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पीडीपी से गठबंधन तोड़ने की वजह बताते हुए अमित शाह ने कांग्रेस से पूछा- लश्कर-ए-तैयबा से क्या है रिश्ता?

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 June 2018, 9:10 IST

गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बाद भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जम्मू-कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर हैं. रविवार को अमित शाह का दूसरा दिन है. इससे पहले शनिवार 23 जून को अमित शाह ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक और भारतीय जनता पार्टी के प्रेरणास्रोत श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित बलिदान दिवस के कार्यक्रम में भाजपा और पीडीपी के अलग होने की वजह की जिक्र किया.

इस मौके पर अमित शाह ने कहा कि जिन शर्तों पर भाजपा ने पीडीपी के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाई थी, उन बातों पर पीडीपी ने अमल नहीं किया.अमित शाह ने पीडीपी पर जम्मू और लद्दाख के साथ भेदभाव करने और शांति बाहाली में योगदान न देने के आरोप लगाए. बीजेपी अध्यक्ष ने ईद के पाक मौके पर भारतीय सेना के जवान औरंगजेब की हत्या और पिछले दिनों राइजिंग कश्मीर के एडिटर शुजात बुखारी की हत्या का भी जिक्र करते हुए मेहबूबा मुफ्ती पर निशाना साधा.

महबूबा मुफ्ती से समर्थन वापस लेने की वजह बताते हुए अमित शाह ने कहा, "जब सरकार बनाई तब.. जो कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बना था, मसौदा तय हुआ था मुफ्ती साहब से उसमें तीन बातें प्रमुख थीं, एक- जम्मू-कश्मीर के अंदर अब संतुलित विकास होगा, जितना विकास घाटी का होगा, इतना ही जम्मू का और लद्दाख का विकास होगा यह प्रमुख बात थी."

"दूसरी बात, यहां पर से शांति बनाए रखने में सरकार हरदम प्रयास करेगी. यहां पर अलगाववादियों का जो आंदोलन है, उसको समाप्त करने में.. यहां से टेरेरिज्म को समाप्त करने में ये सरकार हरदम प्रयास करेगी. और वहीं तीसरा- जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा होगा."

अमित शाह ने बताया, "इन्हीं तीन शर्तों के साथ भाजपा ने पीडीपी को समर्थन दिया था. चार साल तक राह देखी, ढेर सारे पैसे नरेंद्र मोदी सरकार ने भेजे, कश्मीर घाटी के लिए भेजे, लद्दाख के लिए भेजे, जम्मू के लिए विशेष भेजे, अस्सी हजार करोड़ का पैकेज दिया, मोदी जी एक दर्जन से ज्यादा बार यहां आए, सत्ता बैठे हुए हमारे साथियों ने. हमारे कार्यकर्ताओं ने संतुलित विकास और शांति के लिए बार-बार दबाव बनाया, मगर वो सपना सिद्ध नहीं हुआ, शांति बहाल नहीं हो पाई."

अमित शाह ने आगे कहा, "ऐसा समय आ गया कि सेना के जवान औरंगजेब को घर से अगवा करकर ईद के दिन इसकी हत्या कर दी गई, एक पत्रकार को उठाकर उसकी हत्या कर दी गई. भारत में लोकतंत्र है, किसी भी अखबार के एडिटर को सबकुछ लिखने की स्वतंत्रता प्राप्त है, और उनको उठाकर हत्या कर दी जाए. बच्चों के हाथ में पत्थर आ गए, सेना के जवान और सुरक्षाकर्मियों पर आए दिन हमले बढ़ने लगे, दबाव समूह खड़े हो गए, दबाव समूह ने सरकार को काम नहीं करने दिया."

श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर अमित शाह ने कहा, "आज जम्मू और कश्मीर पूरे भारत के साथ जुड़ा है तो वह डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के बलिदान के कारण जुड़ा है. डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी द्वारा किए गए आन्दोलनों और उनके बलिदान का ही परिणाम है जिसने जम्मू और कश्मीर से परमिट व्यवस्था को समाप्त किया. देश में अगर किसी राजनीतिक पार्टी की सरकार गिरती है तो वह अफसोस जताते हैं, लेकिन सिर्फ भारतीय जनता पार्टी एकमात्र ऐसी ऐसे पार्टी है जो सरकार गिरती है तो भारत माता की जय के नारे लगाकर उसका स्वागत करती है. भारतीय जनता पार्टी के लिए सरकार नहीं बल्कि जम्मू और कश्मीर का विकास और उसकी सुरक्षा एक मात्र उद्देश्य है."

अमित शाह ने इस मौके पर कांग्रेस को भी लताड़ लगाई और कांग्रेस से ये भी पूछा कि आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से उसका रिश्ता क्या है. शाह ने कहा, "कांग्रेस के नेता कश्मीर के सम्बन्ध में बयान करते हैं और उनके बोलते ही लश्कर-ए-तैयबा उसका समर्थन कर देता है. राहुल गांधी जी जवाब दें कि आपके नेता के बयान को लश्कर-ए-तैयबा समर्थन कर रहा है, यह कांग्रेस और लश्कर-ए-तैयबा के बीच में किस प्रकार का रिश्ता है? आज पूरा देश राहुल गांधी जी से जानना चाहता है कि ये कौन सा रिश्ता है जो लश्कर-ए-तैयबा और गुलाम नबी आजाद के विचार एक समान हो जाते हैं."

First published: 24 June 2018, 9:01 IST
 
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