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इतिहास में पहली बार जीरो से नीचे क्यों चली गई अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतें

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 April 2020, 9:29 IST

कोरोना महामारी संकट के कारण अमेरिकी कच्चे तेल में बड़ी गिरावट देखी गई है. इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब अमेरिकी तेल की कीमतें माइनस में चली गई. हालांकि मंगलवार को यह फिर से जीरो पर आ गई. कोरोना वायरस के कारण दुनियाभर से तेल की कीमतों की मांग में कमी आयी है, ऐसे में कोई भी देश अपने पास तेल का भण्डारण नहीं करना चाहता है. अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) का वायदा भाव सोमवार को -3.70 डॉलर प्रति बैरल पर रही, जो अबतक का सबसे कम भाव था.

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के पास कच्चे तेल के भंडारण की क्षमता फुल हो चुकी है और आगामी तीन सप्ताह के भीतर कच्चे तेल के सभी टैंक भर जाएंगे. इसलिए मौजूदा स्टोरेज को खाली करना आवश्यक है. बीते कुछ समय में तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आयी है. जून डिलीवरी के लिए यूएस क्रूड अभी भी 20 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा है लेकिन यह भी विनाशकारी है. सीएनएन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि कई तेल कंपनियों के दिवालिया होने की आशंका है. 


रूस, सऊदी अरब और अमेरिका को अपनी कीमतें कम करनी पड़ी हैं. लेकिन सबसे ज्यादा हालत तब ख़राब हुए जब कोरोना वायरस के कारण बाजर में कोई खरीदार नहीं बचा. माना जा रहा है कि सेकंड वर्ल्डवॉर के बाद यह पहली बार है जब कीमतें जीरो के स्तर तक लुढ़क गई. हालही रूस की कंपनी रोसनेफ्ट को अपने पडोसी देश बेलारूस को 4 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से सौदा करना पड़ा था.

तेल उत्पादक कंपनियों के सामने मुश्किल यह रहती है कि वह उत्पादन को रोक नहीं सकते हालांकि कटौती जरूर कर सकते हैं लेकिन इस कटौती के बावजूद भी तेल कोई नहीं खरीदना चाहता है क्योंकि दुनियाभर में वाहन से लेकर हवाई सेवाएं बंद हैं. एक बार उत्पादन बंद करने इसे फिर से शुरू करना बेहद महंगा है.

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First published: 21 April 2020, 9:12 IST
 
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