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क्या वार्ता की गेंद पाकिस्तानी पाले में है?

विवेक काटजू | Updated on: 9 January 2016, 8:16 IST
QUICK PILL
  • पटानकोट आतंकी हमले के बाद नरेंद्र मोदी-नवाज़ शरीफ़ के बीच फ़ोन पर हुई बातचीत को लेकर दोनों देशों ने अलग-अलग बयान जारी किए हैं. पाक द्वारा जारी बयान से यह साफ नहीं होता कि वह हमले में शामिल आतंकियों को पाकिस्तानी मानता है या नहीं.
  • भारतीय विदेश सचिव जनवरी में पाकिस्तान जाने वाले हैं. उनकी यात्रा के दौरान पाक किस तरह से प्रतिक्रिया करेगा ये भविष्य के गर्भ है लेकिन अब तक पाक गंभीर नज़र नहीं आ रहा है.

पठानकोट आतंकी हमले के बाद पांच जनवरी को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फ़ोन किया.

ये फ़ोन दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) से संपर्क करने के बाद आया. जो दोनों के बीच दिसंबर में बैंकॉक में बनी सहमति के अनुरूप था.

शरीफ़ ये संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि मोदी सरकार की पहल पर शुरू हुई शांतिवार्ता जारी रह सकती है. भारतीय विदेश सचिव एस जयशंकर ने भी जनवरी में प्रस्तावित अपनी पाकिस्तान यात्रा रद्द नहीं की है.

उम्मीद है कि मोदी इस पहल को आगे बढ़ाना चाहेंगे. उन्होंने इस बातचीत के लिए अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा को दांव पर लगाया है. ऐसे में इस वार्ता की भ्रूणहत्या होने से उनकी छवि को गहरा धक्का लगेगा क्योंकि ये अभी शुरू भी नहीं हुई है.

क्या पाकिस्तान नरेंद्र मोदी को आश्वस्त करने के लिए आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा?

लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या पाकिस्तान पठानकोट हमले के लिए जिम्मेदार आतंकवादियों पर कार्रवाई करेगा ताकि वो मोदी का भरोसा हासिल कर सके.   

बातचीत के बाद मोदी और शरीफ़ के दफ़्तरों से बयान जारी हुए. दोनों में बातचीत का ब्यौरा अलग-अलग था. कूटनीति में ये कई बड़ी बात नहीं है. दो देश अक्सर किसी बातचीत को अपने नज़रिये से पेश करते हैं. वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बातचीत के अलग-अलग हिस्से पर जोर देते हैं.

बहरहाल, दोनों देशों की तरफ़ से जारी बयानों से दोनों देशों के एनएसए के बीच होने वाली बातचीत के भविष्य का अंदाजा मिलता है?

भारतीय संस्करण

भारत के अनुसार मोदी ने "पाकिस्तान द्वारा पठानकोट में हुए आतंकी हमले से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं के ख़िलाफ़ तत्काल कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत पर जोर दिया."

बयान में आगे कहा गया, "इस हमले के बारे में पाकिस्तान को सटीक और कानूनी कार्रवाई करने योग्य सूचना दी जा चुकी है."

भारत के बयान से जाहिर है कि वो मानता है कि पठानकोट हमला पाकिस्तान स्थित आतंकियों ने किया है. भारत को इस बात पर भी भरोसा है कि उसके द्वारा दी गयी सूचना पाकिस्तान में कानूनी कार्रवाई करने के लिए काफी है.

पढ़ेंः सिर्फ मोदी तय नहीं करेंगे पाकिस्तान से संबंधों की दिशा, आरएसएस भी है

भारत के बयान में मोदी ने शरीफ़ से जो कुछ कहा केवल उसपर जोर दिया गया होता तो ये बड़ी बात नहीं होती लेकिन बयान में ये भी कहा गया है कि "शरीफ़ ने मोदी को आश्वासन दिया है कि उनकी सरकार आतंकियों के ख़िलाफ़ कड़ी और निर्णायक कार्रवाई करेगी."

बातचीत के संदर्भ से ये अर्थ निकाला जा सकता है कि शरीफ़ इस बात पर सहमत थे कि आतंकी पाकिस्तानी थे और भारत ने जो सूचना दी है वो कानूनी कार्रवाई के लिए काफी है.

पाकिस्तान संस्करण

पाकिस्तान की तरफ़ से जारी बयान से ऐसा बिल्कुल नहीं लगता. कार्रवाई के मुद्दे पर पाक ने पूरी तरह चुप्पी ओढ़ रखी है.

