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ईरान में महिला संगीतकारों को मंच पर गाने से रोका गया

रंजन क्रास्टा | Updated on: 2 December 2015, 22:35 IST
QUICK PILL
  • महिला संगीतकारों को ऑर्केस्ट्रा में गाने की अनुमति नहीं मिलने की घटना के बाद ईरान के समाज में महिलाओं की भागीदारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
  • ईरान के राष्ट्रपति रोहानी पहले ही साफ कर चुके हैं कि देश में किसी भी तरह महिलाओं के खिलाफ लैंगिक भेदभाव की संस्कृति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

आधुनिक और उदार देश कीतरफ कदम बढ़ाते ईरान की छवि को एक बड़ा झटका लगा है. ईरान की सबसे पुरानी सिंफनी ऑर्केस्ट्रा को शुरू होने के ठीक पहले इसलिए रद्द कर दिया गया क्योंकि उसमें महिलाएं कार्यक्रम पेश करने वाली थीं. 

करीब 15 महीने बाद तेहरान सिंफनी ऑर्केस्ट्रा ईरान के राष्ट्रीय गान पर परफॉर्म करने वाला था. शो के ठीक पहले आयोजकों ने ऑर्केस्ट्रा कंडक्टर अली राहबरी को यह जानकारी दी कि महिला संगीतकारों के परफॉर्मेंस को इजाजत नहीं दी जा सकती. 

राहबरी ने बताया कि ऑर्गनाइजर्स ने उन्हें साफ शब्दों में बताया, 'स्टेज पर महिलाओं का म्यूजिकल परफॉर्मेंस कतई संभव नहीं है.' आयोजकों के फैसले से आक्रोशित शो के संचालक ने इसे महिलाओं का अपमान बताते हुए कहा कि ऑर्केस्ट्रा राष्ट्रगान को लेकर परफॉर्म करने वाला था. इसके बावजूद जब स्थिति नहीं संभली तो ऑर्केस्ट्रा ने अपनी महिला संगीतकारों के बिना स्टेज पर किसी भी तरह का कार्यक्रम देने से मना कर दिया. 

रविवार की इस घटना के बावजूद ईरान मध्य-पूर्व के देशों में महिलाओं के अधिकारों और उनकी भागीदारी के लिहाज से सबसे ज्यादा प्रगतिशील देश है. ईरान की महिलाएं सऊदी अरब की महिलाओं के मुकाबले ज्यादा अधिकार रखती हैं. सऊदी अरब की महिलाओं को अभी हाल में वोटिंग और स्थानीय निकायों में चुनाव लड़ने का अधिकार मिला है जबकि इस वक्त ईरान की संसद में नौ महिला सांसद हैं. 

सऊदी में जहां महिलाओं को अभी वोटिंग का अधिकार मिला है वहीं ईरान की सांसद में फिलहाल 9 महिला सांसद हैं

ईरान में महिलाओं को 1963 की शुरुआत में ही वोटिंग का अधिकार मिल गया था. महिलाएं वहां की सरकार में कैबिनेट मंत्री होने के साथ शक्तिशाली पदों पर रही हैं. उन्हें गाड़ी चलाने का अधिकार है और ईरान के विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाली कुल आबादी में महिलाओं की संख्या बेहद ज्यादा है. लेकिन इस तरक्की के बावजूद लंबे समय से ईरान में महिला संगीतकारों को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ रहा है. 1979 में ईरान की क्रांति के वक्त भी देश में महिला संगीतकारों को दमन का सामना करना पड़ा. ईरान की क्रांति के दौरान वहां महिलाओं के अधिकार को बड़ा झटका लगा. 

महिलाओं को मनाही

इस्लामी गणराज्य ईरान में संगीत के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के बाद संगीतकारों को कई तरह की कठिनाइयों का सामना कराना पड़ रहा है. धार्मिक संगठनों ने पहले यह तर्क दिया कि संगीत समाज के हित में नहीं है और फिर इसके बाद उन्होंने संगीत पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग कर डाली. 

