Home » जम्मू-कश्मीर » From Yusuf Shah to Global terrorist Syed Salahuddin know about Hizbul Mujahideen Chief's terror journey
 

कश्मीर का नेता यूसुफ़ शाह ऐसे बना आतंकी सैयद सलाउद्दीन

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 June 2017, 12:02 IST

अमेरिका ने पाकिस्तान को आंतकवाद के मसले पर तगड़ा झटका दिया है. अमेरिका ने पाक समर्थित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाउद्दीन को अंतरराष्ट्रीय आतंकी (Global Terrorist) घोषित कर दिया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बीच इसे भारत के लिहाज से बड़ी कूटनीतिक कामयाबी माना जा रहा है. अमेरिका ने इस कदम के साथ हाल ही में कश्मीर में हुए हिजबुल के आतंकी हमलों का भी जिक्र किया है.

आतंक का आका बनने से पहले सलाउद्दीन कश्मीर में रहता था. लेकिन सियासत मे मिली एक नाकामी ने उसे आतंकवाद की तरफ़ मोड़ दिया. फिलहाल सलाउद्दीन पाकिस्तान की धरती में रहकर कश्मीर में बड़ी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता है. उसके नेतृत्व में ही हिजबुल के लड़ाके कश्मीर में आतंक की फैक्ट्री चला रहे हैं.

afp

आतंकी बनने की इनसाइड स्टोरी

सैयद सलाहुद्दीन के नाम से मशहूर हिजबुल चीफ़ 1990 से पहले कश्मीर में यूसुफ शाह के नाम से जाना जाता था. डॉक्टरी की पढ़ाई के दौरान सलाउद्दीन का रुझान जमात-ए-इस्लामी संगठन की तरफ हो गया था. बाद में वो इस संगठन से जुड़ गया. सलाउद्दीन ने साल 1987 में हुए विधानसभा चुनाव से सियासत में कदम रखा. उसने इस चुनाव में श्रीनगर की अमीरकादल विधानसभा सीट से मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट के टिकट पर चुनाव लड़ने का फैसला किया.

श्रीनगर के अमीरकादल विधानसभा सीट से माना जा रहा था कि यूसुफ़ शाह यानी सलाउद्दीन चुनाव जीत रहा है, लेकिन जब नतीजे घोषित किए गए तो नेशनल कॉन्फ्रेंस के गुलाम मोहिउद्दीन शाह विजयी घोषित किए गए. कुछ लोगों ने आरोप लगाया  कि चुनाव नतीजों में जमकर धांधली की गई. बड़े पैमाने पर बूथ कब्जे की घटना हुई और पुलिस ने आम जनता की शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया.

यूसुफ शाह ने इन चुनाव नतीजों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. इसके बाद उसे तत्कालीन नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार ने जेल में डाल दिया. 1989 में रिहा होने के बाद वो हिज़बुल मुजाहिदीन में शामिल हो गया.

1990 में मुजफ्फराबाद पहुंचा सलाउद्दीन

5 नवंबर 1990 को यूसुफ शाह नाम बदलकर सैयद सलाउद्दीन बन गया और सीमा पार करके, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के मुजफ्फराबाद इलाके में पहुंच गया. 90 के दशक में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन की स्थापना मुहम्मद अहसान डार ने की थी. सलाउद्दीन भी हिजबुल से जुड़ गया और उसने जम्मू-कश्मीर में आंतकवादी गतिविधियों की शुरुआत कर दी. तभी से कश्मीर घाटी में आतंकवाद फैलाने के मकसद से हिजबुल सरगना सलाउद्दीन युवाओं को ट्रेनिंग देता है.

कश्मीर को जवानों की कब्रगाह बनाने की धमकी

सलाउद्दीन के संगठन हिजबुल ने जम्मू-कश्मीर में हुए कई आतंकी वारदातों की जिम्मेदारी ली है. 6 अप्रैल 2014 में क्श्मीर में हुए धमाके में सलाउद्दीन का हाथ था, इस धमाके में 17 लोग घायल हुए थे. सलाउद्दीन ने साल 2016 में धमकी दी थी कि वह जम्मू-कश्मीर को भारतीय सैनिकों की कब्रगाह बना देगा. 

भारतीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सलाउद्दीन को मोस्ट वॉन्टेड घोषित कर रखा है. सलाउद्दीन ने पिछले साल सेना के साथ मुठभेड़ में मारे गए हिजबुल कमांडर बुरहान वानी को शहीद करार दिया था. वानी की मौत के बाद घाटी में पिछले एक साल से सुरक्षाबलों के साथ हिंसक संघर्ष और पत्थरबाजी की घटनाएं जारी हैं. यहां तक कि सोमवार को ईद के दिन भी दक्षिण कश्मीर के कई इलाकों में सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी हुई है.

First published: 27 June 2017, 11:58 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी