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स्कूलों में आगजनी: कश्मीर में तालीम नहीं भविष्य को आग लगाई जा रही है

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:45 IST
QUICK PILL
  • जम्मू कश्मीर में आतंकी हमलों और सीमापार से फायरिंग के बीच घाटी में एक खतरनाक स्थिति बन गई है. आतंकियों ने घाटी को शिक्षा से महरूम करने का एक अभियान चला रखा है. 
  • उनके निशाने पर सूबे के सरकारी शिक्षण संस्थान हैं. बीते दो महीनों के दौरान आतंकियों ने लगभग 27 स्कूलों को आग के हवाले कर दिया है.

रविवार को दीवाली के दिन और उसके अगले दिन यानी सोमवार को भी एक एक स्कूल को आतंकियों ने फूंक डाला. रविवार को अनंतनाग जिले के ऐश मुकाम के जवाहर नवोदय विद्यालय को आतंकियों ने निशाना बनाया. बीते दो दिनों के दौरान तीन स्कूलों को आग के हवाले किया जा चुका है. इस घटना को गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार ने भी जम्मू कश्मीर सरकार से रिपोर्ट मांगी है. वहीं जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट ने भी इस मामले में संज्ञान लिया है.

स्कूलों को आग के हवाले करने की घटना पर जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि स्कूलों में आग की घटनाएं झकझोरने वाली हैं और इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है. स्कूलों की इमारत जलाने वाले शिक्षा के दुश्मन हैं. वहीं मुख्य सचिव, डीजीपी, शिक्षा विभाग के डायरेक्टर को आदेश दिया है कि स्कूलों को जलने से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाएं जाएं. सात नवंबर को इस मामले में अगली सुनवाई होगी.

एक तरफ आतंकी स्कूलों को जला रहे हैं तो दूसरी तरफ निजी स्कूलों की स्थिति भी डावांडोल है. हुर्रियत द्वारा स्कूलों को बंद रखने के आह्वान के कारण ज्यादातर स्कूल बीते गभग चार महीनों से बंद चल रहे हैं. इस माहौल में श्रीनगर स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल ने 9वीं और 10वीं क्लास के लिए इंडोर स्पोर्ट्स स्टेडियम में टर्म टैस्ट आयोजित किया था. इसमें 580 में से 573 छात्र शामिल हुए. इसी के साथ स्कूल ने कश्मीर मे 112 दिन से जारी बंद के चलते हुर्रियत के स्कूल न खोलने के फरमान को झुठलाने का एक नया तरीका भी खोज निकाला है.

अभिभावकों की निगरानी में बच्चे घर पर ही परीक्षा दे सकें, इसके लिए ऑनलाइन प्रश्न पत्र अपलोड किए गए

डीपीएस बडगाम, प्रेजेंटेशन कॉन्वेंट और श्रीनगर के कुछ और स्कूलों ने भी यही किया. पहले, इन स्कूलों ने पाठ्यक्रम के अध्याय ऑनलाइन अपलोड किए थे और जो लोग मोबाइल-इंटरनेट का इस्तेमाल आसानी से नहीं कर सकते,उनके लिए अभिभावकों से स्कूल से कॉपियां लेने का आग्रह किया गया है.

डीपीएस श्रीनगर के मालिक विजय धर ने बताया हमने कर्फ्यू या बंद का उल्लंघन किए बगैर शैक्षणिक गतिविधि करवाई यह कोई खास उपलब्धि हो, ऐसा नहीं है, लेकिन हमें खुशी इस बात की है कि हमने बच्चों के साथ ईमानदारी बरती और यह सुनिश्चित किया कि उनका समय खराब न हो.

पिछले कुछ समय से घाटी में शिक्षा का मुद्दा बहस का विषय बना हुआ है. हिंसा और उप्रद्रव के दिनों में स्कूल बंद रहे. अब तक कम से कम 21 स्कूलों को बर्बाद कर दिया गया. इनमें 8 प्राथमिक स्कूल, 7 माध्यमिक और प्राथमिक स्कूल और एक जवाहर नवोदय विद्यालय शामिल हैं. शिक्षा अधिकारियों के अनुसार, इन स्कूलों में करीब 6,000 विद्यार्थी पढ़ते हैं.

हालांकि हर बार पुलिस में मामला दर्ज हुआ है लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. इसलिए क्योंकि कोई साजिश कर्ताओं को पहचानता ही नहीं है.

चूंकि इस मामले में कुछ भी स्पष्ट नहीं है, इसलिए साजिश के तरीकों पर बस कयास ही लगाए जा रहे हैं. इस मुद्दे पर बहस के दौरान कई लोग यह आरोप लगाते हैं कि ‘इसके लिए वे एजेंसियां जिम्मेदार हैं, मौजूदा हिंसा के चलते राज्य की छवि खराब करने पर तुली हैं.’

कुछ अन्य लोग इसे घाटी में चल रही गड़बड़ियों का नतीजा मानते हैं. उनका मानना है कि अलगाववादियों की वजह से स्कूलों में चल रही लगातार बंदी का प्रतिकूल असर स्कूलों पर पड़ा है जिसकी वजह से हालात बिगड़े हैं. इस बहस की शुरुआत कथित तौर पर हुर्रियत के बंद का उल्लंघन कर रहे यात्री और निजी वाहनों को जलाने से हुई लेकिन बमुश्किल ही कोई स्कूल खुला था. इसलिए उन्हें जलाना नागवार सा लगता है.

