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IPL में भी पहुंचा 'Yo-Yo' टेस्ट का खौफ, कैसे पार पाएंगे खिलाड़ी

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 April 2018, 13:36 IST

स्पोर्ट्स की भागदौड़ भरी जिंदगी के लिए आपको अपनी नियमित एक्सरसाइज और दिनचर्या पर ध्यान देना होता है. इसके लिए पहले से ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड सख्त है. बोर्ड किसी भी खिलाड़ी का चयन करने से पहले उसका एक विशेष फिटनेस टेस्ट लेता है. बीसीसीआई ने इस यो यो टेस्ट का नाम दिया है, जो काफी कठिन माना जाता है. यहां तक कि इस टेस्ट को सुरेश रैना और युवराज सिंह भी एक बार पास नहीं कर पाए थे.

 

दरअसल, इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की कई टीमें भी फिटनेस को लेकर गंभीर हो चुकी हैं. क्योंकि कोई भी फ्रेंचाइजी किसी भी कीमत पर अपने खिलाड़ियों की फिटनेस से समझौता करने के मूड में नहीं दिख रही. यही कारण है कि अब आईपीएल में भी यो-यो टेस्ट का भूत आ गया है.

गौरतलब है कि पिछले साल बीसीसीआई ने खिलाड़ियों की फिटनेस परखने के लिए इस विशेष टेस्ट को अनिवार्य किया था. इसी तर्ज पर अब आईपीएल में भी ये टेस्ट लागू किया जा रहा है.

 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल की चैंपियन रही मुंबई इंडियंस ने अपनी टीम के लिए यो-यो टेस्ट लागू भी कर दिया है. इसके बाद ही खिलाड़ी को खेलने का मौका मिलेगा. बताया जा रहा है कि हाल ही में मुंबई के बाहरी इलाके में मुंबई इंडियंस ने अपने खिलाड़ियों की फिटनेस की जांच की थी.

रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि सिर्फ रोहित शर्मा की अगुवाई वाली मुंबई इंडियंस ही नहीं बल्कि विराट कोहली की कप्तानी वाली रॉयल चैलंजर्स बेंगलुरू, आर अश्विन की किंग्स इलेवन पंजाब और अजिंक्य रहाणे वाली राजस्थान रॉयल्स ने भी अपने खिलाड़ियों के लिए फिटनेस टेस्ट यो-यो को लागू कर दिया है. इस टेस्ट के गुजरने के बाद ही खिलाड़ी खेल सकते हैं.

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हालांकि केन विलियमसन वाली सनराइजर्स हैदराबाद, दिनेश कार्तिक वाली कोलकाता नाइट राइडर्स,गौतम गंभीर वाली दिल्ली डेयरडेविल्स और एमएस धोनी वाली चेन्नई सुपर किंग्स ने अपने खिलाड़ियों के लिए परंपरागत फिटनेस टेस्ट का विकल्प चुना है, जो यो-यो टेस्ट की तुलना में कम कठिन है.

 

File Photo

आखिर क्या है यो-यो टेस्ट?

'यो-यो' टेस्ट की बात करें तो इसमें तमाम मानक तय किए गए हैं, जिनसे खिलाड़ियों को गुजरना पड़ता है. भारतीय क्रिकेट टीम की बात करें तो इस टेस्ट को नेशनल क्रिकेट अकादमी में कराया जाता है. इस टेस्ट के लिए कई एंगल की मदद से 20 मीटर की दूरी पर दो पंक्तियां बनाई जाती हैं.इस टेस्ट के लिए एक खिलाड़ी रेखा के पीछे से शुरुआत करता है और निर्देश मिलते ही दो लाइनों के बीच दौड़ता है. इसी बीच म्यूज़िक(बीप) भी बजता रहता है. म्यूज़िक की आवाज़ पर ही खिलाड़ी को मुड़ना होता है.

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हर मिनट के बाद खिलाड़ी को गति और बढ़ानी होती है और अगर खिलाड़ी वक्त पर लाइन तक नहीं पहुंच पाता तो उसे दो बीप्स के भीतर लाइन तक पहुंचना होता है. अगर वह ऐसा करने में नाकाम रहा तो उसे फेल माना जाता है. यह पूरी प्रक्रिया सॉफ्टवेयर पर आधारित होती है, जिसमें नतीजे रिकॉर्ड किए जाते हैं. इन नतीजों से ही पता चलता है कि खिला़ड़ी टेस्ट को पास कर पाया अथवा नहीं.

First published: 2 April 2018, 13:33 IST
 
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