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ब्रिटेन का ईयू से बाहर होना जलवायु परिवर्तन के लिए भी बड़ा धक्का है

निहार गोखले | Updated on: 26 June 2016, 8:45 IST
QUICK PILL

ब्रेग्जिट के बाद उम्मीद जताई जा रही कि जलवायु परिवर्तन को रोकने के वैश्विक प्रयासों में बाधा पहुंच सकती है. यूरोपीय संघ (ईयू) से बाहर होने के बाद यूनाइटेड किंगडम ईयू की पर्यावरण हितैषी नीतियों से बाहर हो जाएगा, इससे पेरिस समझौते को लागू करने में चुनौतियां का सामना करना पड़ेगा, जो पिछले साल दिसंबर में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सम्मेलन के दौरान किया गया था. संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार समझौते में फिर से संशोधन की आवश्यकता होगी.

ऐसी भी खबरें हैं कि यूनाइटेड किंगडम में ब्रेग्जिट के कट्टर समर्थक कार्बन कटौती को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं है. संभावित एग्जिट वोटर्स के जनमत में अधिकांश को जलवायु परिवर्तन के लिए वैज्ञानिक जनगणना का सवाल उठाते पाया गया. यूके में एग्जिट के समर्थक नेताओं ने पूर्व में क्लाइमेट चेंज के बारे में काफी प्रतिगामी बयान दिए थे.

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पेरिस समझौता

यूके को अभी भी यह समझौता अंगीकार करना है. इसका लेख में न केवल यूके बल्कि ईयू के दल द्वारा भी समझौता किया गया, यह समझौता इसके सभी सदस्यों की तरफ से किया गया. जलवायु परिवर्तन के संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की कार्यकारी सचिव क्रिस्टियाना फर्ग्यूस ने इस समझौते को पेरिस तक पहुंचाने में मदद की. 

उन्होंने हाल ही में कहा था कि ब्रेग्जिट के बाद इस समझौते को फिर से संशोधन की जरूरत पड़ेगी. ईयू के अंदर सत्ता संतुलन, जहां यूकेे की मतों में 13 फीसदी हिस्सेदारी है, अब पूर्वी यूरोप की ओर खिसक जाएगा. इससे इस पूरे संघ की जलवायु नीति पर प्रभाव पड़ेगा.

एग्जिट के बाद यूके की नीतियां

ईयू की तरह यूके की नीतियां जलवायु हितैषी नहीं है. अधिकांश एग्जिट वोटर्स ने जलवायु परिवर्तन से इनकार किया. 'एग्जिट या लीव' का समर्थन करने वाले मतदाताओं के हालिया सर्वे में पता चला है कि वे इस बात पर दोगुना विश्वास भरोसा करते हैं कि जलवायु परिवर्तन मानव निर्मित नहीं है. इनमें से दो तिहाई ने कहा कि मीडिया इसे बढ़ा-चढ़ा कर पेश करती है.

ईयू के पास ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने की काफी प्रगतिशील नीतियां थी लेकिन एग्जिट के बाद यूके अपनी अर्थव्यवस्था को तेज करनेे के लिए इनमें से कुछ को वापस ले सकता है.

मतदाताओं की संवेदनाओं को उन नेताओं ने आवाज दी जिन्होंने ब्रेग्जिट को आगे बढ़ाया.

यूके इंडिपेंडेंस पार्टी के नेता और ब्रेग्जिट के सबसे दमदार समर्थकों में से एक नीजल फारेज ने पूर्व में कहा था कि वे यूके के पावर स्टेशंस में प्रदूषण सीमाओं को खत्म करने के पक्षधर हैं.

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आगामी प्रधानमंत्रियों की संभावित सूची में कोई भी बहुत पर्यावरण हितैषी नहीं हैं. अगले प्रधानमंत्री के रूप में संभावित लंदन के पूर्व मेयर बोरिस जॉनसन भी इसी विचार के हैं.

दिसंबर 2015 में पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर के बाद एक संपादकीय पृष्ठ पर जॉनसन ने लिखा, "यह बहुत बेहतर खबर है कि दुनिया प्रदूषण में कटौती को राजी है और लोगों को पैसे बचाने में मदद करेगी, लेकिन मुझे यकीन है कि वे वैश्विक नेता एक पुराने डर की चपेट में थे जिसके मुताबिक वर्तमान में धरती के बढ़ते तापमान के पीछे इंसानी हस्तक्षेप है. जहां तक मैं विज्ञान को समझता हूं, यह धारणा निराधार है."

और यह सोच यूरोपीय यूनियन से बाहर हो रहे यूनाइटेड किंगडम की नई जलवायु नीतियों के लिए अच्छी खबर नहीं है.

First published: 26 June 2016, 8:45 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

Nihar is a reporter with Catch, writing about the environment, water, and other public policy matters. He wrote about stock markets for a business daily before pursuing an interdisciplinary Master's degree in environmental and ecological economics. He likes listening to classical, folk and jazz music and dreams of learning to play the saxophone.

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