हालांकि बाद में जल्द ही पारंपरिक और शास्त्रीय संगीत को प्रतिबंध के दायरे से बाहर कर दिया गया. लेकिन महिलाओं को इसके दायरे से बाहर ही रखा गया. उन्हें अभी भी परफॉर्म करने की आजादी नहीं है क्योंकि धार्मिक अधिकारियों को लगता है कि किसी महिला संगीतकार की आवाज पुरुषों को उकसाने का काम करती है.

कोई महिला संगीतकार केवल महिला दर्शकों की मौजूदगी में ही अकेले गा सकती है. इस नियम से बचने के लिए महिला संगीतकार सार्वजनिक सभाआें में किसी पुरुष संगीतकार के साथ ही गाने का विकल्प चुनती है क्योंकि कानून ऐसी किसी सभा में जहां पुरुषों की भी मौजूगी होती है वहां किसी महिला संगीतकार को अकेले गाने की आजादी नहीं होती. 

ईरान के कानून के मुताबिक ऐसी किसी सभा में जहां पुरुषों की भी मौजूगी होती है वहां किसी महिला संगीतकार को अकेले गाने की अनुमति नहीं है

ईरान में किसी भी संगीत कार्यक्रम के लिए सरकार की मंजूरी लेनी होती है. ईरान की क्रांति के बाद यह एक तरह से किसी लाइव परफॉर्मेंस पर लगे पूर्ण प्रतिबंध को हटाकर आगे की दिशा में उठाया गया एक कदम है. महिला संगीतकारों का दमन यहीं नहीं खत्म होता. महिलाओं पर ड्रम्स समेत कई म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट को बजाने की भी मनाही है. 

रविवार को कार्यक्रम पर लगा प्रतिबंध इस मायने में खास है क्योंकि यह पूरी तरह से कानूनों के मुताबिक था और उसे सरकार की मंजूरी मिली हुई थी. लेकिन इस तरह की घटनाओं में धीरे-धीरे बढ़ोतरी ही हो रही है. 

आधुनिकता को झटका

महमूद अहमदीनेजाद के दशक भर के शासन के बाद हसन रोहानी के सत्ता में आने से ईरान के भीतर रह रहे उदारवादियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं. रोहानी से लोग देश में उदारवादी विचारधारा को और अधिक मजबूत किए जाने की उम्मीद कर रहे थे. अभी भी वह इसराइल जैसे मुद्दे पर कट्टर रुख अपनाए हुए हैं लेकिन उन्होंने महिलाओं के मामले में अपने सुधारवादी रुख का प्रदर्शन किया है.

कट्टर धार्मिक संस्थाओं के विरोध के बावजूद उन्होंने ईरानी समाज में महिलाओं की स्थिति को लेकर सकारात्मक रुख अपनाए रखा है. टीवी पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'वह देश में लैंगिक भेदभाव की संस्कृति को बर्दाश्त नहीं करेंगे.' यह बयान अयातुल्लाह खमेनी के उस बयान के बावजूद दिया गया जिसमें उन्होंने लैंगिक समानता को 'पश्चिमी विचारों की गलती' बताया था. 

साफ तौर पर वह अयातुल्लाह की अतिवादी विचारधारा के खिलाफ कदम उठाने को तैयार हैं. समस्या यह है कि ईरान के राजनीति और धार्मिक समूह का कट्टरपंथी धड़ा रोहानी की नीतियों को पीछे धकेलने का काम कर रहा है. वह महिला संगीतकारों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं. 

अक्टूबर में इशाफान के एक सरकारी कार्यक्रम में महिला संगीतकारों को स्टेज पर  नहीं चढ़ने दिया गया. उन्हें बतौर दर्शक ही शो में शामिल होने की इजाजत दी गई. बाद में परफॉर्मेंस देने की अनुमति दी गई लेकिन ऐसा हुआ नहीं. 

रोहानी के पास जनमत है लेकिन वह अभी भी दशकों से चली आ रही स्त्रीविरोधी मानसिकता को खत्म करने के तरीके तलाश रहे हैं. ईरान फिलहाल अपनी पहचान को सुनिश्चित करने के लिए आंतरिक संघर्षों का सामना कर रहा है. रविवार को हुई घटना यह बताती है कि जमीनी स्तर पर ईरान अभी भी आधुनिकता से कोसों दूर है. 

 

 


First published: 2 December 2015, 22:35 IST
 
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