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अपने बॉस की हां में हां के मिलाने के ये होते हैं फायदे और नुकसान...

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 September 2018, 16:30 IST

दफ्तर हो या घर किसी कामकाजी लोगों को लड़ना-झगड़ना पसंद नहीं होता. हालांकि कई मौके पर आपकी नाराजगी जाहिर होने लगती है. लेकिन आमतौर पर ऐसा नहीं होता है कि आप दफ्तर में अपनी असहमति या नाराजगी व्यक्त करते हों. ऑफिस में अपने सहकर्मी या बॉस के साथ दोस्ताना रवैया रखने की हर कोई कोशिश करता है. लेकिन सवाल ये उठता है कि आपकी असहमति के बावजूद आपको अपने बॉस की हां में हां क्यों मिलानी पड़ती है.

बीबीसी हिंदी में छपी खबर के मुताबिक, लॉबोरो यूनिवर्सिटी में कन्वर्जेशन एनालिसिस की प्रोफेसर एलिजाबेथ स्टॉकी कहती हैं, "हम दूसरों को मौके भी देते हैं. अपनी बातचीत को नियंत्रित रखते हैं और लोगों को अपनी बात मनवाने की कोशिश करते हैं."

ऑफिस में हम ये नहीं चाहते कि किसी से कोई विवाद हो, या किसी से मनमुटाव हो. क्योंकि जिन लोगों से आप पूरे दिन कनेक्ट रहते हैं और उनके साथ मिलकर काम करते हैं उनसे लड़ना कैसा. वहीं अगर बात बॉस की है तो झगड़ा करने का कोई फायदा नहीं. हॉर्वर्ड बिजनेस रिव्यू 'गाइड टू डीलिंग विद कन्फ्लिक्ट एट वर्क' की लेखिका एमी ई. गेलो का कहना है कि, किसी भी कीमत पर टकराव टालने का यह नजरिया गलत है. यानी कि आपको अपने बॉस से हर मामले में हां में हां मिलाना ठीक नहीं है.

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर स्टुअर्ट फायरस्टिन इन चुनौतियों को मानते हुए कहते हैं कि, "मैं प्रयोगशाला में कोई नया रिसर्च पेपर तैयार करता हूं, लेकिन रिव्यूअर उसमें कोई बड़ी गलती निकाल देता है." वो आगे बताते हैं कि, "मैं उसका शुक्रगुज़ार होता हूं. क्योंकि अगर गलतियों को दूर किए बिना मैंने वह पेपर छपवा लिया होता, तो सबके सामने मैं गलत साबित होता और बदनामी होती. अभी तो सिर्फ मैं और वह रिव्यूअर ही जानते हैं कि मैं बेवकूफ हूं."

ये है असहमति जताने के फायदे

अपने बॉस या किसी अन्य से असहमति जताने के भी अपने फायदे हैं. विज्ञान की यह जांच प्रक्रिया दूसरे क्षेत्रों पर भी लागू होती है. विज्ञान हमें यह मौका देता है कि हम असहमति जताएं. प्रोफेशर फायरस्टिन कहते हैं, "लोग एक-दूसरे पर चीखते-चिल्लाते हैं, फिर साथ-साथ बार जाते हैं और शराब पीते हैं. चीजें ऐसे ही चलती हैं. आप किसी से कितनी भी असहमति रखें, आदर का एक रिश्ता बना रहता है."

किसी के साथ असहमति जताने का पहला फायदा ये हैं कि, आपको अपने विचारों को दूसरे विचारों के बरक्स जांचने का मौका मिलता है. एकेडमी ऑफ आइडियाज़ की क्लेयर फॉक्स कहती हैं, "आप दूसरे पक्ष के तर्कों को काटने की कोशिश करते हैं. इससे आपके तर्कों में धार आती है. या फिर यह भी हो सकता है कि आपके ख्याल बदल जाएं और आप दूसरे पक्ष के तर्कों को मान लें."

वहीं बॉस या अपने सहकर्मी से असहमति जताने का दूसरा फायदा ये है कि आप अपने अहंकार को नियंत्रित कर पाते हैं. वहीं तीसरी बात ये कि इंसानी चतुराई के भी फायदे हैं. हम उन सबूतों की तलाश करते रहते हैं जो हमारे मत को ताकत देते हों.

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि यदि आप सिर्फ अपनी सुनते हैं, या सिर्फ सहमति रखने वालों से बात करते हैं तो आप एकतरफा तर्कों को जमा कर रहे हैं. यह अति आत्मविश्वास को जन्म देता है.

बता दें कि तर्क वितर्क करने से हमारी तार्किक क्षमता बढ़ती है. हम अपनी राय के मुकाबले दूसरों की राय को बेहतर तरीके से आंकते हैं. वहीं यदि आप दूसरे राजनीतिक पक्ष के लोगों के साथ स्वस्थ चर्चा करते हैं तो वे आपके कमजोर तर्कों को ध्वस्त कर देंगे. वे आपको दूसरे पक्ष के विचार देंगे और अंत में सब ठीक हो जाएगा.

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First published: 8 September 2018, 16:30 IST
 
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