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व्हाइट हेलमेट्सः जान की परवाह नहीं, बम गिरने के बाद ही शुरू होता है इनका काम

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 August 2016, 7:38 IST

एक ओर तो दुनिया के अधिकांश नौकरीपेशा लोग शांति और सुकून से भरा कार्यस्थल चुनते हैं. जहां न जाने में वक्त लगे और आसानी सेे काम पूरा करके वापस घर जाने का मौका मिले. लेकिन दुनिया में दूसरी ओर ऐसे लोग भी हैं जो केवल दूसरों के लिए जीते हैं. 

ऐसे ही लोगों का एक समूह है व्हाइट हेलमेट्स. इन लोगों का काम उस वक्त शुरू होता है जब बम ब्लास्ट हो जाता है, बम गिरा दिया जाता है या फिर लोग इसका शिकार हो जाते हैं. व्हाइट हेलमेट्स नाम है सीरियन सिविल डिफेंस के लिए काम करने वाले एक समूह का. जो बमों के गिरते ही प्रभावित स्थानों पर दौड़ कर पहुंच जाते हैं.

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सीरिया आज दुनिया में सबसे हिंसाग्रस्त स्थानों में शामिल है. वहां सार्वजनिक सेवाएं मौजूद नहीं हैं. ऐसी खतरनाक जगह पर यह हथियाररहित स्वयंसेवक अपनी जान जोखिम में डालकर प्रभावित लोगों-पीड़ितों की मदद करते हैं. भले ही पीड़ितों का धर्म-जाति कुछ भी हो इन व्हाइट हेलमेट्स का केवल एक ही मकसद होता है, लोगों की जान बचाना.

इस दल के लोग पागल नहीं हैं, दीवाने भी नहीं हैं और न हीं इन्हें रोमांच पसंद है. इनमें केवल एक ही जुनून है और वो है जीवन रक्षा का. कैसे भी करके किसी भी कीमत पर बमों के विस्फोट से घायल हो चुके लोगों को बचाने का. यह ऐसे लोग हैं जो स्वेच्छा से दुनिया की सबसे खतरनाक जगहों में से एक स्थान पर काम करते हैं.

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व्हाइट हेलमेट्स डॉट ओआरजी वेबसाइट की मानें तो जैसे-जैसे सीरिया की हिंसा बदतर होती जा रही है, वहां के आम लोगों को सबसे ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है. सीरिया में कहीं न कहीं औसतन प्रतिदिन 50 बम और मोर्टार गिरते हैं. इनमें से कई कीलों और विस्फोटकों से भरे होते हैं, जिन्हें सरकारी हेलीकॉप्टर्स पर निशाना साधकर मारा जाता है. इनमें बाजार और बेकरी सर्वाधिक निशाने पर रहते हैं.

और जब भी ऐसा होता है तो तुरंत यह व्हाइट हेलमेट्स वहां फंसे लोगों को बचाने निकल पड़ते हैं. वे इस बात से भी अच्छी तरह वाकिफ होते हैं कि राहत-बचाव कार्य के दौरान फिर से हमला हो सकता है और वो भी इसका शिकार बन सकते हैं.

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बावजूद इसके अबतक संस्था से जुड़े करीब 2,900 स्वयं सेवी 60 हजार से ज्यादा लोगों की जानें बचा चुके हैं और लगातार यह आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. 

व्हाइट हेलमेट्स में शामिल स्वयं सेवी बेकरी, दर्जी, इंजीनियर, फार्मेसिस्ट, पेंटर, बढ़ई, छात्र या फिर किसी भी क्षेत्र से जुड़े हो सकते हैं. हालांकि मानवता के हित में काम करने के ऐवज में इन्हें भी हर्जाना देना पड़ा और अब तक दूसरों की जान बचाने के दौरान 130 व्हाइट हेलमेट्स भी अपनी जान दे चुके हैं.

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यह व्हाइट हेलमेट्स लोगों की जीवन रक्षा के अलावा करीब 70 लोगों को अन्य सेवाएं भी देते हैं. इनमें प्रभावित क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति बहाल करना, बच्चों को सुरक्षित रहने की जानकारी देना, इमारतों में सुरक्षा के क्या इंतजाम किए जाएं आदि शामिल हैं. 

लेकिन व्हाइट हेलमेट्स की यह पूरी कहानी नहीं है. 168 सेकेंड्स के भीतर इनकी पूरी कहानी जानने के लिए देखें कैच का यह विशेष वीडियोः

First published: 24 August 2016, 7:38 IST
 
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