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स्कूलों को जलाने पर बोलीं महबूबा- '1 हफ्ते में कड़ी कार्रवाई, आतंकवाद का सबसे बुरा रूप'

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 November 2016, 11:16 IST
(एएनआई)

कश्मीर घाटी में स्कूलों को जलाए जाने की घटनाओं पर जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है. महबूबा ने इसकी तुलना आतंकवाद के सबसे खतरनाक रूप से करते हुए दोषियों पर सख्ती बरतने की बात कही है.

जम्मू-कश्मीर की सीएम ने कहा, "जब जम्मू-कश्मीर में सबकुछ सही तरीके से चलने लगता है, तभी कुछ उपद्रवी हमारे स्कूलों को जला देते हैं, जिससे हमारी शिक्षा व्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है."

मुफ्ती ने स्कूल जलाने की घटनाओं में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाते हुए कहा, "अगले एक हफ्ते में राज्य सरकार निश्चित तौर पर उन लोगों को सजा देने के लिए कुछ कदम उठाएगी, जिन्होंने हमारे स्कूलों को जलाया है. यह आतंकवाद का सबसे बुरा चेहरा है."

'वाजपेयी के विचार अपनाने की जरूरत'

महबूबा मुफ्ती ने इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कश्मीर नीति की तारीफ करते हुए कहा, "आप अपने दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसियों को नहीं बदल सकते. हमें पाकिस्तान से निपटने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों को अपनाने की जरूरत है."

साथ ही महबूबा ने इस दौरान कहा, "हम उन बच्चों को फिर से मुख्यधारा में लाने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्होंने हाल ही में आतंकवाद की राह पकड़ ली. हम उन्हें उनके घर में वापस लाएंगे."

हाल ही में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के गृहक्षेत्र अनंतनाग में भी एक स्कूल को उपद्रवियों ने निशाना बनाया था. इसके अलावा शनिवार को बांदीपोरा में भी एक स्कूल को आग के हवाले कर दिया गया.

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने अलगाववादियों पर निशाना साधा है. जितेंद्र सिंह ने कहा, "जो लोग जम्मू-कश्मीर में स्कूल जला रहे हैं, उनके बारे में सबको पता है. वे (अलगाववादी) अपने बच्चों को विदेश में पढ़ा रहे हैं और उन्हें सुरक्षित रखे हुए हैं."

दो दर्जन से ज्यादा स्कूल फूंके

कश्मीर में पिछले छह हफ्तों के दौरान दो दर्जन से ज्यादा स्कूलों को आग के हवाले कर दिया गया. एक हफ्ते पहले महबूबा मुफ्ती के गृहक्षेत्र अनंतनाग जिले के दयालगाम में एक हायर सेकेण्डरी स्कूल की दो मंजिला इमारत को राख कर दिया गया था.

दूसरी मंजिल के एक कमरे से भड़की आग जल्दी ही पूरी इमारत में फैल गई. लपटों को देख मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और दमकल दस्ते भी पहुंच गए. दयालगाम के स्कूल का अग्निकांड ऐसे समय हुआ, जब जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को शिक्षण संस्थानों के दुश्मनों को बेनकाब कर उनसे सख्ती से निपटने के निर्देश दिए थे.

अदालत ने लिया था संज्ञान

न्याधीश मोहम्मद याकूब मीर और अली मोहम्मद मैग्रे की खंड पीठ ने कहा कि स्कूल भवनों को बचाना हम सब की सामूहिक ज़िम्मेदारी है. अज्ञात लोग शिक्षा के माहौल को बिगाडना चाहते हैं. अब स्कूल भवनों की सुरक्षा के लिए सरकार के संबंधित अधिकारियों को तुरंत आवश्यक कदम उठाने चाहिए.

इसके साथ ही कोर्ट ने कश्मीर के पुलिस महानिदेशक और स्कूल शिक्षा निदेशक को आदेश दिया है कि वे पुलिस उपायुक्त, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और मुख्य शिक्षा अधिकारियों को स्कूल भवनों की हिफाज़त के लिए हरसंभव कदम उठाने के निर्देश दें. 

स्कूल जलाने के पीछे कौन?

स्कूलों को जलाने की वारदातों के लिए सरकार और अलगाववादी गुट एक दूसरे पर इल्ज़ाम मढ़ रहे हैं. जेकेएलएफ के मुखिया यासीन मलिक ने इस मामले को उन्हें बदनाम करने की सरकार की नापाक कोशिश करार दिया है.

मलिक ने कहा कि दिवंगत मुफ्ती मोहम्द सईद ने तत्कालीन मुख्यमंत्री गुलाम मोहम्मद शाह के खिलाफ 1986 में दक्षिण कश्मीर के बिजबेहरा और अन्य इलाकों में मंदिरों को जलाने की साजिश रची, ताकि उनकी सरकार से समर्थन वापसी के लिए माहौल बनाया जा सके.

अगर वे तब सरकार से समर्थन वापसी के लिए मंदिरों को जला सकते हैं तो उनकी बेटी और आज की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उनके शिक्षा मंत्री स्कूली इमारतों को जलाने की साजिश क्यों नहीं कर सकते?

कैच

सालाना परीक्षा को टालने की साजिश!

इसके जवाब में शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने आरोप लगाया कि मलिक और उनके समर्थक टकराव बढ़ाने के लिए आगजनी करा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम शिक्षा के मामले में कोई नई चीज नहीं थोप रहे बल्कि लाखों छात्रों का भविष्य बचाने की कोशिश कर रहे हैं.

नईम ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया कि स्कूलों को जलाने में छात्रों का हाथ है जबकि कई जगहों पर तो स्कूलों को आग से बचाने में छात्र ही आगे आए हैं.

ऐसे हादसे घाटी के सभी जिलों में हो रहे हैं. दक्षिणी कश्मीर के चार जिलों के 14 स्कूलों के अलावा बदगाम में 4, बारामूला और बांदीपोरा में 3, शोपियां और गांदरबल में दो-दो और पुलवामा, कुपवाड़ा व श्रीनगर जिलों में 1-1 स्कूल भवन जलाए गए हैं.

ऐसे हमले बेहतर तालमेल वाले संगठन की करतूत हैं. इसके पीछे उनकी यह मंशा भी है कि छात्र सालाना परीक्षाएं कराने के सरकार के फैसले का विरोध करें. लगातार हड़तालों से शैक्षणिक सत्र को हुए नुकसान के चलते छात्र मार्च में होने वाली परीक्षाएं टालने की मांग कर रहे हैं. अलगाववादी उनका पुरज़ोर समर्थन कर रहे हैं, लेकिन सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार से साफ इनकार कर रही है.

First published: 7 November 2016, 11:16 IST
 
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