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जम्मू-कश्मीर: राज्यपाल की नियुक्ति संवेदनशील, एनएन वोहरा की जगह कौन ?

आकाश बिष्ट | Updated on: 25 February 2017, 9:04 IST


कश्मीर घाटी में लगातार तनाव के चलते नरेंद्र मोदी एनएन वोहरा की जगह किसी और को राज्यपाल बनाना चाहते हैं. वोहरा वहां 2008 से राज्यपाल हैं. जिस समय वोहरा एसके सिन्हा की जगह आए थे, तब भी ऐसे ही हालात थे. आजादी के जन आंदोलन पर सुरक्षा बलों ने कड़ी कार्रवाई की थी और 120 लोग मारे गए थे.


वोहरा की जगह लेने के लिए अब तक कोई प्रबल दावेदार सामने नहीं आया है. इस पद के लिए कौन श्रेष्ठ रहेगा, मोदी उसकी अब भी तलाश कर रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि सरकार सोच रही है कि वोहरा की जगह किसी राजनेता को लें या नौकरशाह या कोई सेना से सेवानिवृत्त. इसीलिए वोहरा के जाने की अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, हालांकि सूत्रों का कहना है कि इसकी घोषणा कभी भी की जा सकती है.


राजनीति और सुरक्षा से जुड़े लोगों का मानना है कि गर्मियों के आते ही कश्मीर में फिर तनाव भड़क सकता है. अगर ऐसा हुआ, तो हालात को नियंत्रित करने के लिए तुरंत कदम उठाने पड़ेंगे. कम से कम राज्यपाल द्वारा तो नहीं.

 

संवेदनशील नियुक्ति

 


सेवानिवृत्त एडमिरल केके नायर ने कहा, ‘राज्यपाल नौकरशाह या सेवानिवृत्त सेना अधिकारी नहीं होना चाहिए क्योंकि कश्मीर राजनीतिक मुद्दा है, सुरक्षा या प्रशासनिक मुद्दा नहीं है. मैं सोचता हूं, इस समय सरकार को एक अनुभवी राजनेता नियुक्त करना चाहिए, जो प्रधानमंत्री, और राज्य में राजनीतिक पार्टियों और लोगों सहित अन्य स्टेकहोल्डर्स से भी बात कर सके.’ नायर ने आगे कहा कि नियुक्त राज्यपाल अर्जुन सिंह जैसा होना चाहिए. उन्हें उस समय पंजाब का राज्यपाल बनाया गया था, जब विद्रोह शिखर पर था. अर्जुन सिंह राजीव-लोंगोवाल शांति समझौते पर राजीव गांधी और लोंगोवाल दोनों के हस्ताक्षर कराने में सफल रहे थे.


कांग्रेस के मणिशंकर अय्यर ने कहा कि राज्यपाल को बनाने का आधार ‘प्रोफेशनल पृष्ठभूमि’ नहीं होनी चाहिए. जो भी चुना जाए, वह लोगों के साथ सहानुभूति रखे. ‘केवल सहानुभूति ही नहीं, समानुभूति भी रखे. कश्मीरियों की आवाज नई दिल्ली के राजनीतिक प्रतिष्ठान में अनसुनी रही है. पर उनकी बात को आगे पहुंचाने के लिए राजभवन तक जानी चाहिए.’
अनुभवी नेता अय्यर ने चेताया कि अगर सरकार किसी ‘कठोर’ को चुनती है, तो वह अपनी ही कब्र खोद रही होगी.


यही बात तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी ने कही. उन्होंने सुझाव दिया कि अगला राज्यपाल वह हो, जो यहां की वास्तविकता और लोगों की भावनाओं को समझे. ‘वह ऐसा होना/होनी चाहिए, जो धीरज से बात सुने और बुद्धिमानी से काम करे. कश्मीर की समस्या हल हो सकती है, पर ऐसे शख्स की जरूरत है, जिस पर राज्य के लोग भरोसा कर सकें. वह जनता का राज्यपाल होना चाहिए.’


त्रिवेदी मानते हैं कि वोहरा की जगह कोई राजनीति से जुड़ा शख्स आना चाहिए. पर उसका किसी पार्टी के साथ संबंध नहीं हो. सेना या नौकरशाही से चुनने पर हो सकता है वह कश्मीरियों के लिए ठीक नहीं रहे, इसलिए इनमें से नहीं लिया जाना चाहिए. उन्होंने आगे कहा, ‘नए राज्यपाल के कार्यकाल की शुरुआत पर गलत संदेश नहीं देना चाहते. इससे स्थितियां और बिगड़ सकती हैं.’

 

सेना से नियुक्ति?


पूर्व एयर वाइस मार्शल कपिल काक का मानना है कि ‘हालात को लेकर संवेदनशील’ सेना के पूर्व अधिकारी को नियुक्त किया जा सकता है. उन्होंने दावा किया ‘ऐसे कई पूर्व कोर कमांडर्स हैं, जो कश्मीरियों के बीच लोकप्रिय हैं. उनके किए कुछ बदलावों का लोगों ने स्वागत किया है.’

 

काक ने आगे कहा, ‘ऐसे व्यक्ति को नियुक्त करें, जो लोगों की आकांक्षाओं को पूरा कर सकें. वोहरा ने शानदार काम किया है और काफी सफल रहे हैं. समस्या के राजनीतिक हल के लिए केंद्र से सिफारिश करते रहे हैं, यह कहते हुए कि दिल्ली की सरकार को कश्मीर के लोगों का दर्द सुनना चाहिए.’


काक ने कश्मीरी लोगों पर ध्यान नहीं देने और ‘राजनीतिक मूर्खता’ करने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की. उनके मुताबिक अगला राज्यपाल राजनीतिक दबाव और लोगों की मांगों के बीच सही संतुलन बनाने वाला होना चाहिए. ‘इसी में राज-कौशल (स्टेट्समैनशिप) निहित है. वह सिर्फ केंद्र की लीक पर नहीं चले.’ उन्होंने सुझाव दिया कि मोदी शासन तय उम्मीदवारों के बारे में राज्य सरकार, खासकर पीडीपी से विमर्श करे. ‘उनकी बात घाटी के बहुमत दल को मान्य होनी चाहिए.’


2016 की गर्मी कश्मीर के वर्तमान इतिहास में हिंसा का सबसे खराब दौर था. विरोधियों को तितर-बितर करने में सरकारी बलों द्वारा सैकड़ों लोग मारे गए, हजारों पैलेट्स से अंधे हो गए. सर्दियों में जरूर माहौल ठंडा हुआ, पर कइयों का मानना है कि गर्मी आते ही फिर विद्रोह भडक़ सकता है. यही वजह है कि सरकार घाटी में बतौर प्रतिनिधि नया चेहरा लाने को उत्सुक है, जो 2016 की परेशानियों तले नहीं दबा हो.


देखना यह है कि राज्यपाल की नियुक्ति में क्या इन सब बातों पर गौर किया जाएगा, और उसका कश्मीर की स्थितियों पर कोई असर होगा?

 

First published: 25 February 2017, 9:04 IST
 
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