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NEET: मद्रास हाई कोर्ट के आदेश के बाद तमिलनाडु में मेडिकल कोर्सेस में एडमिशन बंद

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 July 2018, 10:26 IST

NEET एग्जाम में गड़बड़ी की वजह से तमिलनाडु के राज्य स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (Directorate General of Health Services) एवं राज्य चयन समिति ने तमिलनाडु में MBBS और BDS एवं अन्य मेडिकल कोर्सेस में एडमिशन पर रोक लगा दी है. न्यायलय ने सीबीएसई को ये भी निर्देश दिया है की 2 हफ्ते के भीतर फ्रेश कैंडिडेट लिस्ट जारी की जाए तब तक कॉउंसलिंग प्रक्रिया पर रोक लगा दी जाए.

फिलहाल  राज्य में NEET की योग्यता प्राप्त स्टूडेंट्स के एडमिशन पर रोक लगा दी गई है. दरअसल तमिल भाषा में NEET के पेपर में गलत सवाल (Translating Errors) और मिस प्रिंट की वजह से गलतियां थीं. गौरतलब है कि मैनेजमेंट कोटा में लगभग 700 एमबीबीएस की सीटें पेंडिंग है.

ये भी पढ़ें-NEET 2018: स्टूडेंट्स को मिलेंगे 196 अंकों के ग्रेस मार्क्स, हाई कोर्ट ने CBSE को दिए निर्देश

मद्रास हाई कोर्ट ने CBSE के द्वारा मेडिकल कोर्सेस में दाखिले के लिए आयोजित NEET (National Eligibility cum Entrance Test) 2018 परीक्षा में तमिल भाषा में गलत सवाल पूछने के लिए उम्मीदवारों को 196 अंकों का ग्रेस मार्क्स देने का निर्देश दिया है. अब हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद इस साल तमिल भाषा में परीक्षा देने वाले सभी स्टूडेंट्स को 49 गलत प्रश्नों के लिए प्रति सवाल 4 अंक मिलेगा.

स्टूडेंट्स ने मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इसकी शिकायत की थी. इस याचिका में ये दलील दी गई कि CBSE की गलतियों की वजह से तमिल स्टूडेंट्स देश के अन्य छात्रों से पिछड़ जाएंगे. मद्रास हाई कोर्ट मामले पर संज्ञान लेते हुए CBSE को निर्देश दिए कि जिन छात्रों ने तमिल भाषा में परीक्षा दी थी उन्हें 196 अंकों का ग्रेस मार्क्स दिया जाए.

NEET 2018 प्रवेश परीक्षा 6 मई को आयोजित की गई थी जिसमें 13 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था. देश भर के मेडिकल / डेंटल कॉलेजों में MBBS / BDS कोर्सेस में एडमिशन के लिए सीबीएसई द्वारा NEET परीक्षा आयोजित की जाती है. यह परीक्षा देश भर के 2,255 सेंटर्स कर आयोजित की गई थी.

First published: 13 July 2018, 10:26 IST
 
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