Home » जम्मू-कश्मीर » burning school: Kashmir facing new challenges
 

जलते स्कूल: कश्मीर की नई मुसीबत

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:45 IST
QUICK PILL
  • जम्मू-कश्मीर में तमाम चुनौतियों के बीच स्कूलों में आग लगाए जाने की घटनाएं थम नहीं रही हैं. जेकेएलएफ़ प्रमुख यासीन मलिक जहां इसे सीएम महबूबा की साज़िश बता रहे हैं, वहीं सरकार के शिक्षा मंत्री ने उनपर पलटवार किया है. 
  • वहीं स्कूल जलाने के आरोप में सरकार अभी तक 21 गिरफ़्तारियां कर चुकी हैं लेकिन इसके पीछे के मास्टरमाइंड संगठन का अभी तक पता नहीं चल पाया है. 

कश्मीर में पिछले छह हफ्तों के दौरान 25 स्कूल आग के हवाले कर दिए गए. सोमवार को भी अनंतनाग जिले के दयालगाम में भी एक हायर सेकेण्डरी स्कूल की दो मंजिला इमारत को राख कर दिया गया. दूसरी मंजिल के एक कमरे से भड़की आग जल्दी ही पूरी इमारत में फैल गई. लपटों को देख मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और दमकल दस्ते भी पहुंच गए. दयालगाम के स्कूल का अग्निकांड ऐसे समय हुआ है जब एक दिन पहले ही जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को शिक्षण संस्थानों के दुश्मनों को बेनकाब कर उनसे सख्ती से निपटने के निर्देश दिए थे.

अदालत ने लिया संज्ञान

न्याधीश मोहम्मद याकूब मीर और अली मोहम्मद मैग्रे की खंड पीठ ने कहा कि स्कूल भवनों को बचाना हम सब की सामूहिक ज़िम्मेदारी है. अज्ञात लोग शिक्षा के माहौल को बिगाडना चाहते हैं. अब स्कूल भवनों की सुरक्षा के लिए सरकार के संबंधित अधिकारियों को तुरंत आवश्यक कदम उठाने चाहिए. इसके साथ ही कोर्ट ने कश्मीर के पुलिस महानिदेशक और स्कूल शिक्षा निदेशक को आदेश दिया है कि वे पुलिस उपायुक्त, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और मुख्य शिक्षा अधिकारियों को स्कूल भवनों की हिफाज़त के लिए हरसंभव कदम उठाने के निर्देश दें. कोर्ट ने सरकार से 7 नवंबर तक पूरी रिपोर्ट देने के भी निर्देश दिए हैं.

दोषारोपण

स्कूलों को जलाने की वारदातों के लिए सरकार और अलगाववादी गुट एक दूसरे पर इल्ज़ाम मढ़ रहे हैं. जेकेएलएफ के मुखिया यासीन मलिक ने इस मामले को उन्हें बदनाम करने की सरकार की नापाक कोशिश करार दिया है.

मलिक ने कहा कि दिवंगत मुफ्ती मोहम्द सईद ने तत्कालीन मुख्यमंत्री गुलाम मोहम्मद शाह के खिलाफ 1986 में दक्षिण कश्मीर के बिजबेहरा और अन्य इलाकों में मंदिरों को जलाने की साजिश रची ताकि उनकी सरकार से समर्थन वापसी के लिए माहौल बनाया जा सके. 

अगर वे तब सरकार से समर्थन वापसी के लिए मंदिरों को जला सकते हैं तो उनकी बेटी और आज की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उनके शिक्षा मंत्री स्कूली इमारतों को जलाने की साजिश क्यों नहीं कर सकते?

इसके जवाब में शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने आरोप लगाया कि मलिक और उनके समर्थक टकराव बढ़ाने के लिए आगजनी करा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम शिक्षा के मामले में कोई नई चीज नहीं थोप रहे बल्कि लाखों छात्रों का भविष्य बचाने की कोशिश कर रहे हैं. नईम ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया कि स्कूलों को जलाने में छात्रों का हाथ है जबकि कई जगहों पर तो स्कूलों को आग से बचाने में छात्र ही आगे आए हैं.

आरोपों का खेल जनता को मूर्ख बनाने की कुटिल चाल है. ऐसे हादसे घाटी के सभी जिलों में हो रहे हैं. दक्षिणी कश्मीर के चार जिलों के 14 स्कूलों के अलावा बदगाम में 4, बारामूला में 3, बांदीपोरा, शोपियां, व गांदरबल में दो-दो और पुलवामा, कुपवाड़ा व श्रीनगर जिलों में 1-1 स्कूल भवन जलाए गए हैं. ऐसे हमले बेहतर तालमेल वाले संगठन की करतूत हैं. इसके पीछे उनकी यह मंशा भी है कि छात्र सालाना परीक्षाएं कराने के सरकार के फैसले का विरोध करें. लगातार हड़तालों से शैक्षणिक सत्र को हुए नुकसान के चलते छात्र मार्च में होने वाली परीक्षाएं टालने की मांग कर रहे हैं. अलगाववादी उनका पुरज़ोर समर्थन कर रहे हैं लेकिन सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार से साफ इन्कार कर रही है.

तालीम की बर्बादी

क्या यह दुर्भाग्यपूर्ण गतिरोध न चाहते हुए भी स्कूलों को बर्बादी की ओर तो नहीं ले जा रहा है! सरकार पर परीक्षाएं टालने के लिए भारी दबाव पड रहा है. लेकिन नईम अख्तर इस संभावना से इत्तेफाक नहीं रखते. उन्होंने कैच को बताया कि हम बच्चों का भविष्य बचाने के लिए परीक्षाएं करा रहे हैं. हम नहीं चाहते कि उनका साल बर्बाद हो.

दूसरी ओर हुर्रियत के अध्यक्ष सैयद अली गिलानी ने स्कूलों को जलाने की घटनाओं से अपने को अलग कर लिया है. उन्होंने कहा कि स्कूल जलाने वाले हमारे शुभचिंतक नहीं हैं. इसी तरह सुरक्षा बलों से मुठभेड में मारे गए हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के पिता मुजप्फर वानी ने अपनी ओर से स्कूलों को जलाने के पीछे शामिल लोगों से दूर रहने की अपील की है. उन्होंने कहा कि जब भी कोई स्कूल जलता है, मेरे सीने में आग लगती है.

अब तक 21 गिरफ़्तार

इस बीच पुलिस ने बडी कार्रवाई में स्कूल जलाने के आरोप में 21 लोगों को गिरफतार किया है और 14 अन्य की शिनाख्त की है. दक्षिण कश्मीर रेंज के डीआईजी नीतेश कुमार ने मीडिया को बताया कि आगजनी में शामिल कुछ लोग जम्मू और चंडीगढ भाग गए हैं, पुलिस ने उनकी गिरपफतारी के लिए विशेष टीम गठित की है.

आम तौर पर घाटी के लोग इस तरह की गिरफतारी का स्वागत करते हैं लेकिन इनमें से कितनों के निहित स्वार्थ की पहचान हो पाएगी और आग लगाने के लिए भडकाने वालों का पता चल पाएगा! कश्मीर यूनिवर्सिटी के छात्र वसीम अहमद ने कहा कि पुलिस ने आगजनी के करीब छह सप्ताह बाद काफी देर से धरपकड़ की कार्रवाई की है. लेकिन क्या हम सभी ये जानना चाहते हैं कि है ये लोग कौन हैं और किसके इशारों पर वे ऐसा कर रहे हैं.                

First published: 3 November 2016, 7:51 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी