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क्यों पैसे और जान जोखिम में डालकर लोग करते हैं माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई?

शौर्ज्य भौमिक | Updated on: 12 June 2016, 9:35 IST
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मौतें

'इन टू द थिन एयरः अ पर्सनल अकाउंट ऑफ द माउंट एवरेस्ट डिजास्टर' किताब के लेखक जॉन क्रैक्यूर कहते हैं, "एवरेस्ट हमेशा से ही सनकियों, प्रचार चाहने वालों, निराश प्रेमियों समेत अन्य ख्याली लोगों के लिए एक चुंबक जैसा रहा है."

क्रैक्यूर की यह किताब 1996 में एवरेस्ट अभियान पर आधारित है जिसमें एक ही दिन में आठ लोगों की जिंदगी खत्म हो गई थी.

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माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई के प्रयास अक्सर जानलेवा हादसों वाले होते हैं. एक पखवाड़े पहले शिखर पर पहुंचने की कोशिश में पांच लोग मर गए थे. इनमें से दो भारतीय थे.

यहां एवरेस्ट पर अभियान करने वालों का एक संक्षिप्त इतिहास दिया जा रहा है, जिसकी हमेशा से एक भारी कीमत चुकानी पड़ी है.

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फीट

  • है माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई
  • या फिर इसे 25 एफिल टॉवर्स की ऊंचाई के बराबर माना जा सकता है.
  • एवरेस्ट की अनुमानित आयु 6 करोड़ साल है.
  • एवरेस्ट के शिखर पर पहुंचने की प्रतिव्यक्ति लागत करीब 25 हजार अमेरिकी डॉलर (रुपये) आती है. 

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  • में दुनिया की इस सबसे ऊंची चोटी को न्यूजीलैंड के सर एडमंड हिलेरी और एक शेरपा तेनजिंग नॉर्गे ने पहली बार फतेह किया.
  • हालांकि 1924 में जॉर्ज मैलोरी और एंड्र्यू इरविन ने इसके शिखर पर पहुंचने की कोशिश की थी. लेकिन 75 साल बाद 1999 में उनका शव बरामद हुआ. इस बारे में अभी तक निष्कर्ष नहीं निकल सका है कि उन्होंने शिखर पर पहुंचने में सफलता पाई थी या नहीं.
  • इसकी सबसे चौंकाने वाली बात 1978 में देखने को मिली और फिर 1980 में जब रीनहोल्ड मेस्सनर बिना ऑक्सीजन के चोटी पर पहुंचे. इसके बाद से तमाम लोग सफलतापूर्वक ऐसा कर चुके हैं.

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  • लोग 1953 से लेकर 2016 के बसंत तक माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर चुके हैं.
  • इनमें से 953 शेरपा थे जो कई बार शिखर पर पहुंचे.
  • अब तक 80 देश इसकी चढ़ाई का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.

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  • लोगों की 1924 से लेकर बसंत 2016 तक एवरेस्ट के शिखर तक पहुंचने में मौत हो चुकी है.
  • इनमें से 113 शेरपा लोग थे.
  • मौत की प्रमुख वजह गिरना, हिमस्खलन, ऊंचाई का सामना और घबराना शामिल है.

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  • भारतीय भी एवरेस्ट फतेह करने में सफलता पा चुके हैं.
  • वर्ष 1965 में पहली बार किसी भारतीय ने सफलतापूर्वक चढ़ाई की.
  • अब तक 17 की जान जा चुकी है.

यह सवाल फिर भी सामने आ जाता है कि हम क्यों पैसे खर्च करते हैं, जोखिम उठाते हैं? क्या हमें इसके लिए प्रेरित करता है?

इस सवाल का जवाब देते हुए जॉर्ज मैलोरी ने पत्रकारों से कहा था, "क्योंकि इसका जवाब वहीं है."

First published: 12 June 2016, 9:35 IST
 
शौर्ज्य भौमिक @sourjyabhowmick

संवाददाता, कैच न्यूज़, डेटा माइनिंग से प्यार. हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियास्पेंड में काम कर चुके हैं.

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