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कश्मीर की आड़ में सोशल मीडिया पर पकिस्तानी सेना का प्रोपेगैंडा वीडियो

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 February 2017, 7:48 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)

3 मिनट 57 सेकेंड का एक वीडियो, जिसकी शुरूआत घाटी में गर्मियों के दिनों में कश्मीर में हुए विरोध प्रदर्शन के वक्त रिकॉर्ड किए गए एक नारे के साथ होती है, ‘राह में कितनी भी रूकावटें हों, हम आजादी लेकर रहेगे, हम भारत से आजाद हो कर ही रहेंगे.’ उसके बाद कुछ नजारे विरोध प्रदर्शन और मासूमों को अंधा करने वाले आते हैं. साथ में एक गीत चल रहा होता है- ‘आप हमें अंधा कर सकते हैं लेकिन हमारे सपने नहीं छीन सकते.'

गीत और दृश्य कुछ इस तरह चलते हैं कि स्क्रीन पर एक आकृति के साथ ही यह संदेश लिखा हुआ आता है, ‘कश्मीर स्वर्ग है और जिन्हें इस बात पर भरोसा नहीं, वे इसके हकदार नहीं हैं.’

यह पाकिस्तानी सेना के मीडिया प्रकोष्ठ आईएसपीआर का कश्मीर वीडियो है. गत वर्ष जुलाई में हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से पाक सेना का तीसरा ऐसा वीडियो है. वानी की मौत के बाद से ही कश्मीर में अशांति और हिंसा फैल गई थी. 

वीडियो से लुभाने की कोशिश

पाक सेना के मीडिया विंग ने यह वीडियो सोशल मीडिया पर कश्मीर दिवस की पूर्व संध्या पर 5 फरवरी को जारी किया है. 1990 से यह दिन हर साल मनाया जाता है. कश्मीर अखंडता दिवस के अवसर पर प्रदर्शनकारी रैलियां निकाली गईं और भाषण दिए गए. 

पाकिस्तान में इस दिवस की शुरुआत कश्मीरियों के साथ एकता दिखाने के लिए मौन रख कर की गई. फिर देश भर में यातायात को भी एक मिनट के लिए रोक दिया गया. इस ‘खास दिन’ अगर कुछ नहीं हुआ तो वह था जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद का भाषण, जो कि इन दिनों नजरबंद हैं. इस आतंकी संगठन के नए गुट तहरीक-ए-आजादी जम्मू-कश्मीर ने भी देश भर में कई रैलियां निकालीं, सम्मेलन किए और जुलूस निकाले.

इस गुट ने लाहौर के मुख्य मॉल रोड पर नासिर बाग में धरना दिया. इसका नेतृत्व जमात-उद-दावा के वरिष्ठ सदस्य और सईद के करीबी अब्दुल रहमान मक्की ने किया. मक्की वही शख्स हैं, जिन्होंने कश्मीर पर पाकिस्तान के रवैये और हाफिज सईद को नजरबंद कर रखने के बावजूद भारत के प्रति जहर उगलना जारी रखा.

पाकिस्तान सरकार ने कश्मीर अखंडता दिवस मना कर यह कोशिश की है कि पाक के आतंकी गुटों को सुर्खियों से दूर रखा जाए और सिविल सोसायटी व जनता इस बार खबरों में आए. हालांकि अखंडता दिवस तो एक सालाना कार्यक्रम है लेकिन बुरहान वानी की मौत के बाद पाक सोशल मीडिया की एकजुटता कश्मीर को लेकर बढ़ती ही दिख रही है.

नवम्बर 2016 में पाकिस्तान ने बुरहान वानी को समर्पित कश्मीर गीत जारी किया था. यह गीत लॉन्च किए जाने के अवसर पर गायक अली अजमत, उमर जसवाल और अलीसिया दियास मौजूद थे. इनके अलावा पाक अधिकृत कश्मीर के अध्यक्ष सरदार मसूद खान भी इस अवसर पर मौजूद थे. लोक, सूफी और पॉप संगीत से लबरेज यह वीडियो कश्मीर के अलगाववादी संघर्ष को महिमा मंडित करता है.

