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क्यों अंतरिक्ष में वॉर अब केवल हॉलीवुड फिक्शन नहीं रहा ?

सुनील रावत | Updated on: 27 March 2019, 13:53 IST

विशेषज्ञों ने कुछ समय के लिए चेतावनी दी है कि अंतरिक्ष में युद्ध केवल हॉलीवुड फिक्शन नहीं हैं. अमेरिकी खुफिया समुदाय के नवीनतम विश्लेषण के अनुसार, परिदृश्य तेजी से बदल रहा है. भारत भी अब अंतरिक्ष में एंटी सैटेलाइट मिसाइल का सफल परिक्षण करने वाला चौथा देश बन गया है. इससे पहले अमेरिका, चीन और रूस का नाम इस सूचि में था. चीन ने 2007 जनवरी में एक अंतरराष्ट्रीय हंगामे का कारण बना जब उसने अपने स्वयं के उपग्रहों में से एक को नष्ट कर दिया, इस कार्रवाई ने अंतरिक्ष में खतरनाक मलबे के सैकड़ों टुकड़े छोड़ दिए और अंतरिक्ष में हथियारों की दौड़ की संभावना पर अलार्म बजा दिया.

एक महीने बाद, बीजिंग ने घोषणा की कि वह आगे भी इस तरह के परीक्षणों की योजना नहीं बनाएगा, लेकिन 11 जनवरी के परीक्षण ने पहले से ही चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम की बढ़ती प्रगति और साथ ही युद्ध की स्थिति में उपग्रह निगरानी से खुद को बचाने की क्षमता को स्थापित कर दिया था.

क्या है एंटी-सैटेलाइट ?

एक एंटी-सैटेलाइट (एएसएटी) हथियार सैटेलाइटों को नष्ट या बाधित करने की क्षमता रखता है. जिससे खुफिया जानकारी एकत्र करने की किसी भी देश की क्षमता बाधित होती है. ये हथियार हथियार हवा, जमीन या समुद्र पर आधारित हो सकते है. अक्टूबर 1957 में सोवियत संघ द्वारा दुनिया का पहला उपग्रह, स्पुतनिक लॉन्च करने के बाद, एंटी-सैटेलाइट सिस्टम पर शोध शुरू हुआ. 1980 के दशक तक संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ, दोनों ने उपग्रह-विरोधी मिसाइल परीक्षण किए. 1967 की संयुक्त राष्ट्र संधि में इस तरह की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया.

अमेरिका ने 1985 में अपना अंतिम परीक्षण किया, जिसमें लगभग 350 मील की ऊंचाई पर एक उपग्रह को नष्ट कर दिया. जनवरी 2007 में चीन एक सफल परीक्षण करने वाला तीसरा देश बन गया, जब उसने 530 मील से अधिक की ऊंचाई तक बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण किया. जो कि अमेरिकी और जापानी कल्पना खुफिया उपग्रहों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ऊँचाई थी.

चीन ने अपने एक उपग्रह को क्यों नष्ट किया?

परीक्षण के बाद वैश्विक आलोचकों को जवाब देने में चीन की देरी ने बीजिंग के इरादे पर संदेह पैदा किया. अटकलें इस बात पर लगीं कि परीक्षण के समय ने नागरिक, सरकार और चीन की सेना के नेतृत्व के बीच गलत संचार का संकेत दिया था या नहीं. सेंटर फॉर डिफेंस इंफॉर्मेशन (सीडीआई) के एक शोध विश्लेषक, विक्टोरिया के अनुसार "पिछली तीन असफल कोशिशों को देखते हुए, हो सकता है कि उन्हें काम करने की उम्मीद नहीं थी और इसीलिए वे सफल होने पर अनजान थे.

एक ASAT हथियार का उपयोग करने की क्षमता का प्रदर्शन करके, चीन अपने पड़ोसियों और दुनिया के लिए अंतरिक्ष में अपनी बढ़ती सेना को दिखा सकता है. सबसे महत्वपूर्ण बात, अमेरिकी दृष्टिकोण से, उपग्रहों को नष्ट करने की चीन की क्षमता का मतलब है कि यह एक अमेरिकी सैन्य कमजोरी को लक्षित कर सकता है.

अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती पर प्रतिबंध लगाने वाली संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए अमेरिका को मनाने के अपने लंबे प्रयासों में बीजिंग मास्को के साथ शामिल हुए . दोनों राष्ट्रों ने 2002 में जिनेवा में प्रस्तुत एक रूपरेखा का मसौदा तैयार किया था, जिसने सुर्खियां बटोरी थीं.

जानें क्या है एंटी सैटेलाइट मिसाइल की खूबियां, भारत ने कैसे किया इसका परीक्षण?

First published: 27 March 2019, 13:48 IST
 
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