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Yahoo हो गया Altaba, जानिए इससे जुड़ी 9 जरूरी बातें

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 10 January 2017, 17:28 IST

तमाम उतार-चढ़ाव के बाद दुनिया की प्रमुख कंपनी याहू ने पिछले साल फैसला लिया कि यह अपना प्रमुख व्यवसाय देगी. इसके बाद वेरिजॉन से इसका सौदा हो गया. अब सोमवार को याहू ने घोषणा की कि वेरिजॉन में मर्जर के बाद इसकी चीफ एग्जीक्यूटिव मैरिसा मेयर कंपनी का बोर्ड छोड़ देंगी. हालांकि इन सबके बीच वेरिजॉन से डील पूरी होने के बाद याहू का अस्तित्व खत्म हो जाएगा और इसकी जगह यह अल्टाबा इंक कंपनी बन जाएगी.

सीधे शब्दों में कहें तो एक वक्त इंटरनेट की दिग्गज कंपनी का तमगा हासिल करने वाली याहू का दौर पूरा हो चुका है और इंटरनेट के शुरुआती दिनों में साइन अप करके सफलता की बुलंदियों पर पहुंचने वाली कंपनी लॉग आउट करने वाली है. इसे ठीक नोकिया की ही तरह समझा जा सकता है जो एक वक्त दुनिया के मोबाइल मार्केट में सबसे ज्यादा बिकने वाला ब्रांड था लेकिन उसने वक्त के साथ खुद को नहीं ढाला और बिक गई.

बिक सकती है दुनिया की दिग्गज कंपनी याहू

याहू के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ और इंटरनेट के शुरुआत को सटीक ढंग से समझने और मुनाफा कमाने के बाद यह अपना आगे का सफर सही ढंग से जारी नहीं रख सकी. और नतीजा आज इसका अस्तित्व ही मिट रहा है. अब आने वाले वक्त में याहू नहीं रहेगा, बल्कि इसे अल्टाबा के नाम से पहचाना जाएगा.

याहू में 1700 कर्मचारियों की छंटनी, सीईओ पर भी लटकी तलवार

इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ी 9 जरूरी बातेंः

  1. वेरिजॉन का सौदा पूरा होने के बाद याहू का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और इसे याहू के नाम से नहीं जाना जाना जाएगा. अमेरिका में एसईसी में जमा कराए गए आवेदन में याहू बोर्ड ने कहा है कि सौदा पूरा होने के बाद वो चाहते हैं कि कंपनी का नाम अल्टाबा इंक कर दिया जाए. 
  2. कंपनी के बोर्ड सदस्यों की संख्या घटाकर पांच कर दी जाए. टॉर ब्रैहैम, एरिक ब्रैंडिट, कैथरीन फ्रीडमैन, थॉमस मैकिनेर्नी और जेफ्री स्मिथ पांच निदेशक होंगे. एरिक ब्रैंडिट बोर्ड के चेयरमैन होंगे. 
  3. याहू के सह-संस्थापक डेविड फिलो भी कंपनी के बोर्ड को छोड़ रहे हैं और इसके साथ ही याहू काल का अंत हो जाएगा.
  4. याहू की सीईओ मैरिसा मेयर इसे छोड़ रही हैं. याहू द्वारा लिखा गया, "क्लोजिंग के साथ ही वो बोर्ड से इस्तीफा देने का मन बना चुकी हैं और वो कंपनी के साथ किसी भी मामले में असहमति से इस्तीफा नहीं दे रही हैं. फिर चाहे वो मामला कंपनी के ऑपरेशंस, पॉलिसी या प्रैक्टिस का ही क्यों न हो."
  5. याहू की वेब सेवाएं वेरिजॉन को बेची जा चुकी हैं. इसका मतलब जैसी ही सौदा पूरा होगा सभी याहू मेल, मैसेंजर आदि का संचालन वेरिजॉन के हाथों में होगा.
  6. इसके अलावा बाकी याहू (इसे एल्बाटा नहीं कहा जाएगा) अधिकांश रूप में एक इंवेस्टमेट फर्म के रूप में काम करेगी. कंपनी की अलीबाबा और याहू जापान में हिस्सेदारी है. इसके अलावा इसके पास कुछ अन्य इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी भी है.
  7. अल्टाबा, चीन की दिग्गज इंटरनेट कंपनी अलीबाबा से मिलता-जुलता लगता है. याहू या फिर अल्टाबा की अलीबाबा में 15 फीसदी (करीब 30 बिलियन डॉलर) की हिस्सेदारी है. 
  8. एक वक्त इंटरनेट की दिग्गज कंपनी में शुमार याहू इंटरनेट में तेजी से बढ़े विज्ञापन को भुनाने में असफल साबित हुई और इसी के चलते दुनिया में संभवता गूगल सबसे बड़ी कंपनियों में से एक हो गई. याहू के सर्च इंजन के प्रयास बेकार रहे और यह गूगल से मिलती चुनौती का सामना नहीं कर सकी. याहू ने अंतिम प्रयास के रूप में गूगल से मैरिसा मेयर को तोड़ा, लेकिन वो भी इसे नहीं बचा सकीं.
  9. याहू ने 1994 में शुरुआत की थी और यह दुनिया की दिग्गज कंपनियों में से एक बन गई. एक वक्त था जब तकरीबन हर इंटरनेट यूजर याहू ईमेल का इस्तेमाल करता था और याहू मैसेंजर पर चैटिंग करता था. याहू काफी बड़ी कंपनी थी लेकिन गूगल ने उसे पीछे कर दिया.

First published: 10 January 2017, 17:28 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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