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विकीलीक्सः हर वक्त हो रही जासूसी से आप खुद बेखबर

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 March 2017, 16:10 IST

विकीलीक्स द्वारा जारी ताजा दस्तावेज की मानें तो आप हर वक्त जासूसों की जद में हैं और आपको इसकी भनक तक नहीं होती. केवल बाहर घूमते हुए ही नहीं बल्कि अपने घर के ड्राइंग रूम या बेडरूम में भी आप पर नजर रखी जा रही है.

विकीलीक्स द्वारा अमेरिका की खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसी (CIA) के वो गुप्त दस्तावेज जारी किए गए हैं, जिनसे एक बार फिर लोगों की निजता में दखलंदाजी पर सवाल उठने लगे हैं. विकीलीक्स ने इन्हें Vault 7 नाम दिया है.

इस वेबसाइट की मानें तो CIA जब चाहे तब आपकी टीवी को एक माइक में बदलकर आपकी आवाज सुन सकता है, आपके स्मार्टफोन में पड़े चैट ऐप्स के एन्क्रिप्शन को बाईपास करके सीधे आपके ऑपरेटिंग सिस्टम को एक्सेस कर सकता है. और इसके अलावा वो भी कर सकता है जो आजतक आपने सोचा भी नहीं.

विकीलीक्स द्वारा जारी दस्तावेज द्वारा आरोप लगाया गया है कि CIA अब NSA से बदला ले रही है. विकीलीक्स ने इसके लिए 9,000 दस्तावेज पोस्ट किए और कहा कि यह CIA से लीक हुए हैं.

विकीलीक्स की मानें तो यह खुफिया दस्तावेज का अब तक का सबसे बड़ा प्रकाशन है. विकीलीक्स ने इन दस्तावेज के पहले प्रकाशन के साथ ही कहा इस ताजा लीक में CIA की पूरी हैकिंग क्षमता को उजागर किया गया है.

 

स्मार्ट टीवी सुनती है आपकी बातें

विकीलीक्स के मुताबिक CIA ने एक ऐसा टूल विकसित किया है जिससे आपका सैमसंग स्मार्ट टीवी एक जासूसी उपकरण बन जाता है. अमेरिकी और ब्रिटिश लोग इस जरिये से आपकी सैमसंग स्मार्ट टीवी को हैक कर लेते हैं और 'वीपिंग एंजेल' नाम के एक प्रोग्राम के जरिये जब यह बंद भी होती है, उस कमरे की आवाजों को रिकॉर्ड कर सकते हैं.

हालांकि सैमसंग स्मार्ट टीवी में कमरे की आवाज रिकॉर्ड करने का फीचर होता है और कंपनी ने पहले ही यह बता दिया है कि आप इसे सेटिंग्स में जाकर बंद भी कर सकते हैं.

 

एन्क्रिप्टेड चैट ऐप्स भी नहीं हैं सुरक्षित

अगर आप सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड चैट ऐप्स का इस्तेमाल करते वक्त खुद को सुरक्षित समझते हैं तो इतना तो तय है कि इसके वास्तविक एन्क्रिप्शन को तोड़ा नहीं जा सकता. लेकिन CIA इससे अलग काम करती है और आपके स्मार्टफोन के ऑपरेटिंग सिस्टम पर एक्सेस कर लेती है. इसके बाद इस चैट ऐप की सुरक्षा को बाईपास करना आसान हो जाता है. हालांकि इससे एक साथ ढेरों डिवाइसों पर कब्जा नहीं जमाया जा सकता और संबंधित व्यक्ति की निजी डिवाइस को हैक करना पड़ता है.

 

एंड्रॉयड और iOS पर भी कब्जा

CIA कथितरूप से गूगल के एंड्रॉयड और एप्पल के iOS ऑपरेटिंग सिस्टम पर कब्जा करके लोगों का डाटा हासिल कर सकती है. जहां एप्पल ने कहा है कि इस लीक जानकारी में जिन इश्यूज को शामिल किया गया है, नवीनतम iOS में उन्हें पहले ही दूर किया जा चुका है. लेकिन गूगल ने इस बारे में अब तक कोई टिप्पणी नहीं की.

 

हजारों मैलवेयर-ट्रोजन

दस्तावेज बताते हैं कि CIA ने 1,000 से ज्यादा वायरस, ट्रोजंस और अन्य सॉफ्टवेयर जैसे मैलवेयर सिस्टम्स बनाए हैं जिनका इस्तेमाल पर्सनल इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी डिवाइसों पर नियंत्रण करने के लिए किया जाता है. यह हैकिंग टूल्स एंड्रॉयड फोन, iPhone, स्मार्ट टीवी और माइक्रोसॉफ्ट डिवाइसों पर कब्जा जमाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं.

 

आपकी कार को कर सकती है बेकार

विकीलीक्स का दावा है कि CIA कारों में इस्तेमाल किए जाने वाले कंट्रोल सिस्टम्स को भी लक्ष्य बना रहा था. हालांकि उसके पास फिलहाल यह जानकारी नहीं है कि वो ऐसा कैसे करते. यूं तो इन खुलासों की सत्यता पर मोहर नहीं लगी है, लेकिन साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों की मानें तो यह तर्कसंगत या वाजिब हैं.

ट्विटर पर NSA के व्हिसलब्लोओर एडवर्ड स्नोडेन ने लिखा कि यह लीक हकीकत लगते हैं और कहा कि यह पहला सार्वजनिक सबूत है कि अमेरिकी सरकार गुप्त रूप से इस बात के लिए खर्च कर रही है कि अमेरिकी सॉफ्टवेयर्स असुरक्षित रहें.

First published: 8 March 2017, 16:10 IST
 
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