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इस नेता की रैली में आती है PM मोदी की रैली से ज्यादा भीड़, BJP ने चुनाव लड़ने के लिए किया आग्रह !

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 April 2019, 20:36 IST

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान में एक ऐसी पार्टी से गठबंधन करने में सफलता प्राप्त की है जिसके मुखिया ने विधानसभा चुनाव में अकेले ही कांग्रेस और भाजपा दोनों की नींद हराम कर दी थी. इस नेता का नाम हनुमान बेनीवाल और इनकी पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यानि (RLP) है. 

गठबंधन के तहत भाजपा ने RLP को राजस्थान की नागौर लोकसभा सीट दी है. इस सीट से खुद बेनीवाल चुनाव लड़ेंगे और भाजपा यहां अपना प्रत्याशी नहीं उतारेगी. बीजेपी के दिग्गज ने प्रकाश जावड़ेकर ने आरएलपी के साथ गठबंधन होने पर खुशी व्यक्त की. उन्होंने बताया कि बेनीवाल से हमने नागौर से चुनाव लड़ने का आग्रह किया है.

जावड़ेकर की इस एक लाइन से राजस्थान में इस दिग्गज नेता की औकात का पता चलता है. आखिर ऐसा क्या है इस नेता में कि पिछले लोकसभा चुनाव में राज्य की 25 में से 25 सीटें जीतने वाले बीजेपी को हनुमान बेनीवाल से खुद चुनाव लड़ने के लिए आग्रह करना पड़ा?

बता दें कि राजस्थान में पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में हनुमान बेनीवाल अचानक ही सबका ध्यान आकर्षित किया था. उनकी रैली में इतनी भीड़ इकट्ठा होती थी जितनी पीएम मोदी और अमित शाह भी इकट्ठा नहीं कर पाए थे. भाषण देने में माहिर बेनीवाल को सुनने के लिए इतनी भीड़ आती थी जिसे देख बीजेपी और कांग्रेस के पसीने छूट गए थे.

राज्य में हनुुमान बेनीवाल की लोकप्रियता ऐसी कि उन्हें सुनने के लिए लोग जगह न मिलने पर खंभों पर खड़े हो जाते थे और बाउंड्री के बाहर खड़े रहते थे. राजस्थान विधानसभा चुनावों में यह जाट नेता दोनों बड़ी सियासी पार्टियों के लिए सिरदर्द बना हुआ था. बीजेपी से बागी हुए हनुमान बेनीवाल एकमात्र ऐसे नेता हैं जिनकी राजनैतिक पहचान कोई दबा नहीं सका.

बीजेपी से हुए हैं बागी

करीब 15 साल पहले जोधपुर में एक सभा चल रही थी. बीजेपी की तरफ से आयोजित यह सभा जाट समाज के लिए थी. तब राजस्थान में बीजेपी के पास कोई बड़ा जाट चेहरा नहीं था. इस वजह से दिल्ली के जाट नेता और वाजपेयी सरकार के मंत्री साहब सिंह वर्मा को राजस्थान के जाट बाहुल्य वाले इलाकों में प्रचार के लिए भेजा गया था.

जोधपुर में हो रही इस सभा को उन्हें संबोधित करना था. लेकिन वर्मा समय पर नहीं पहुंचे. इस कारण भीड़ छंटने लगी. जब लोग जाने लगे तो इतने में राजस्थान यूनिवर्सिटी का एक छात्रनेता मंच पर पहुंचा और अपने भाषण से समां बांध लिया. ये कोई और नहीं हनुमान बेनीवाल थे. इस सभा में दिए गए अपने भाषण की शैली से वह ऐसे लोकप्रिय हुए थे कि आज तक कोई सियासी पार्टी उनका तोड़ नहीं निकाल पाई है.

पिता थे कांग्रेसी

छात्र राजनीति से पॉलिटिक्स में कदम रखने वाले बेनीवाल ने अपने पिता के कांग्रेस नेता होने के बावजूद बीजेपी ज्वॉइन की थी. लेकिन साल 2010 में उन्होनें खुलेआम बीजेपी के नेताओं को भ्रष्ट करार दिया था और कांग्रेस-बीजेपी की सांठगांठ होने के आरोप लगाते हुए अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. इसके बाद उन्हें पार्टी छोड़नी पड़ी थी.

साल 2013 में बेनीवाल ने अपने विधानसभा क्षेत्र खींवसर से निर्दयलीय प्रत्याशी के रुप में चुनाव लड़ा और मोदी लहर के असर के बावजूद भी रिकॉर्ड मतों से जीत हांसिल की. तब बीजेपी ने उनको हराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था लेकिन उन्होंने इतिहास ही बदल दिया था. इसके बाद बेनीवाल ने नागौर, बाड़मेर, बीकानेर, सीकर और जयपुर जिलों में 5 सफल हुंकार रैलियों का आयोजन किया जिनमें जुटी लाखों की भीड़ की गूंज दिल्ली तक जा पहुंची.

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First published: 4 April 2019, 17:10 IST
 
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