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नोटबंदी: सर्दियों के लिए जमा रक़म वापस करने की मजबूरी

सेहर क़ाज़ी | Updated on: 14 November 2016, 3:43 IST
(एएफ़पी )
QUICK PILL
  • कश्मीर में अशांति के बीच नोटबंदी के अचानक फैसले ने पूरी कश्मीर में लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. 
  • सर्दियों में होने वाली बर्फबारी के दौरान एटीएम मशीन के बाहर लाइन लगाने से बचने के लिए घरों में कैश जमा करके रखा जाता है. 
  • मगर वही कैश अब बैंकों में लाइन लगाकर वापस किया जा रहा है मगर बदले में मिलने वाली रकम बेहद कम है. 

नोटबंदी के एलान ने पूरे देश के साथ-साथ कश्मीर को भी हिलाकर रख दिया है. आमतौर पर खाली दिखने वाले कश्मीर के बाज़ार में भी लोग 500 और 1000 रुपए के नोट लेकर पूरी तरह असमंजस में दिखाई दिए कि करें तो क्या करें. एक स्थानीय निवासी सीमा ने कहा, 'मुझे अपने भाई की शादी के लिए खरीदारी करनी थी लेकिन नकद हाथ में होने के बावजूद मुझे बाजार से खाली हाथ लौटना पड़ा.

कुछ दुकानदार तो 500 और 1000 रूपए के नोट अब भी ले रहे हैं लेकिन कुछ साफ मना कर रहे हैं'. मंगलवार को पीएम की घोषणा के बाद सिटी सेंटर लाल चैक बंद हो गया था और फुटपाथों पर बैठने वाले दुकानदार नदारद दिखे. सिर्फ पेट्रोल पम्पों और दवाई की दुकानों पर गहमागहमी दिखी.

कश्मीर के कारोबारी मुश्ताक अहमद (बदला हुआ नाम) ने कहा, 'मुझे लगता है मोदी ने सही फैसला किया है. अब हवाला में कोई पैसा नहीं रहेगा और आने वाले दिनों में यहां शांति हो सकती है.' हालांकि कश्मीर में हालात सामान्य नहीं होने के नाते इस फ़ैसले ने कश्मीरियों की मुश्किलें और बढ़ा दी है. 

घाटी में परेशानी बढ़ी

कश्मीर में बदहाली के चलते ज्यादातर लोगों ने घरों में पैसा रखा हुआ था. सर्दियां में बर्फबारी का इंतज़ाम अलग से कर रखा था लेकिन अब जनता परेशान है. राज्य के वित्त मंत्री हसीब द्राबू ने कहा, 'कश्मीर पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा, बस उन गुटों की मुश्किलें बढ़ेंगी जो आतंक को पालने के लिए पैसा लगाते हैं. इससे आगे चलकर कश्मीर के हालात सुधरेंगे'. वहीं जे एंड के बैंक ने ग्राहकों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए बैंक ने अपनी शाखाओं में काउंटर बढ़ा दिए हैं.

बैंक के एक अधिकारी ने कैच से कहा, 'फिलहाल जनता में उथल-पुथल है और हम सब ओवरटाइम कर रहे हैं. नए नोट आ चुके हैं और जल्द ही बैंकों के एटीएम में भी उपलब्ध होंगे. नकदी की कमी नहीं पड़े, इसकी निगरानी करने के लिए एक समूह भी गठित किया गया है. 

नोटों पर पाबंदी लगाए जाने का फैसला मोदी का मास्टर स्ट्रोक कहा जा रहा है लेकिन सरकार पर दबाव भी बढ़ता जा रहा है. आम लोग खाने-पीने की ज़रूरतों के सामान नहीं जुटा पा रहे हैं और पुराने नोट बदलवाने के लिए बैंकों के बाहर लंबी कतार लगी हुई है. 

माना जा रहा है कि सरकार के इस फैसले से जाली नोट के बाजार पर अंकुश लगेगा बल्कि भ्रष्टाचारियों, पैसा उधार पर चलाने वालों और राजनेताओं तक पर नकेल कसी जा सकेगी.

First published: 14 November 2016, 3:43 IST
 
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