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UPSC: ब्यूरोक्रेसी में लैटरल एंट्री की राह नहीं आसान, मोदी सरकार का फैसला मानने से किया इंकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 August 2018, 13:00 IST

UPSC: कुछ दिन पहले मोदी सरकार ने नौकरशाही (Bureaucracy) के लिए नियुक्ति प्रक्रिया के नियमों में बड़ा बदलाव किया था. सरकार ने लैटरल एंट्री पॉलिसी को लागू किया था जिसमें बगैर UPSC पास किए भी बड़े अधिकारी की नियुक्ति करने का प्रावधान किया गया था. इस मामले पर "सर्च कम सेलेक्शन कमिटी" ने फैसला किया है कि नियुक्ति प्रक्रिया को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा संचालित किया जाना चाहिए.

समिति ने कहा है कि लैटरल एंट्री से ब्यूरोक्रेसी में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ जाएगा और इसके दायरे को सीमित करने के लिए भर्ती प्रक्रिया यूपीएससी द्वारा संभाला जाना चाहिए, जो लिखित परीक्षाओं और साक्षात्कार के उच्च मापदंड और नौकरशाहों की भर्ती की एक कठोर प्रणाली का पालन करता है.

गौरतलब है कि सरकार की लैटरल एंट्री पॉलिसी का विपक्षी पार्टियां सहित देश के वुद्धिजीवी वर्ग ने कड़ी आलोचना की थी. इस पॉलिसी के माध्यम से अब प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले भी बड़े अधिकारी बन सकते हैं. इस मामले पर सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाये गए थे कि ब्यूरोक्रेसी में अपने चहेते लोगों की नियुक्ति की जाएगी.

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कुछ दिनों पहले पीएमओ में केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि 10 विभागों में बतौर जॉइंट सेक्रटरी 10 पदों के लैटरल एंट्री से जुड़ी अधिसूचना जारी की गई है. इसमें सबसे योग्य उम्मीदवार को मौका मिलेगा. इसके द्वारा उपलब्ध स्त्रोंतों में एक किसी एक योग्य को चुनने का प्रयास है. इससे हर भारतीय नागरिक को अपनी प्रतिभा और क्षमता के हिसाब से अपना विकास करने का मौका मिलेगा.

First published: 6 August 2018, 13:00 IST
 
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