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सर्जिकल स्ट्राइक: जम्मू-कश्मीर के बच्चे अब नहीं बनेंगे पत्थर-बाज बल्कि करेंगे देश की सेवा

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 September 2018, 13:14 IST

जम्मू-कश्मीर सरकार ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से 28 सितंबर से 30 सितंबर तक स्कूल में 'सर्जिकल स्ट्राइक डे' का जश्न मनाने के निर्देश दिए हैं. साथ ही साथ इसके  स्कूलों में विभिन्न गतिविधियों के आयोजन की तस्वीरें और वीडियो के साथ रिपोर्ट भेंजे और इसे 01 अक्टूबर तक विभाग को सबमिट करें.

शिक्षा विभाग के सचिव ने इस बारे में  सभी स्कूलों में एक पत्र भेजा है जिसके अनुसार, सूचना और  प्रसारण मंत्रालय ने शुक्रवार को 'सर्जिकल स्ट्राइक डे' के रूप में पालन करने के लिए गतिविधियों को आयोजित करने के निर्देश जारी किए थे.

कई सरकारी अधिकारियों के मुताबिक,सरकार के इस कदम का मकसद जम्मू-कश्मीर के बच्चों में देश-भक्ति की भावना पैदा करना है. बच्चों को सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में बताने और एक्टिविटी में शामिल करने से उनमें हमारे सैनिकों के शौर्य और बलिदान का सटीक ज्ञान होगा जिससे वे गलत रस्ते पर नहीं भटकेंगे. बच्चों में देश-प्रेम बढ़ेगा और उनमें पत्थर-बाज और आतंकी नहीं बल्कि देश की रक्षा करने वाले सैनिक और देश पर मर-मिटने वाले जवान बनने की चाहत उत्पन्न होगी और प्रेरणा मिलेगी. 

स्कूलों को 28 से 30 सितंबर तक प्राकर्म पर्व जश्न मनाने का आदेश दिया गया है. इसके अलावा आयोजित की जाने वाली गतिविधियों की लिस्ट भी दी गई है. सर्कुलर के मुताबिक, स्कूल स्टूडेंट्स सेना के प्रति समर्थन जताने वाले पत्र लिखें और कार्ड्स बनाएं. “स्कूल के बच्चों को पत्र लिखकर या कार्ड बनाकर सशस्त्र बलों के लिए अपना समर्थन देने को कहें, जिसे निकट के सेना संसथान को संबोधित किया जाए. सर्कुलर में ये भी कहा गया है, "सभी स्कूलों में NCC की स्पेशल परेड आयोजित की जाए और बहादुर व अनुभवी सैनिकों के मोटिवेशनल लेक्चर करवाए जाएं."

First published: 29 September 2018, 13:14 IST
 
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