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BCCI को हाई कोर्ट से लगा करारा झटका, इस टीम को देने होंगे 4800 करोड़, जानिए क्या है पूरा मामला

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 July 2020, 16:34 IST

BCCI asked to pay INR 4800 Crore to Deccan Chargers: साल 2009 का आईपीएल (IPL)  खिताब जीतने वाली आईपीएल फ्रेंचाइजी डेक्कन चार्जर्स (Deccan Chargers) को बीसीसीआई (BCCI) ने साल 2012 में हटा दिया था. डेक्कन चार्जर्स का मालिकाना हक डेक्कन क्रॉनिकल होल्डिंग्स लिमिटेड ( Deccan Chronicle Holdings Ltd.) के पास था, और उसने बीसीसीआई के फैसले के लिए खिलाफ कोर्ट में अपील की. इस मामले में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सी के ठक्कर को मध्यस्थ नियुक्त किया था, जिसने बीसीसीआई के फैसले को गलत, अवैध करार दिया है और कोर्ट ने इस मामले में बोर्ड को डेक्कन चार्जर्स को 4,800 करोड़ रुपये का हर्जाना चुकाने का आदेश दिया है.

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला

साल 2018 में DCHL को बतौर बोलीदाता के रूप में घोषित किया गया था और उसने 2008 में डेक्कन चार्जर्स को $107 मिलियन में हासिल किया था. इसी साल आईपीएल की शुरूआत हुई थी. बीसीसीआई ने बाद में डीसी के साथ दस साल की अवधि के लिए समझौता किया.


विवाद साल 2012 में पैदा हुआ जब बीसीसीआई ने 15 सितंबर, 2012 को आईपीएल गवर्निंग काउंसिल की एक आपातकालीन बैठक बुलाई और उसके बाद हैदराबाद स्थित फ्रेंचाइजी को बर्खास्त कर दिया. बीसीसीआई ने तर्क दिया कि DCHL ने नियमों को तोड़ा है और कई नियमों का उल्लंघन किया है इसलिए बोर्ड के पास इस फैसले के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं था.

आखिर फ्रेंचाइजी को क्यों निकाला गया

2012 में माननीय बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा आईपीएल में बने रहने के लिए अनिवार्य शर्त के रूप में घोषित की गई 100 करोड़ की बैंक गारंटी को पूरा करने में विफल होने के बाद फ्रैंचाइज़ी ने अपनी आईपीएल स्थिति खो दी. इसके बाद बीसीसीआई ने फ्रैंचाइज़ी को पैसा ना जमा करा पाने के लिए कारण बताओं नोटिस जारी किया था और 30 दिनों का समय दिया था. वित्तीय समस्याओं के कारण, DCHL भुगतान करने में असमर्थ था. इसके बाद DCHL ने फ्रैंचाइज़ी को नीलाम करने का फैसला किया. इस नीलामी में केवल PVP Ventures नामक कंपनी से दिलचस्पी दिखाई और वो भी किश्तों में भुगतान करने को तैयार थे लेकिन DCHL को पैसा तुरंत चाहिए था इसीलिए यह सौदा नहीं हुआ.

बाद में क्या हुआ?

BCCI ने बाद में दावा किया कि DCHL के पास INR 4000 करोड़ की बकाया राशि बकाया है क्योंकि उसने खिलाड़ियों के साथ-साथ कई बैंक लेनदारों को भुगतान नहीं किया था. इसलिए, बीसीसीआई ने फ्रेंचाइजी को बर्खास्त कर दिया. हालाँकि, बीसीसीआई का यह निर्णय ऐसे समय आया था जब उसके द्वारा DCHL को जारी किए गए नोटिस में एक दिन का समय बचा था. इसी आधार पर DCHL ने दावा किया कि बर्खास्तगी समय से पहले और गलत है. इसके बाद मामला कोर्ट में चला गया जहां 8ल सालों की जंग के बाद फैसला बीसीसीआई के खिलाफ गया. बताया जा रहा है कि बीसीसीआई इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकती है.

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First published: 18 July 2020, 13:33 IST
 
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