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कश्मीरी पंडितों के दर्द पर अनुपम खेर की कविता- 'फैलेगा हमारा मौन समुद्र में नमक की तरह'

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 February 2017, 11:01 IST
(वीडियो ग्रैब)

कश्मीरी पंडितों के दर्द पर मशहूर अभिनेता अनुपम खेर ने सोशल मीडिया पर एक कविता पोस्ट की है. कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के 27 साल पूरे होने पर अनुपम खेर ने इस कविता के जरिए दर्द बयां किया है. 

अनुपम खेर ने अपने ट्विटर अकाउंट से इस कविता को शेयर किया है. अनुपम ने ट्वीट किया, "27 साल बीत गए और हम कश्मीरी पंडित अपने ही देश में अब भी शरणार्थी हैं. उनकी ख़ामोश चीख को इज़हार करती एक कविता. इसे शेयर करें."

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कश्मीरी कवि की रचना

इस कविता को कश्मीरी कवि डॉ. शशि शेखर तोशखानी ने लिखा है. जिसको फिल्मकार अशोक पंडित ने निर्देशित किया है. कविता की शुरुआत में अनुपम खेर कहते हैं, "फैलेगा-फैलेगा हमारा मौन समुद्र के पानी में नमक की तरह. नसों के दौड़ते रक्त में घुलता हुआ पहुंचेगा दिलों की धड़कनों के बहुत समीप और बोरी से रिसते आटे सा देगा हमारा पता."    

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अनुपम खेर खुद एक कश्मीरी ब्राह्मण हैं. जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडित अल्पसंख्यक हैं. लंबे अरसे से कश्मीर घाटी से हजारों कश्मीरी पंडित विस्थापन का दर्द झेल रहे हैं. 

19 जनवरी को कश्मीरी पंडितों के विस्थापन की बरसी पर अनुपम खेर ने विरोध स्वरूप यह कविता शेयर की है. इससे पहले अनुपम खेर ने रोल मॉडल विवाद में दंगल गर्ल जायरा शेख का समर्थन करते हुए उसके माफी मांगने पर कट्टरपंथी ताकतों को लताड़ लगाई थी. 

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First published: 6 February 2017, 11:01 IST
 
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