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अब अमेरिकी स्कूलों में पढाये जायेंगे भारत की आजादी के किस्से और कहानियां

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 July 2018, 16:22 IST

अब अमेरिका की स्कूलों में भारत के स्वतंत्रता संग्राम की कहानियां पढ़ाई जाएगी. अभी कुछ दिनों पहले ही अमेरिका के अस्टोरिया शहर में आयोजित एक कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के सरकारी अधिकारियों ने कहा कि गदर पार्टी का इतिहास अब स्कूलों में पढ़ाया जाएगा. दरअसल गदर पार्टी के 105 साल पूरे होने पर ओरेगन प्रान्त में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था इसी में शिरकत करते हुए अमेरिका के अधिकारीयों ने इसकी घोषणा की.

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गदर पार्टी की स्थापना साल 1913 में कनाडा और अमरीका में प्रवासी भारतीयों ने की थी. गदर पार्टी ने अंग्रेजों से भारत की सम्पूर्ण आजादी की मांग की थी. गदर पार्टी ने अंग्रेजी हुकूमत और उसके साम्राज्यवाद के खिलाफ हथियारबंद संघर्ष का ऐलान किया था. इसके संस्थापक और अध्यक्ष सरदार सोहन सिंह भाकना थे. उन्होंने पार्टी का मुख्यालय सैन फ्रांसिस्को में बनाया था, उन्होंने प्रवासी भारतीयों को एकजुट कर विदेश से भारत की स्वतंत्रता का मुहिम चलाया.

21 अप्रैल 1913 को भारतीयों ने अमेरिका में गदर पार्टी की नींव रखी, और पार्टी की विचारधारा लोगों तक पहुंचाने के लिए 'गदर' नाम का साप्ताहिक अखबार निकालने का फैसला किया. करतार सिंह सराभा को अखबार की जिम्मेदारी दी गई. इस अखबार में देशभक्ति से ओत-प्रोत जोशीली कविताएं छपती थीं जिसका लोगों पर काफी असर हुआ और उनमें देशप्रेम की भावना जगी. गदर पार्टी स्थापित करने के पीछे महान स्वतंत्रता सेनानी लाला हरदयाल की सोच थी. वे अमेरिका गए और उन्होंने भारतीय प्रवासियों को इकट्ठा कर गदर पार्टी की स्थापना की.

पार्टी का मिशन असफल

अंग्रेजों के खिलाफ देश में विद्रोह करने के लिए गदर पार्टी ने 21 फरवरी, 1915 की तारीख तय की थी, लेकिन पार्टी के ही एक गद्दार मुखबिर किरपाल सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत को इसकी जानकारी दे दी. खबर लीक होने की भनक जब क्रांतिकारियों को लगी तो उनलोगों ने विद्रोह की तारीख बदलकर 19 फरवरी कर दी, लेकिन इसके बारे में भी अंग्रेजों को पता लगा गया. इसके बाद अंग्रेजी सरकार ने उनलोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई शुरू कर दी.

First published: 17 July 2018, 16:22 IST
 
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