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क्या प्रतिबंध हटने के बाद ईरान करेगा बाज़ार में पुरजोर वापसी?

अलीशा मथारू | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST

ईरान ने जब साल 2002 में अपने परमाणु कार्यक्रम को सार्वजनिक किया तो संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और दूसरे कई देशों ने उसपर प्रतिबंध लगा दिया था ताकि वो सैन्य परमाणु क्षमता न विकसित कर सके.

ईरान इस बात पर हमेशा जोर देता रहा है कि वो परमाणु क्षमता का केवल असैन्य इस्तेमाल के लिए विकसित कर रहा है.

रविवार को 15 साल बाद ईरान पर लगे प्रतिबंध हटे. ईरानी नेताओं ने इसका दिल खोलकर स्वागत किया. कई विश्लेषक इसे ईरान और पश्चिम के बीच नए संबंधों की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने रविवार को कहा कि उन्होंने 'ईरान के परमाणु बम बनाने के सभी संभावित रास्ते बंद कर दिए.'

ओबामा ने कहा, "ये ऐतिहासिक उपलब्धि कूटनीति से हासिल हुई है, इसके लिए मध्य पूर्व में एक और युद्ध नहीं करना पड़ा."

प्रतिबंध हटने के बाद ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी अगले हफ्ते इटली और फ्रांस की यात्रा करेंगे

शनिवार को आस्ट्रिया की राजधानी विएना में दुनिया के छह प्रमुख राष्ट्रों के राजनयिक इकट्ठा हुए. ये राजनयिक ईरान और विश्व की छह प्रमुख शक्तियों अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के बीच हुए परमाणु समझौते के एक साल होने पर उसके क्रियान्वयन पर बातचीत के लिए मिले थे.

इंटरनेशल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी(आईएईए) ने अपनी जांच में पाया था कि ईरान ने परमाणु कार्यक्रम रोकने के अपने वादे को ठीक से निभाया है.

ईरान ने अपना 98 प्रतिशत परमाणु ईंधन रूस भेज दिया है और अपना दो-तिहाई समृद्ध यूरेनियम नष्ट कर दिया है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार अगले हफ्ते ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी इटली और फ्रांस की यात्रा पर जाएंगे. अपनी यात्रा के दौरान वो पोप फ्रांसीस से भी मिलेंगे.

प्रतिबंध हटने की प्रक्रिया कब शुरू हुई?

प्रतिबंध हटाने की प्रक्रिया हसन रूहानी के साल 2013 में देश के राष्ट्रपति बनने के बाद शुरू हुई.

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा के पांच स्थायी सदस्यों देशों (अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, रूस, फ्रांस) और जर्मनी के साथ औपचारिक बातचीत शुरू की. उसी साल अप्रैल में इन देश 'आधारभूत समझौते' की घोषणा की.

करीब छह महीने बाद दोनों पक्षों ने परमाणु समझौता पर दस्तखत किए. इसे ज्वाइंट कम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ़ एक्शन(जेसीपीओए) कहा गया.

अब आगे क्या होगा?

प्रतिबंध हटने के बाद ईरान की अर्थव्यवस्था के कई प्रमुख सेक्टर में तेजी आ सकती है. इनमें तेल, गैस, बैंकिंग, बीमा और ऑटो सेक्टर प्रमुख हैं.

ईरान को सबसे पहला बड़ा फायदा ये होगा कि अपनी क़रीब 100 अरब डॉलर की अब तक फ्रीज संपत्ति वो दोबारा प्रयोग कर सकेगा. ये संपत्ति विदेशी खातों में थी जिसे प्रतिबंध लगने के बाद फ्रीज कर दिया गया था. विशेषज्ञों के अनुसार इसमें से आधी राशि पहले ही विदेशी कर्जदाताओं को चुकाने के लिए आवंटित की जा चुकी है.

उम्मीद की जा रही है कि ईरान कच्चे तेल का निर्यात भी बढ़ाएगा. अभी वो 11 लाख बैरेल कच्चा तेल हर रोज निर्यात करता है. माना जा रहा है कि वो पहले चरण में पांच लाख बैरेल प्रति दिन की बढ़ोतरी करेगा और उसके बाद फिर पांच लाख बैरेल प्रति दिन का निर्यात बढ़ाएगा.

ईरान को सबसे पहला बड़ा फायदा ये होगा कि उसकी क़रीब 100 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्ति वो दोबारा प्रयोग कर सकेगा.

पिछले 18 महीने में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत क़रीब 70 प्रतिशत कम हुई है. इसलिए माना जा रहा है कि ईरान को कच्चे तेल के निर्यात से जितनी कमायी की उम्मीद है उतनी होगी नहीं. इसके उलट, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की आमद बढ़ने से इसकी कीमत और कम हो सकती है.

ईरान ने वादा तोड़ा तो क्या होगा?

