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जानिए क्यों डेढ़ दशक से पीओके की जमीन का किराया चुका रही भारतीय सेना?

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 February 2017, 17:17 IST
(फाइल फोटो)

भारतीय सेना द्वारा कथित तौर पर 16 साल से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में मौजूद कुछ जमीनों का किराया चुकाए जाने की खबरें सामने आ रही हैं. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कागजी हेरफेर के जरिये सरकारी खजाने की रकम को चूना लगाने की इस गड़बड़ी की जांच अब सीबीआई कर रही है. 

हैरानी की बात तो यह है कि इस फर्जीवाड़े में कुछ सैन्य अधिकारी भी शामिल हैं. सीबीआई ने इसके चलते एक आपराधिक मामला भी दर्ज किया है और जमीन से जुड़े फर्जी कागजों के आधार पर रुपये लेने वाले अधिकारियों की जांच कर रही है.

रिपोर्टों के मुताबिक, सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2000 में तत्कालीन सब-डिविजनल एस्टेट ऑफिसर (जम्मू-कश्मीर के राजौरी), नौशोरा के खंभा गांव के पटवारी समेत कुछ लोगों ने मिलकर यह आपराधिक साजिश रची. इसके तहत जो जमीनें सेना के लिए किराए पर दिखाई गईं, वे असल में पीओके में आती हैं.

इस जमीन का खसरा नंबर 3000, 3035, 3041 और 3045 पीओके के मकबूजा में आता है, लेकिन रक्षा मंत्रालय की ओर से जमीन का किराया दिया जा रहा है. 122 कनाल व 18 मार्ला वाली जमीन सेना के कब्जे में दिखाई गई थी.

सीबीआई द्वारा यह जांच शुरू कर दी गई है कि असल में इस जमीन का कोई मालिक है भी या नहीं या सिर्फ यह कागज पर ही मौजूद है. वह घोटाले के लाभकर्ताओं को दबोचने की कोशिश भी कर रही है.

सीबीआई सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि वर्ष 2000 के बाद से बतौर किराया लाखों रुपये जारी किए जा चुके हैं.

गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच स्थित पीओके, मूल कश्मीर का वह हिस्सा है, जिस पर पाक ने 1947 में हमला कर कब्जा कर लिया था. इसकी सीमाएं पाकिस्तानी पंजाब एवं उत्तर पश्चिमी सीमांत प्रांत से पश्चिम में, उत्तर पश्चिम में अफगानिस्तान के वाखान गलियारे से, चीन के जान्जियांग उईघुर स्वायत्त क्षेत्र से उत्तर और भारतीय कश्मीर से पूर्व में लगती हैं.

कश्मीर राज्य के कुछ भाग, ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट पाकिस्तान की ओर से चीन को दे दिया गया था, जबकि बाकी क्षेत्र को दो हिस्सों में बांट दिया गया था.

First published: 7 February 2017, 17:17 IST
 
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