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68500 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट से इन उम्मीदवारों को बड़ी राहत

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 May 2019, 12:12 IST

उत्तर प्रदेश में 68500 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुछ अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है. दरअसल, कोर्ट ने सहायक अध्यापक के पदों पर नियुक्ति के लिए पांच साल से यूपी में निवास करने की अनिवार्यता संबंधी शासनादेश को रद्द कर दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने गैर राज्यों के अभ्यर्थियों को भी काउंसलिंग में शामिल करने का आदेश दिया है.

बता देंकि यूपी सरकार ने 8 अगस्त 2018 को शासनादेश जारी कर ये शर्त रखी थी कि सहायक अध्यापक के पदों पर उन्हीं अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलेगी उत्तर प्रदेश में कम से कम पांच सालों से रह रहे हैं. इलाहाबाद कोर्ट ने इस शासनादेश से संबंधित प्रस्तर दो को असंवैधानिक करार दिया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद यूपी में 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में गैर राज्यों के अभ्यर्थियों का भी चयन आसान हो जाएगा. बता दें कि मनीष कुमार, हरियाणा और दिल्ली सहित कई अन्य राज्यों के निवासियों ने इस मामले में याचिका दायर की थी. इस याचिकाओं पर न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने सुनवाई की और आदेश दिया.

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एएन त्रिपाठी ने दलील दी कि संविधान के अनुच्छेद 16(3) में वर्ण, जाति, धर्म, निवास स्थान, भाषा आदि के आधार पर विभेद नहीं किया जा सकता है. साथ ही जरूरत पड़ने पर संसद को कानून बनाने का अधिकार है. राज्य सरकार को ऐसा कोई नियम बनाने का क्षेत्राधिकार प्राप्त नहीं है.

उन्होंने ये भी दलील रखी कि सहायक शिक्षक भर्ती विज्ञापन में भी ऐसी कोई शर्त नहीं रखी गई थी, इसलिए आवेदन तिथि के पांच वर्ष पूर्व से उत्तर प्रदेश का निवासी होने की शर्त असंवैधानिक और गैरकानूनी है. उन्होंने कोर्ट को बताया गया कि 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में 41556 पर चयन हुआ है जबकि शेष करीब 27 हजार पद अभी भी रिक्त हैं. इस पर कोर्ट ने आदेश दिया है कि रिक्त पदों पर गैर राज्यों के उम्मीदवारों को भी मौका दिया जाए. साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि किसी उम्मीदवार को निवास स्थान के आधार पर नियुक्ति देने से ना रोका जाए.

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First published: 11 May 2019, 12:12 IST
 
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