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15 साल में बंदूक उठाने वाले बुरहान वानी के बारे में जानिए

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 July 2017, 11:35 IST
बुरहान वानी/ फेसबुक

बुरहान वानी की पहली बरसी पर पूरी कश्मीर घाटी में कर्फ्यू लगा हुआ है. एक साल पहले एनकाउंटर के दौरान सेना ने हिजबुल के पोस्टर ब्वॉय को मार गिराया था. उसकी मौत के बाद घाटी में हिंसक प्रदर्शन और झड़प में 94 से ज़्यादा लोगों ने जान गंवाई. यहां तक कि अमरनाथ यात्रा को भी रोकना पड़ा. एक नज़र बुरहान वानी और उसके एनकाउंटर से जुड़ी अहम बातों पर:  

  • 2010 में भाई के मारे जाने के बाद आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़ा.
  • बुरहान वानी का मानना था कि उसके भाई की भारतीय सेना ने हत्या कर दी थी.
  • 15 साल की उम्र में वो आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का सदस्य बन गया.
  • भारतीय सुरक्षाबलों से अपने भाई की मौत का बदला लेना चाहता था बुरहान वानी.
  • कश्मीर के त्राल का रहने वाला वानी एक रसूखदार परिवार से था.
  • वानी को कश्मीर के पढ़े-लिखे युवाओं को हिजबुल से जोड़ने का जिम्मा दिया गया.
  • बुरहान वानी पर 10 लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था.
  • सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें डालकर बंदूक उठाने की अपील पर चर्चित.
  • जून 2016 में अनंतनाग में तीन पुलिसकर्मियों की मौत के बाद आखिरी वीडियो आया.
  • वीडियो में बुरहान वानी ने सुरक्षा बलों पर और हमले करने की धमकी दी थी.
  • बुरहान वानी ने घाटी में कई तकनीक पसंद आतंकवादी तैयार किए.
  • सोशल मीडिया के जरिए कश्मीरी नौजवानों पर प्रभाव डालने की कोशिश.
  • बुरहान वानी ने 11 हथियारबंद युवकों के साथ सोशल मीडिया पर एक तस्वीर अपलोड की थी.
  • बुरहान वानी ने इसके जरिए सुरक्षाबलों को मुकाबले की चुनौती दी थी.
  • सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक इनमें से 9 आतंकी मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं.
इस तस्वीर में दिख रहे 11 आतंकियों में से 9 मारे जा चुके हैं, एक फरार है और एक गिरफ्तार हो चुका है.

ऐसे हुआ बुरहान का एनकाउंटर

8 जुलाई 2016 को बुरहान वानी को मुठभेड़ के दौरान उस वक्त मार गिराने में कामयाबी मिली थी, जब सुरक्षाबलों को गुप्त सूचना मिली कि दक्षिण कश्मीर के कोकरनाग के बुमडूरा गांव में तीन उच्च-प्रशिक्षित आतंकवादी मौजूद हैं. यह जानकारी मिलते ही पुलिस टीमें हरकत में आ गईं और गांव से बाहर निकलने के सभी रास्तों को सील कर दिया गया. सेना के साथ एक बाहरी घेरा बनाकर पुलिस और सुरक्षाबल गांव में दाखिल हुए.

स्थानीय लोगों के मामूली विरोध के बाद सुरक्षा बल दोपहर तीन बजे गांव में दाखिल हुए. सुरक्षा बलों को हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी सरताज की मौजूदगी के बारे में सूचना मिली थी. बुरहान वानी की मौजूदगी की पुख्ता जानकारी नहीं थी. हालांकि पहले मिली खुफिया सूचनाओं में बताया गया था कि दोनों साथ ही रहते हैं. शाम सवा छह बजे मुठभेड़ खत्म हुई और जब देखा गया कि मारे गए तीन आतंकवादियों में से एक बुरहान भी है, तो सुरक्षा बल खुशी से झूम उठे.

First published: 8 July 2017, 11:35 IST
 
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