अगल विश्व के इन छह प्रमुख देशों को लगा कि ईरान ने अपना वादा तोड़ रहा है तो वो ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, रूस, चीन, ईरान और यूरोपीय संघ के एक पैनल में इसके खिलाफ़ शिकायत कर सकते हैं.

इस पैनल को 35 दिनों के अंदर शिकायत का निपटारा करेगा. अगर कोई देश पैनल के फैसले से असहमत होगा तो वो उसके खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जा सकता है.

संयुक्त राष्ट्र को 30 दिनों के अंदर फैसला करना होगा कि दोबारा प्रतिबंध नहीं लगाए जाएं. अगर सभी सदस्य देश किसी एक राय पर नहीं पहुंचे तो 'अपने आप फिर से' प्रतिबंध लागू हो जाएंगे.

क्या थे प्रतिबंध?

संयुक्त राष्ट्र ने ईरान पर चार प्रमुख प्रतिबंध लगाए थे-

  • भारी मशीनरों और परमाणु तकनीकी का ईरान को निर्यात करने पर प्रतिबंध.
  • हथियार निर्यात पर प्रतिबंध.
  • कई प्रमुख कंपनियों और व्यक्तियों की संपत्ति फ्रीज करना.
  • यातायात पर प्रतिबंध, बहुमूल्य धातुओं के कारोबार पर प्रतिबंध, कच्चे तेल के निर्यात पर प्रतिबंध, बैंकिंग लेनदेन इत्यादि प्रतिबंध.

यूरोपीय संघ द्वारा लगाए गए प्रतिबंध-

  • परमाणु संवर्धन के लिए प्रयोग किए जा सकने वाले सामान पर रोक.
  • उन ईरानी संस्थाओं और व्यक्तियों की संपत्ति को फ्रीज किया गया जो यूरोपीय संघ के अनुसार ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े हुए थे. ऐसे व्यक्तियों के यूरोप में प्रवेश पर भी प्रतिबंध था.
  • ईरानी बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लेनेदेन पर रोक.
  • ईरानी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात पर रोक. इससे पहले यूरोपीय संघ ईरान से निर्यात होने वाले 20 फीसदी तेल और गैस का खरीदार था. यूरोपीय कंपनियों ने ईरानी तेल शिपमेंट का बीमा करना भी बंद कर दिया.

जापान और दक्षिण कोरिया ने भी ईरान पर यूरोपीय संघ से मिलते जुलते प्रतिबंध लगाए थे.

प्रतिबंध का क्या प्रभाव पड़ा?

इन प्रतिबंधों के कारण ईरानी मुद्रा रियाल का विनिमय मूल्य काफी कम हो गया. खाने-पीने की चीजें और ईंधन की कीमत बहुत बढ़ गयी.

ईरान की जनसंख्या करीब आठ करोड़ है. जनसंख्या के अनुसार ये विश्व का 17वां सबसे बड़ा देश है.

देश में मुद्रा स्फीति की दर दो अंकों में पहुंच चुकी है. बेरोजगारी की दर 11 प्रतिशत हो चुकी है.

कौन से प्रतिबंध अभी नहीं हटे हैं?

ईरान पर लगे कई प्रतिबंध अभी जारी रहेंगे. ये प्रतिबंध आतंकवाद और मानवाधिकार उल्लंघन के लिए लगाए गए हैं.

इनमें से सबसे विवादित प्रतिबंध ईरान के रिवोल्यूशनरी गॉर्ड्स से जुड़ी किसी भी कंपनी के साथ कारोबार पर लगा प्रतिबंध है.

ईरान अगर अपने वादे से मुकरा तो उसपर बहुत कम समय में दोबारा प्रतिबंध लागू हो जाएंगे

ईरान को एक व्यापक जांच से भी गुजरना होगा ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि वो परमाणु सामग्री को किसी गुप्त ठिकाने पर पहुंचाकर चुपचाप परमाणु बम तो विकसित नहीं कर रहा.

समझौते के अनुसार अगले 15 सालों तक ईरान 3.67 प्रतिशत से ज्यादा परमाणु संवर्धन नहीं कर सकता. परमाणु रिएक्टर में प्रयोग के लिए प्राकृतिक यूरेनियम को परिष्कृत करके यूरेनियम-235 के आइसटोप का स्तर 3-4 प्रतिशत तक बढ़ाया जाता है. परमाणु हथियार बनाने के लिए इसका स्तर 90 प्रतिशत तक बढ़ाना होता है.

इन प्रतिबंध के हटने का ईरान पर क्या और कितना असर होगा ये तो वक्त बताएगा. फिलहाल, अमेरिका ने इन प्रतिबंध के हटने के तुरंत बाद कई ईरानी संस्थाओं और व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध लगा दिया है. अमेरिका ने कहा कि ये नए प्रतिबंध ईरान के हालिया बैलेस्टिक मिसाइल परीक्षण के कारण लगाए गए हैं.

First published: 19 January 2016, 11:43 IST
 
अलीशा मथारू @almatharu

सब-एडिटर, कैच न्यूज़.

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