पाकिस्तान का बयान अपने विदेश मंत्रालय की तरफ़ से चार जनवरी को जारी बयान के अनुरूप ही रहा कि भारत ने हमले की जानकारी दी है और इसकी जांच की जाएगी.

पाक के बयान में कहा गया है कि "उनकी सरकार भारत सरकार द्वारा दी गयी जानकारी पर काम कर रही है और पाकिस्तानी सरकार मामले की जांच करेगी."

इस बयान से ये अर्थ निकाला जा सकता है कि पाकिस्तान न केवल भारत द्वारा दी गयी सूचना की पड़ताल करेगा बल्कि ख़ुद भी मामले की स्वतंत्र जांच करेगा.

पाकिस्तान ने पुरानी बात दोहरायी है कि आतंकी दोनों देशों की शांति वार्ता को पटरी से उतारना चाहते हैं

ध्यान देने की बात है कि पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने ख़ुद को भारत द्वारा दी गयी सूचनाओं की पड़ताल तक सीमित रखा.

भारत द्वारा दी गयी सूचना की पड़ताल की बात कहने का मतलब ये हुआ कि पाक प्रधानमंत्री जांच का नतीजा आने से पहले ही कोई राय नहीं दे सकते. कार्रवाई तभी हो सकेगी जब ये तय हो जाएगा कि आतंकी पाकिस्तानी थे.

पाकिस्तानी बयान में पहले ही की तरह ये भी कहा गया कि आतंकी दोनों देशों के बीच बातचीत को पटरी से उतारना चाहते हैं. बयान में कहा गया है कि दोनों देशों के प्रधानमंत्री "इस बात पर सहमत हैं कि दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण और सहयोगी रिश्ते बनाए रखना आतंकियों के नापाक मंसूबों का सबसे माकूल जवाब है."

भारत की तरफ़ से जारी बयान में मोदी की तरफ़ से व्यक्त ऐसी किसी विचार का जिक्र नहीं किया गया है.

बयानों के मायने

'आतंकी' जैसे चालू शब्द का प्रयोग करना और ये कहना कि वो दोनों देशों की बातचीत को पटरी से उतारना चाहते हैं से क्या ये माना जा सकता है कि शरीफ़ ने परोक्ष रूप से ये स्वीकार किया कि पठानकोट हमले के लिए पाकिस्तानी आंतकी जिम्मेदार हैं?

ऐसा है नहीं, क्योंकि पाकिस्तान मानता है कि कुछ भारतीय व्यक्ति और समूह इस प्रक्रिया में बाधक हैं.

पाकिस्तान के बयान से जाहिर है कि उसने 'कठोर और निर्णायक' कार्रवाई का फ़ैसला नहीं किया है

दोनों देशों के बयानों से जाहिर है कि एनएसए की बातचीत के बावजूद भी पाकिस्तान ने 'कड़ी और निर्णायक' कार्रवाई का फ़ैसला नहीं किया है. ऐसे किसी फ़ैसले के लिए पाकिस्तानी सेना को अपनी सुरक्षा योजना में आतंकियों की भूमिका पर बड़ा वैचारिक बदलाव लाना होगा.

पाक सेना को कुछ वैसी कार्रवाई करनी होगी जैसी 9/11 के हमले के बाद तालिबान के ख़िलाफ़ की गयी थी.

तालिबान की नजीर पर थोड़ा और गौर करना भी जरूरी है. जब अमेरिका ने तालिबान पर हमला शुरू किया तो पाकिस्तान ने पहले तो ख़ुद को तालिबान से दूर कर लिया लेकिन परोक्ष रूप से पाक सेना उसकी मदद करती रही. नतीजन, कुछ ही सालों में तालिबान ने फिर से इतनी शक्ति हासिल कर ली कि वो काबुल में दोबारा एक सफल विद्रोह कर सके.

इस बात की ज्यादा संभावना है कि पाकिस्तान पूरे मामले को घुमाना चाहेगा. साथ ही वो बीच-बीच में टुकड़ों में नरेंद्र मोदी को आश्वासन देता रहेगा.

एस जयशंकर की यात्रा के दौरान पाकिस्तान की क्या प्रतिक्रिया होगी ये बस वही जानता है. यानी गेंद पूरी तरह उसके पाले में है?

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First published: 9 January 2016, 8:16 IST
 
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