पहले भी की थी शरारत

इससे पहले कश्मीर में हिंसा और अशांति के दौर में पाकिस्तान ने फेसबुक पर कुछ भारतीय सेलिब्रिटीज के ऐसे फोटो अपलोड कर दिए जिनमें उन्हें पैलेट गन से अंधा हुआ दिखाया गया है. जिन भारतीय हस्तियों के फोटो में पैलेट गन से उनके चेहरे किृत हुए दिखाए गए हैं; उनमें कुछ जाने-माने नाम हैं, जैसे-अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, मार्क जुकरबर्ग, विराट कोहली, ऋतिक रोशन, काजोल, सैफ अली खान, आलिया भट्ट, ऐश्वर्या राय, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. कश्मीर के ज्वलंत मुद्दों पर केंद्रित ये फोटो भारत और पाकिस्तान में वायरल हो गईं.

सोशल मीडिया पर चल रहे इस सफल प्रचार के अलावा पाकिस्तानी लोग और समूह कश्मीरियों के लिए रोजाना इंटरनेट पर सैंकड़ों संदेश और वीडियो अपलोड कर रहे हैं. अब पाकिस्तान में इसी ‘‘आजादी’’ के मुद्दे पर एक फिल्म भी आ रही है. नदीम बेग, मोआम्मर राणा और सोन्या हुसैन जैसे कलाकारों से सुसज्जित यह फिल्म कश्मीर में उग्रवाद की समस्या पर आधारित है. 

फिल्म में एक ऐसे आदमी की कहानी कही गई है, ‘‘जो कश्मीर की आजादी के लिए अपनी जान तक दे देता है और उसकी शहादत के बाद युवा उसकी इच्छा पूरी करने के लिए अभियान जारी रखते हैं. इसके निर्देशक इमरान मलिक कहते हैं कि पाकिस्तान में इतने बड़े कैनवास पर इससे पहले कोई फिल्म नहीं बनी.

पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक आजादी की सिनेमैटोग्राफी ऑस्ट्रेलियाई सिनेमैटोग्राफर बैन जैस्पर कर रहे हैं. इन्होंने ही ऋतिक रोशन की बैंग-बैंग की शूटिंग की थी. फिल्म का संगीत साहिर अली बग्गा ने तैयार किया है और गीतों को आवाज दी है राहत फतेह अली खान, कुरतुलैन बलोच और शफकत अमानत अली खान ने. 

पाक की रणनीति

जो लोग कश्मीर पर नजर रखे हुए हैं, उनके अनुसार, कश्मीर पर पाकिस्तान का सोशल मीडिया पर यूं गाने, छोटे वीडियो अपलोड करने के बाद अब कश्मीर की आजादी पर एक फिल्म का आना जाहिर है कश्मीर को लेकर ‘‘पाक-नीति’’ का ही एक हिस्सा है.

नब्बे के दशक में पाकिस्तान ने कश्मीर के बाजारों को ऐसे म्युजिक कैसेटों से भर दिया था जिनमें जिहाद का गुणगान किया गया था. इनमें से कुछ गाने आज कश्मीर के उग्रवाद की आवाज बन चुके हैं. इनमें से एक है, ‘जागो, जागो सुबह हुई..’ और दूसरा है, ‘कश्मीर हमारा है.’ एक और बहुत लोकप्रिय गीत है, ‘निडर, दिलेर बच्च्यिां, श्रीनगर की बेटियां.’ 

ऐसे गीतों का असल में पारम्परिक तौर पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है. सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इन गानों के चलते ही कश्मीर के युवाओं ने बंदूकें उठाई हैं और विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए हैं.

गौरतलब है कि जिस वजह से घाटी में सिविल सोसायटी इस आंदोलन में शामिल होने के लिए राजी हुई है, वह यह है कि कश्मीर के हालात के प्रति आम हिंदुस्तानी में सहानुभूति नहीं दिखाई दे रही.

नाम न बताने की शर्त पर सिविल सोसायटी के एक सदस्य ने कहा, 'पाकिस्तानी गाने और वीडियो इसलिए वायरल हो रहे हैं क्योंकि सिविल सोसायटी और मीडिया का एक धड़ा कश्मीरियों की बदहाली पर हमदर्दी जता रहा है. ऐसे में, पाकिस्तानी गाने और वीडियो कश्मीरियों को आश्वस्त कर रहे हैं कि वे अकेले नहीं हैं.’

First published: 8 February 2017, 7:48 IST
 
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