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कश्मीर में 'महिला ढाल' से मोर्चा लेंगी महिला Soldier

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 June 2017, 12:10 IST
प्रतीकात्मक तस्वीर

सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा है कि अब सेना में महिलाओं की भर्ती की जाएगी. उन्होंने कहा कि सबसे पहले हम महिलाओं को सेना में पुलिस जवान बनाएंगे, इसके बाद आगे बढ़ेंगे. वजह यह है कि कई बार ऑपरेशन के दौरान हमारे सामने महिलाएं आ खड़ी होती हैं. लिहाज़ा, उनसे निपटने के लिए महिला पुलिस जवानों की ज़रूरत महसूस होती है. जनरल रावत ने यह बयान देहरादून में एक समारोह के दौरान दिया.

फिलहाल महिलाएं भारतीय सेना के कुछ विभागों में नियुक्त की जाती हैं. इनमें मेडिकल, लीगल, एजुकेशनल जैसे क्षेत्र शामिल हैं. सेना में भर्ती शुरू होने के बाद भारत उन देशों में शुमार हो जाएगा, जहां लड़ने के लिए महिलाओं की भर्ती सेना में की जाती है. इन देशों में जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड स्टेट्स, ब्रिटेन, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, नॉर्वे, स्वीडन और इज़राइल जैसे नाम शामिल हैं. 

तीन बेटियों ने पिछले साल रचा था इतिहास

पिछले साल भारतीय वायु सेना के लड़ाकू पायलटों के दल में पहली बार तीन लड़ाकू महिला पायलट भी शामिल की गई थीं. इनमें अवनी चतुर्वेदी, भावना कंठ और मोहना सिंह शामिल थीं. तीनों भारतीय वायु सेना के इतिहास में फाइटर पायलट की ट्रेनिंग लेने वाली पहली महिला हैं. 

तीनों ने पिछले साल जून में हैदराबाद की भारतीय वायु सेना अकादमी (हकीमपेट) में हुई पासिंग आउट परेड पास करके इतिहास बनाया. तीनों ने वायुसेना में प्रेसिडेंट कमीशन पाया है और फ्लैग ऑफिसर के पद पर नियुक्त हुई हैं.

अवनी चतुर्वेदी, भावना कंठ और मोहना सिंह भारतीय वायु सेना के इतिहास में फाइटर पायलट की ट्रेनिंग लेने वाली पहली महिला हैं.

झुंझुनूं की मोहना सिंह

राजस्थान के झुंझुनूं जिले की मोहना सिंह ने दिल्ली के एयरफोर्स स्कूल से पढ़ाई की है. उनके पिता भी एयरफोर्स में सर्विस करते हैं. इसके अलावा मोहना के दादा भी एविएशन रिसर्च सेंटर में फ्लाइट गनर थे. उन्होंने कई एयरफोर्स के मिशन में हिस्सा लिया था.

दरभंगा की भावना कंठ

बिहार के दरभंगा की रहने वाली भावना कंठ का बचपन से सपना था कि वे आसमान में उड़ती रहें. इसीलिए उन्होंने एयरफोर्स ज्वाइन किया. भावना का लक्ष्य एक अच्छा फाइटर पायलट बनकर देश के लिए लड़ना है.

भावना कंठ कहती हैं, "एयरफोर्स में ट्रेनिंग की स्टेज-1 पार करने के बाद जब उन्हें फाइटर स्ट्रीम के चुना गया, वह दिन उनके जीवन में सबसे महत्वपूर्ण दिन था."

सतना की अवनी चतुर्वेदी

मध्य प्रदेश के सतना की रहने वाली अवनी चतुर्वेदी के पिता राज्य सरकार में इंजीनियर हैं. कॉलेज में फ्लाइंग क्लब के कुछ घंटों के अनुभव के बाद उन्होंने फैसला किया कि वह एयरफोर्स ज्वाइन करेंगी. इसके बाद अवनी एयरफोर्स की फ्लाइंग स्ट्रीम के लिए चुनी गईं, फिर फाइटर फ्लाइंग के लिए क्वॉलिफाई किया.

मार्च 2016 में हासिल की थी योग्यता

अवनी चतुर्वेदी, भावना और मोहना सिंह ने मार्च 2016 में ही लड़ाकू विमान उड़ाने की योग्यता हासिल कर ली थी. इसके बाद उन्हें युद्धक विमान उड़ाने का गहन प्रशिक्षण दिया गया.

भारतीय वायुसेना में करीब 1500 महिलाएं हैं, जो अलग-अलग विभागों में काम कर रही हैं. 1991 से ही महिलाएं हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उड़ा रही हैं, लेकिन फाइटर प्लेन से उन्हें दूर रखा जाता था. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर तीनों को फाइटर पायलट की ट्रेनिंग का एलान किया गया था. 

First published: 10 June 2017, 12:10 IST
 
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