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कश्मीर: सरकार की रणनीति और 90 फीसदी से ज़्यादा बच्चों ने दिया इम्तिहान

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 November 2016, 7:40 IST
(पीटीआई )
QUICK PILL
  • बुरहानी वानी की मौत के चार महीने बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने 10वीं और 12वीं की परीक्षा सफलतापूर्वक शुरू करवा दी है. 
  • पहले पेपर में हिस्सा लेने वाले बच्चों की संख्या तकरीबन 95 फ़ीसदी है. माना जा रहा है कि सरकार ने बच्चों को सिलैबस में 50 फ़ीसदी की छूट दे रखी थी जिसकी वजह से परीक्षा में हिस्सा लेने वालों का प्रतिशत इतना ज़्यादा है. 

श्रीनगर के रिहाइशी इलाके में एक सरकारी स्कूल के बाहर 12वीं क्लास के बच्चे अपने घरवालों के साथ खड़े हैं. उन्हें देखने से लग रहा है कि वे काफी परेशान और घबराए हुए हैं. उनके एग्ज़ाम 11 बजे से शुरू होने हैं और बच्चे उससे पहले केमिस्ट्री के सवाल-जवाब दुहराने में लगे हुए हैं. यासमीन शेख़ अपनी सहेली महक से बातें कर रही हैं. दोनों की आवाज़ में उलझन साफ सुनाई दे रही है. 

यासमीन और महक की तरह ही घाटी के सभी बच्चों ने पिछले चार महीने से अशांति को सहते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी है. ऐसे माहौल में उनके लिए अकादमिक कलैंडर का सबसे अहम मौका 'सालाना एग्ज़ाम' भारी पड़ रहा है. यासमीन ने महक से कहा, 'मुझे बेहद डर लग रहा है. कल शाम तक उम्मीद कर रही थी कि इम्तिहान टल जाएंगे.' जवाब में महक बोलीं कि उन्हें ना चाहते हुए भी इम्तिहान में हिस्सा लेना पड़ रहा है क्योंकि घरवालों का दबाव है. पिछले चार महीनों में मैंने बहुत कम पढ़ाई की है. उम्मीद करती हूं, पेपर आसान हो.'

पहला पेपर ख़त्म होने के बाद यासमीन और महक के चेहरे पर खुशी थी. दोनों का पेपर अच्छा हुआ था जिसकी वजह से उनमें अगले इम्तिहान के लिए आत्मविश्वास बढ़ा. उन्होंने कैच से कहा, 'अब जब हमने इस एग्ज़ाम में बैठने का फ़ैसला तय कर लिया है, तो हम अपनी ओर से बढ़ियां प्रदर्शन की कोशिश करेंगे' इसके बाद दोनों अपने घरवालों के साथ घर के लिए निकल गईं. 

यासमीन और महक की तरह ही उलझन और परेशानी के साथ-साथ घाटी में हर किसी ने एग्ज़ाम दिया. वजह यह थी कि राज्य सरकार और अलगाववादियों के बीच काफी तनातनी के बाद यह परीक्षा आयोजित की गई. अलगाववादी स्टूडेंट्स की मांग का साथ दे रहे थे कि पिछले कुछ महीनों में अशांति रही, इसलिए परीक्षा मार्च तक स्थगित की जाए मगर सरकार नहीं मानी.

सरकार के फ़ैसले के विरोध में कुछ पोस्टर भी सामने आए जिनपर लिखा था, 'आजादी तक कोई परीक्षा नहीं'. सरकार पर यह भी आरोप लग रहा है कि उसने बच्चों की परीक्षा पर भी राजनीति की. वह जुलाई में हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी की हत्या के बाद बढ़े विरोध को दबाने के लिए इसका इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है.

