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मानवाधिकार आयोग: सेना की जीप से बंधे अहमद डार को मिले 10 लाख मुआवज़ा

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 July 2017, 17:02 IST

जम्मू कश्मीर मानवाधिकार आयोग ने भाजपा-पीडीपी की साझा सरकार को फारूक अहमद डार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने को कहा है. फारूक अहमद डार वही शख्स हैं, जिन्हें पत्थरबाजों से निपटने के लिए सेना के मेजर ने 9 अप्रैल को जीप के बोनट से बांधकर ढाल की तरह इस्तेमाल किया था.

मेजर नितिन लितुल गोगोई के इस फैसले के बाद पूरे देश में विवाद मच गया था. सियासी पार्टियों के साथ बौद्धिक वर्ग ने भी मेजर गोगोई के फैसले पर सवाल उठाया था. हालांकि विवादों के बीच सेना प्रमुख बिपिन रावत ने मेजर गोगोई का खुलकर समर्थन किया था और कहा था कि जवानों को पत्थरबाजों के बीच मरने के लिए नहीं छोड़ सकते. मेजर और सेना प्रमुख को केंद्र सरकार और बीजेपी का भी पूरा समर्थन मिला.

इस मामले में जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की राय भाजपा से जुदा रही है. राज्य सरकार ने मामले की जांच कराने की बात कही थी. 53 राष्ट्रीय राइफल के मेजर गोगोई के खिलाफ जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी.

एफआईआर दर्ज होने के दो दिन बाद सेना ने कोर्ट ऑफ इन्क्वॉयरी बैठाई थी, लेकिन जांच में मेजर गोगोई को क्लीन चिट मिल गई थी. जांच के बाद मेजर के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई ना करने की अनुशंसा की गई. यहां तक कि वरिष्ठ अधिकारियों ने मेजर के फैसले की सराहना की थी, क्योंकि इसे पत्थरबाजी से निपटने का बेहतर तरीका माना गया.

फारूक अहमद डार को जीप के बोनट से बांधने की घटना के तकरीबन दो हफ्ते बाद सेना ने मेजर गोगोई को इस फैसले के लिए सम्मानित किया. मेजर गोगोई को उनकी विशिष्ट सेवा के लिए थलसेना अध्यक्ष की ओर से प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया. 

First published: 10 July 2017, 17:02 IST
 
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