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कश्मीरी शादी में मेहमान और वाज़वान पर सरकार की पाबंदी

सेहर क़ाज़ी | Updated on: 25 February 2017, 10:21 IST

कश्मीर में भी देश के अन्य भागों की तरह शादियां बड़ी ही धूम-धाम और ताम-झाम के साथ होती आई हैं लेकिन अब राज्य सरकार के दखल के बाद शादियों की रौनक़ यहां बदल सकती है. हाल ही में राज्य सरकार ने शादी समारोहों और ऐसे ही अन्य आयोजनों पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए ताकि ऐसे समारोहों में खाने की बर्बादी रोकी जा सके. सरकार का यह आदेश 1 अप्रेल से लागू किया जाएगा.

 

शादी के नए नियम


बेटी की शादी में घरवाले 500 से ज्यादा मेहमान नहीं बुला सकते जबकि बेटे की शादी हो तो यह संख्या 400 तक ही सीमित होगी. छोटे समारोहों जैसे सगाई वगैरह में 100 से ज्यादा मेहमान न बुलाए जाएं. मगर आजकल 500 से ज्यादा तो फेसबुकिये दोस्त होते हैं!

सरकार ने शादी में परोसे जाने वाले व्यंजनों पर भी पाबंदी लगाई है. आदेश के अनुसार, सात शाकाहारी व सात मांसाहारी व्यंजन परोसे जाएंगे और दो तरह की मिठाई या आइसक्रीम! जमकर मीठा खाने वाले मेहमानों के लिए ये एक बुरी खबर है!

 

बेमतलब की पाबंदी


जम्मू कश्मीर सरकार का यह कदम कश्मीर के दूसरे अहम मसलों से ध्यान भटकाने वाला माना जा रहा है और इसे ‘बेमतलब की कवायद’ बताया जा रहा है.

कश्मीर के मुहम्मद असलम ने बताया पिछले साल मैं एक शादी में गया, वहां करीब 40 व्यंजन परोसे गए.‘‘क्या बेवकूफी है! इतना सारा खाना बर्बाद हो गया.’’ सरकार ने पहले भी ऐसी पाबंदियां लगाई हैं. उम्मीद है इस बार यह कारगर ढंग से लागू होंगी.

इस फैसले का दिलचस्प पहलू यह है कि सरकार ऐसे भव्य आयोजनों और फिजूलखर्ची पर रोक लगाने की बात कह रही है और वाज़वान यानी खाने की सबसे ज्यादा बर्बादी विधायकों के यहां होने वाली शादियों में ही होती है.

और तो और, हाल ही सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की एक तस्वीर वायरल हो गई थी, जिसमें वह अकेले ही पूरी प्लेट वाज़वान का लुत्फ उठाती देखी जा सकती हैं.

 

कश्मीरी वाज़वान

 

वाज़वान यानी कि कश्मीरी शादियों में परोसे जाने वाला सबसे ज़रूरी व्यंजन. वाज़वान में 7 खास तरह के व्यंजन होते हैं लेकिन खाना बनाने वाले शेफ आए दिन नए-नए व्यंजन ईजाद करते रहते हैं. लकडि़यों के ईंधन पर पकाए जाने वाले इस खाने में अब तक 100 से ज्यादा व्यंजन शामिल किए जा चुके हैं.

वाज़वान में परोसे जाने वाले व्यंजनों में कुछ हैं, मीठीमाज, दईनीफॉल, रुवांगन चमन, दौध-ए-रास, हिन्दी रोगनजोश, पालक, वाजा कोकुर-मसालेदार, चिकन, तबखमाज, रोगनजोश, रिस्ता, आबगोश, धानीवाल कोरमा, मार्शेवागन कोरमा और गोश्ताबा. ये सारे व्यंजन बेहद लज़ीज़ और खुशबूदार हैं. इनके अलावा शामी कबाब, आलूबुखारा, किशमिश कोरमा और पुलाव भी बनाए जाते हैं. ये व्यंजन एक खास ऑर्डर में बनाए जाते हैं और चार लोग एक साथ बैठ कर खाना खाते हैं.

 

कहां से आया वाज़वान

 

वाज़वान की शुरुआत 14 वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में हुई, जब तैमूर ने भारत पर आक्रमण किया और खाती, जुलाहों, वास्तुकार, कैलिग्राफी करने वालों और खानसामों को समरकंद से जबरन कश्मीर में विस्थापित होने पर मजबूर कर दिया. इन खानसामों के वंशज वाजवा हैं, जो कि वाज़वान बनाते हैं. बहुत से लोगों का मानना है अलग-अलग संस्कृतियों के प्रभाव चलते ही वाज़वान का आज का स्वरूप इतनी विविधता लिए हुए है.

15 साल से वाजवां बनाने वाले मुश्ताक अहमद कहते हैं, वाज़वान बनाने में अत्यधिक मेहनत व समय लगता है. बकरे से विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाए जाते हैं. बकरे के पीछे की टांगों से गोश्ताबा और कबाब बनता है. उसकी हड्डियों वाले गोश्त से रोगन जोश, कोरमा व उसकी पसलियों से तबकमाज बनता है. गोश्ताबा और रिस्ता बनाने के लिए मांस को पत्थर की पट्टी पर रख कर लकड़ी के हथौड़े से पीट-पीट कर नरम बनाया जाता है. अब सरकार के आदेश के बाद देखते हैं वाज़वान में कितने व्यंजन परोसे जाएंगे.

 

First published: 25 February 2017, 9:05 IST
 
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