अशांति के चार महीने

बुरहान की हत्या के बाद चार महीने तक सडक़ों पर हज़ारों की संख्या में कश्मीरी युवा उतर आए थे. इनमें भी स्टूडेंट्स की संख्या अच्छी-ख़ासी रही. माना जा रहा है कि सरकार ने परीक्षा की घोषणा इसलिए की ताकि युवा मजबूरी में अपने घरों की तरफ़ लौटने को मजबूर हो जाएं. हुर्रियत ने सरकार के इस कदम का विरोध किया लेकिन फिर भी फैसला वापस नहीं लिया गया. 

सरकार ने बच्चों की सहूलियत के लिए 10वीं और 12वीं क्लास के लिए दो बार इम्तिहान का प्रस्ताव रखा था. पहला नवंबर में और दूसरा मार्च में. जो बच्चे नवंबर में इम्तिहान देने को तैयार थे, उनके लिए पाठ्यक्रम में 50 फीसदी छूट का प्रस्ताव था.  और जो मार्च में देना चाहेंगे, उनके लिए कोई छूट नहीं थी. माना जा रहा है कि नवंबर में बच्चों ने बड़ी संख्या में इम्तिहान का फ़ैसला छूट पाने के इरादे से किया है. 

सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम के बीच 12वीं क्लास के 94 फीसदी से ज्यादा स्टूडेंट्स ने एग्ज़ाम दिया. कश्मीर में पंजीकृत 12वीं के कुल 31,964 स्टूडेंट्स में से 30,213 बच्चों ने एग्ज़ाम दिया. श्रीनगर में 5861 बच्चों में से 5617 ने एग्ज़ाम दिया. सरकार ने जगह के हिसाब से 484 सेंटरों को संवेदनशील और अतिसंवेदनशील में बांट रखा था. 

साउथ कश्मीर के अनंतनाग जिले में सबसे ज्यादा 96 फीसदी बच्चों ने एग्ज़ाम दिया और इसके बाद कश्मीर के श्रीनगर जिले में भागीदारी 95 फीसदी की रही. साउथ कश्मीर घाटी के सबसे अशांत इलाक़ों में से एक है. ज़्यादातर बच्चों के साथ उनके पेरेंट्स भी आए थे. इससे अलगाववादियों के कामबंदी के आह्वान के उलट सडक़ों पर ट्रैफिक बढ़ गया. 

डॉ. शकीर वानी अपने बच्चे नदीम शकीर के साथ लाल चौक में श्रीनगर के बीचो-बीच स्थित एसपी हायर सैंकडरी वाले केंद्र आए थे. उन्होंने कहा कि उनका बच्चा इम्तिहान नहीं देना चाहता था, पर वे उसे राज़ी करने में कामयाब रहे. उन्होंने कहा, 'परीक्षा करवाकर सरकार ने अपना तनाव बच्चों पर डाल दिया है और पाठ्यक्रम में 50 फीसदी छूट देने का वादा भी प्रश्न-पत्रों में नजर नहीं आया'. 

सरकार ने मारी बाज़ी

इस दौरान छिपपुट घटनाएं भी हुईं. सेंट्रल कश्मीर के बड़गाम जिले के सोईबुग से तीन परीक्षा केंद्रों को दूसरे इलाक़ों में शिफ्ट किया गया क्योंकि कुछ लडक़ों ने उन केंद्रों पर पत्थरबाजी की, जहां बच्चे परीक्षा दे रहे थे. बडगाम के मुख्य शिक्षा अधिकारी इंद्रजीत शर्मा ने बताया, 'हमने 12वीं कक्षा के 2112 और 2113 परीक्षा केंद्रों को गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल बड़गाम और 10वीं कक्षा के परीक्षा केंद्र को डिग्री कॉलेज बडगाम में शिफ्ट कर दिया है'. कुछ युवाओं पर यह भी आरोप है कि उन्होंने हरन और सोईबुग चौक के परीक्षा केंद्रों से लौटते हुए बच्चों की पिटाई की.  

First published: 16 November 2016, 7:40 IST
 
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