हुर्रियत की चुप्पी

हुर्रियत ने भी इन हमलों की कोई खास निंदा नहीं की. इस चुप्पी की काफी आलोचना भी हुई. इससे न केवल यह जाहिर होता है कि स्कूलों को जलाने में उसका हाथ है बल्कि लगता है जैसे उसने इसकी मौन स्वीकृति दे रखी हो और इसे बढ़ावा दे रही हो. 

कश्मीर ऑब्जर्वर के एक सम्पादकीय में कहा गया है कि हम दुनिया को क्या संदेश देना चाहते हैं? कि हम स्कूल को इस बात की सजा दे रहे हैं कि वह शिक्षा देने की हिमाकत कैसे कर रहा है? इससे दुनिया को क्या लगेगा कि हम कैसे लोग हैं?

हालांकि हुर्रियत ने 8 अक्टूबर को एक वक्तव्य जारी कर कहा कि इन हमलों के लिए जिम्मेदार लोग ‘असामाजिक तत्व हैं.’ लेकिन इतनी बड़ी समस्या के लिए यह बयान काफी छोटा है.

न परीक्षा न आजादी

हाल ही छात्रों ने वार्षिक परीक्षा आयोजन के सरकार के आदेश का विरोध किया. छात्र हाथों में बैनर लिए हुए थे- ‘आजादी तक कोई परीक्षा नहीं.’

अलगाववादी फिलहाल बंद में राहत देने या स्कूलों को फिर से खोलने देने के मूड में दिखाई नहीं देते और सरकार सुरक्षा चिंताओं के कारण प्रतिबंध लगाए हुए है, इसलिए यह गतिरोध टूटता नजर नहीं आता. छात्र बेवजह ही इस लड़ाई में घसीटे जा रहे हैं और दोनों ही पक्ष इनका इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में कर रहे हैं.

दक्षिण कश्मीर में एक निजी स्कूल चलाने वाले शौकत अली ने कहा, 'धर के स्कूल और कुछ अन्य स्कूलों के अलावा कोई स्कूल छात्रों से जुड़े रहने की स्थिति में नहीं है. इसका कारण है बाकी स्कूलों के पास डीपीएस जैसा आधारभूत ढांचा नहीं है और न ही इसकी तरह शाखाएं हैं. श्रीनगर में मिशनरी स्कूलों की कमी है. इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में जारी गड़बड़ियों के इस दौर में हमारे लिए मुश्किलें और बढ़ गई हैं.

कार्रवाई में हीलाहवाली

राज्य सरकार के सारे संसाधन इस समस्या से निपटने में नाकाम सिद्ध हुए हैं. उसने समस्या के समाधान के लिए कुछ खास किया भी नहीं है. एक स्थनीय दैनिक में छपे लेख के अनुसार, 'शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने हुर्रियत (जी) के अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी से अपील की है कि स्कूलों को चलने दें.'

अख्तर ने गिलानी के नाम लिखे खुले पत्र में कहा, ‘मुझे लगता है कि हम ऐसी मुश्किल में फंसे हुए हैं, जिसका समाधान नजर नहीं आता. शिक्षा ही ऐसा माध्यम है, जो हमें मुश्किलों का सामना करने लायक बनाता है और कुछ नहीं.’ सर मैं आपसे तालीम की गुहार लगा रहा हूं क्योंकि हमारे पास यही नहीं है जबकि बाकी क्षेत्रों में हम अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. 

देश के 34 राज्यों में हमारा स्थान 33वां है. क्या हम मुस्लिम बहुल राज्य होने के नाते अव्वल नंबर पर आने की अपने पैगम्बर की इच्छा पूर नहीं कर सकते. अनिश्चित काल तक स्कूल बंद रहने के कारण ज्यादातर अमीर अभिभावक अपने बच्चों को ट्यूशन पर भेजने पर मजबूर हैं लेकिन ज्यादातर लोग इतना खर्च नहीं कर सकते. बड़ी संख्या में बच्चे घरों में सिमट कर रह गए हैं.

तनाव के हालात

हुर्रियत के अनुसार, इस समस्या का समाधान ‘सामुदायिक स्कूलों’ की स्थापना करना है. लेकिन स्कूलों को फिर से खोलने के खिलाफ अलगाववादियों के रुख को समर्थन के अलावा जो मौजूदा सामुदायिक स्कूल हैं, वे भी दबाव और अवसाद को कम करने में सहायक सिद्ध नहीं हो रहे.

धर इसके खिलाफ आक्रोशित हो कर कहते हैं, ‘करीब 70-80 हजार युवा कश्मीर के बाहर के कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं. हमारे पास उन्हें वापस लाने के लिए शिक्षा का कोई पर्याप्त आधारभूत ढांचा नहीं है. हमारी शिक्षा व्यवस्था की हालत बुरी है.

हमारी शिक्षा का स्तर देश में सबसे निचले पायदान पर आता है. हमारे राज्य में सात यूनिवर्सिटी हैं, जिनमें हम केवल 7,000 छात्रों को पढ़ाते हैं. पंजाब में केवल एक यूनिवर्सिटी है और वहां 80,000 छात्रों को पढ़ाया जाता है. रिपोर्टों के अनुसार, स्कूल बंद होने से चिंतित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गृह मंत्रालय से पूछा है कि कश्मीर में जल्द से जल्द स्कूल फिर से खोलने के क्या उपाय किए गए हैं.

पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर पुलिस से कहा है कि वह स्कूलों को सुरक्षा देने की व्यवस्था करे, कम से संवेदनशील स्कूलों की. माना जा रहा है कि गृह मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर सरकार से कहा है कि वह स्टेट बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन को निर्देश दे कि 500 स्कूलों में नियमित रूप से परीक्षाएं करवाए.

First published: 1 November 2016, 8:13 IST
 
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