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पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष राहील शरीफ की गद्दी कौन संभालेगा?

पिनाकी भट्टाचार्य | Updated on: 15 March 2016, 9:00 IST
QUICK PILL
  • पाकिस्तान के सेना प्रमुख राहील शरीफ ने दोबारा पद पर रहने से इनकार कर दिया है.  उनकी जगह लेने की दौड़ में लेफ्टिनेंट जनरल इशफाक़ नदीम अहमद और लेफ्टिनेंट जनरल ज़ुबैर महमूद हयात को सबसे आगे बताया जा रहा है.
  • माना जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख लोकतांत्रिक तरीके से पद से हटकर ये संदेश देना चाहते हैं कि अव्यस्थित पाकिस्तान व्यवस्थित होने की राह पर बढ़ रहा है.

पाकिस्तान के सेना प्रमुख राहील शरीफ ने साफ कर दिया है कि वो सेवा विस्तार नहीं लेंगे. इसके बाद ये बहस तेज हो गयी है कि उनकी जगह कौन लेगा.

लेफ्टिनेंट जनरल इशफाक़ नदीम अहमद और लेफ्टिनेंट जनरल ज़ुबैर महमूद हयात को इस दौड़ में सबसे आगे बताया जा रहा है.

मेरा दांव नदीम अहमद पर है. शरीफ ने सेना प्रमुख बनने के बाद नदीम को चीफ ऑफ जनरल स्टाफ(सीजीएस) बनाया था. इस तरह नदीम के लिए दो अन्य सेवाओं के रास्ते खुले रहे.

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नदीम इस समय शरीफ के भाइयों नवाज़ और शाहबाज़ के 'संरक्षक' हैं. वो पाक सेना की मुल्तान और पंजाब स्थित दो महत्वपूर्ण कमांड के प्रमुख रह चुके हैं. वो मिलिट्री ऑपरेशन के भी डायरेक्टर जनरल रह चुके हैं.

महमूद हयात इस समय सीजीएस के प्रमुख हैं. वो पूर्व पाक सेना प्रमुख अशफाक़ परवेज कयानी के करीबी माने जाते हैं. कयानी के कार्यकाल में वो डायरेक्टर जनरल ऑफ स्टाफ रहे थे.

राहील शरीफ शायद अमेरिका को ये संदेश देना चाहते हैं कि वो लोकतांत्रिक ढंग से पद से हट जाएंगे

महमूद स्ट्रैटेजिक प्लांस डिविजन और न्यूक्लियर वारफेयर डिपार्टमेंट के भी प्रमुख रह चुके हैं. वो पंजाब में बहावलपुर स्थित 31 कॉर्प्स के कमांडिंग अफसर रह चुके हैं.

पाक सेना प्रमुख पद के इन दोनों दावेदारों को भारत के संग दोस्ताना रवैये का समर्थक नहीं माना जाता है. इसलिए दोनों में से जो भी पाक सेना प्रमुख बने भारत-पाक संबंध पहले ही की तरह नरम-गरम रहेंगे.

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दोनों अफसरों में से सेना प्रमुख कौन बनेगा ये इस बात पर भी निर्भर है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और सेना प्रमुख राहील शरीफ इस मुद्दे को किस तरह हल करते हैं.

नवाज शरीफ पाकिस्तान में चुनी हुई सरकार की स्थिरता को प्राथमिकता देंगे तो सेना प्रमुख चाहेंगे कि पाक सेना प्रमुख की मजबूत विरासत बनी रहे.

अदृश्य हाथ


अमेरिकी प्रशासन भी जनरल राहील शरीफ से काफी उम्मीद रखता है. क्योंकि उन्होंने उत्तरी वजीरिस्तान में तालिबान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की थी. जबकि कयानी ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था.

राहील शरीफ ने हक़्क़ानी नेटवर्क के खिलाफ भी कार्रवाई करने से गुरेज नहीं किया. जबकि उसे पाकिस्तानी खुफिया सेवा आईएसआई का अहम हथियार माना जाता है.

राहील शरीफ ने तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने में गुरेज नहीं किया

राहील शरीफ से चीन की सहानभूति भी मायने रखती है. माना जाता है कि चीन ने अमेरिका को उनके बारे में सकारात्मक संदेश दिया है.

लेकिन सवाल ये है कि अमेरिका से राहील शरीफ को क्या चाहिए? क्या वो भारत-पाक संबंधों में अमेरिकी मदद चाहते हैं? या वो ये चाहते हैं कि अमेरिका कम से कम पाकिस्तानी सेना को पैसे और हथियार देता रहे?

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राहील शरीफ ने पिछले साल नवंबर में अपने अमेरिकी दौरे के वक्त ये भांप लिया होगा कि उनका लोकतांत्रिक तरीके से समय पर रिटायर हो जाना अमेरिका को सकारात्मक संकेत होगा.

ऐसे में पठानकोट हमले के बाद राहील शरीफ का समय पर रिटायर होना चीन और अमेरिका को संदेश देगा कि अव्यस्थित पाकिस्तान व्यस्थित होने की राह पर है.

First published: 15 March 2016, 9:00 IST
 
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