहचान भी है तो काम करना कुछ आसान भी हो जाता है. 

इधर बीच दोनों देशों के बीच कूटनीति के स्तर पर चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं, आपके यहां भी एक कर्मचारी के खिलाफ कारवाई हुई. अभी कुछ दिन पहले इस्लामाबाद से कराची पहुंचे भारतीय राजनयिक बम्बावाला को एक कार्यक्रम में बोलने नहीं दिया गया?

देखिये, मुझे नहीं मालूम वो किस वजह से बोल नहीं पाए. मैं आपको गिनवाना नहीं चाहता हूं लेकिन मैं पिछले 2.5 साल से यहां हूं और बहुत से ऐसे प्रोग्राम हुए जहां मैं नहीं जा सका. 

अब तक अपने कार्यकाल में आपकी विदेश मंत्री से कितनी मुलाकातें हुई हैं?

हम आपको नहीं बता सकते हैं कि हमारी कितनी बार मुलाकातें हुई हैं ,लेकिन यह जरुर है कि विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से हमारी मुलाक़ात होती रहती है. 

पाकिस्तान में सार्क सम्मलेन नहीं हो पाया, बांग्लादेश भूटान सभी ने विरोध किया, क्या पाकिस्तान को नहीं लगता कि वो दक्षिण एशियाई देशों से कटता जा रहा है?

अन्य देशों से अलग थलग पड़ने की बात सही नहीं है, सार्क सम्मलेन स्थगित हुआ है निरस्त नहीं हुआ है, 19वें सार्क सम्मलेन की हम मेज़बानी करेंगे. अब यह नहीं कह सकते कि यह सम्मलेन कब तक होगा लेकिन जब भी होगा पाकिस्तान में होगा. 

जब आप भारत के लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था की तुलना अपने मुल्क के लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था से करते हैं तो क्या पाते हैं?

हर देश अपने आप में अलग हैं जो आपकी समस्याएं है वो हमारे यहां नहीं है, यह जो तुलना करना है वो ठीक नहीं है. आपने आतंरिक चुनौतियां उतनी नहीं सही हैं, जितनी हमने सही हैं. हमने तानाशाही भी देखी है, पूर्वी और पश्चिमी सीमायें तनाव पूर्ण रही हैं. पिछले 15 सालों में जितना विकास किया है, उतना आप सोच भी नहीं सकते. 

हमारी न्यायिक प्रणाली ने हमारी सिविल सोसायटी ने बेहतर काम किया है. हमारा मीडिया तो आपके मीडिया से भी आगे हैं वो पाकिस्तान सरकार की सुबह शाम आलोचना करती है. बहरहाल, भारत की अपनी ताकत और अपनी कमज़ोरी है, ठीक हमारे साथ भी यही मामला है.  

सर्जिकल स्ट्राइक को आपने कुबूल करने से साफ़ इनकार कर दिया जबकि पाकिस्तानी मीडिया अलग दावे कर रही है. आयशा सिद्दीका को आप भी जानते हैं, उन्होंने भी लिखा था. आप बताएं क्या हुआ था 29 सितम्बर को?

देखिए, भारतीय मीडिया का भी एक हिस्सा सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल खड़ा कर रहा है और कह रहा है कि कोई सर्जिकल स्ट्राइक नहीं हुई. हमारा मानना है कि अगर कोई सर्जिकल स्ट्राइक होती तो पाकिस्तान उसका जवाब तुरंत देता. इसमें कोई सवाल ही नहीं उठता कि पाकिस्तान जवाब नहीं देता. देखिए, आपके डीजीएमओ का जो आधिकारिक बयान है, उसमे साफ़ कहा गया है कि सर्जिकल स्ट्राइक नियंत्रण रेखा पर हुई न कि नियंत्रण रेखा के पार हुई. 

आप भारत के साथ बातचीत के लिए पहल करने जा रहे हैं या इन्तजार करने जा रहे हैं?

हम इन्तजार कर रहे हैं. बातचीत के लिए भारत को पकड़कर बातचीत की मेज़ पर नहीं लाया जा सकता है. हां, हमारी कोशिशें जारी है. हम तो कहते ही रहते हैं कि सिर्फ़ बातचीत से ही भारत और पाकिस्तान के उलझे हुए मसले सुलझ सकते हैं. हमें तय करना होगा कि हमेशा यही हालात रहेंगे या सुधरेंगे भी. देखिये भारत के साथ सम्बन्ध ठीक होंगे तो हमारे लिए आसानी होगी. अगर भारत तैयार नहीं होता तो यह स्थिति आगे भी जारी रहेगी. 

सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर आप भारत के अन्य राजनैतिक दलों से बात हुई है कि नहीं?

बिल्कुल बातचीत होती रहती है. अन्य मुद्दों पर भी बातचीत होती है. हमारे काउंटरपार्ट बाम्बावाला भी पाकिस्तान में अलग अलग दलों से बातचीत करते होंगे. 

आपने पाकिस्तान की आज़ादी के मौके पर बुरहान वानी और कश्मीर की आजादी को लेकर बेहद विवादित बयान दिया था? नवाज़ शरीफ ने भी यूएन में उसे हीरो बना दिया?

जम्मू और कश्मीर का मुद्दा एक सच्चाई है. इसी की वजह से भारत और पाकिस्तान ने युद्ध लड़े और तल्खियां रही हैं. अगर हम आपसे यह कह दें कि आप बैठे नहीं हुए हैं तो यह गलत होगा. आप बैठे हैं, यही सच्चाई कश्मीर की है. अगर बुरहान वानी की मैय्यत में दो लाख लोग निकलकर आ रहे हैं तो कोई तो बात होगी? आप कश्मीर में जाकर किसी से पूछ लीजिये कि बुरहान वानी कौन थे, उनके वालिद से पूछ लीजिये. 

2014 में जब आप आये थे तो भारत पाकिस्तान के बीच बातचीत की सम्भावना बनी थी लेकिन उसी बीच आपने शब्बीर शाह से मुलाक़ात कर ली? आपको नहीं लगता पाकिस्तान एक मौका चूक गया?

मुलाकातें तो लम्बे समय से जारी थीं और होती रहेंगी, हमने कोई नया काम नहीं किया था. कोई नया काम होता या हम पहली बार मुलाक़ात कर रहे होते तो नाराज़गी वाजिब थी. सच्चाई यह है कि जिनका विरोध किया जा रहा है, पिछले 20 सालों से उन्हें भारत सरकार खुद भी मान्यता देती है. उन्हें हाई कमीशन आने देते हैं. वह कहीं भी आते-जाते हैं तो फिर कैसी पाबंदी ?

First published: 5 December 2016, 8:10 IST
 
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