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मौत को मात: आतंकियों की 9 गोलियां झेलकर भी 50 दिन बाद जीता 'चीता'

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 April 2017, 15:19 IST
(एएनआई)

जिस चेतन चीता पर पूरे देश की निगाहें टिकी थीं, वो चीता आखिरकार मौत को मात देते हुए जीत गया है. जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा में एनकाउंटर के दौरान आतंकियों की नौ गोलियां लगने के बावजूद सीआरपीएफ अफसर चेतन चीता ज़िंदा हैं.  

चीता की इस जिजीविषा से देश के सबसे बड़े अस्पताल एम्स के डॉक्टर भी हैरान हैं. डेढ़ महीने से ज्यादा वक्त तक कोमा में रहने के बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के कमांडेंट चेतन कुमार चीता को होश आ गया है. बुधवार को एम्स से उन्हें लंबे इलाज के बाद छुट्टी मिल गई. एनकाउंटर में गोली लगने के बाद उन्हें इलाज के लिए एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था.

एम्स के डॉक्टरों के मुताबिक, चेतन चीता की हालत काफी बेहतर है. अस्पताल लाते वक्त उनके सिर में गंभीर चोट थी. इसके अलावा शरीर के ऊपरी हिस्से में बड़ा फ्रैक्चर था. उनकी दाईं आंख तो पूरी तरह बेकार हो गई थी. उनका जीसीएस (सिर की चोट की गंभीरता तय करने का टेस्ट) का स्कोर एम-3 था, जो अब एम-6 है.

एएनआई

चेतन चीता का बचना चमत्कार

चेतन का बचना चमत्कार से कम नहीं है. चेतन चीता अब होश में आने के बाद प्रतिक्रिया दे रहे हैं. एम्स के डॉक्टर अमित गुप्ता के मुतबिक चेतन चीता को भर्ती करने के 24 घंटे के अंदर सर्जरी करने के साथ ही संक्रमण से बचाने के लिए हैवी एंटीबायोटिक्स दिए गए थे.

उनके ट्रीटमेंट के लिए एम्स के डॉक्टरों की टीम ने दिन-रात एक कर दिया. नेत्र रोग विशेषज्ञों की टीम ने उनकी आंख का इलाज किया. अभी दाईं आंख ज्यादा जख्मी होने की वजह से पूरी तरह ठीक नहीं हो पाई है.

बांदीपोरा एनकाउंटर में लगी थी 9 गोली

14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के बांदीपुरा में आतंकियों के साथ मुठभेड़ के दौरान आतंकियों ने चीता पर 30 गोलियां दागी थीं. इनमें से उन्हें 9 गोलियां लगी थीं. एनकाउंटर में उनके तीन साथी शहीद हो गए थे. खुफिया इनपुट के बाद आतंकियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा था, जिसका नेतृत्व चेतन चीता कर रहे थे.

गोली लगने के बाद चीता को पहले श्रीनगर के आर्मी अस्पताल में लाया गया, जहां ब्लीडिंग रोकने के लिए उन्हें दवाइयां दी गईं. हालत नाजुक होने पर उन्हें एयर एंबुलेंस के जरिए दिल्ली के एम्स लाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने सीआरपीएफ कमांडेंट चेतन चीता का इलाज किया. चीता का जिंदा बचना हैरतअंगेज है और यह दिखाता है कि बुलंद हौसले और जज्बे वाला जवान नामुमकिन को भी मुमकिन कर सकता है.

एएनआई
First published: 5 April 2017, 15:19 IST
 
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