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चुनाव परिणामों में हो सकती है 6 दिन की देरी, चुनाव आयोग ने SC में बताई ये वजह

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 March 2019, 22:09 IST

 

भारत के चुनाव आयोग ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि VVPAT के नमूने के आकार में वृद्धि से लोकसभा चुनाव के परिणामों में छह दिन की देरी होगी, द हिंदू के अनवर पोल पैनल ने यह भी कहा कि नमूना आकार में वृद्धि से परिणामों की विश्वसनीयता में बहुत ही नगण्य सुधार होगा.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा था कि वह बताए कि हर विधानसभा क्षेत्र के एक मतदान केंद्र पर VVPAT के जरिए मतपत्रों का सत्यापन क्यों नहीं किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह 1 अप्रैल को 21 विपक्षी दलों द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करेगा, जिन्होंने वीवीपीएटी मशीनों का उपयोग करके कम से कम 50% वोटों के सत्यापन की मांग की है.

आयोग ने अपने हलफनामे में कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और वीवीपीएटी प्रणाली में वर्तमान विश्वास स्तर पहले से ही 99.9936% है. उसने कहा कि विपक्ष की याचिका वैज्ञानिक तर्क या सांख्यिकीय आधार पर नहीं थी. चुनाव आयोग ने कहा कि वीवीपीएटी पर्चियों की गिनती का वर्तमान तरीका सबसे उपयुक्त है.

जिन दलों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है उनमें कांग्रेस, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी, शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, आम आदमी पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल, शरद यादव का लोकतांत्रिक जनता दल, और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम शामिल हैं.

पार्टियां इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से छेड़छाड़ को रोकने के लिए सख्त मानकों और सुरक्षा मानदंडों को स्थापित करना चाहती हैं.
विपक्षी दलों ने पिछले दो वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की विश्वसनीयता पर कई बार संदेह जताया है. हालांकि चुनाव आयोग ने बार-बार इन आरोपों का खंडन किया है कि मशीनों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है. लोकसभा चुनाव 11 अप्रैल से 19 मई तक सात चरणों में होंगे और परिणाम 23 मई को घोषित किए जाएंगे.

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First published: 29 March 2019, 22:09 IST
 
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