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मोदी-शाह को लगातार क्लीन चिट देने पर चुनाव आयोग में रार! एक आयुक्त ने जताई असहमति

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 May 2019, 8:12 IST

चुनाव आयोग ने आचार संहिता उल्लंघन करने के मामले में पीएम मोदी को लगातार 6 बार क्लीन चिट दे दी है. आयोग ने पीएम मोदी को गुजरात के पाटन में 21 अप्रैल को दिए भाषण के मामले में क्लीन चिट दी है. बता दें कि पीएम मोदी के इस भाषण को लेकर विपक्ष ने आपत्ति जताई थी. विपक्ष की ओर से शिकायत मिलने के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की रिपोर्ट पर आयोग को पीएम मोदी के इस भाषण में भी कोई खामी नजर नहीं आई और उन्हें क्लीन चिट दे दी गई.

बता दें कि कांग्रेस पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन की 11 शिकायतें दर्ज कराई थीं. जब कांग्रेस को लगा कि आयोग उन्हें अनसुना कर रहा है तो कांग्रेस ने इस मामले में शीर्ष कोर्ट का रुख किया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकार लगाई कि आखिर आयोग अपनी शक्तियों का इस्तेमाल क्यों नहीं कर रहा? साथ ही शीर्ष कोर्ट ने आयोग को कहा कि वह सोमवार तक मोदी-शाह के खिलाफ दर्ज आचार संहिता उल्लंघन की सभी शिकायतें निपटाए.

उसके बाद चुनाव आयोग ने मोदी-शाह के खिलाफ मिली सभी शिकायतों की सुनवाई की और उनका फैसला भी कर दिया. जिसमें चुनाव आयोग ने पीएम मोदी को सात मामलों में क्लीन चिट दे दी. विपक्ष द्वारा शिकायतों और भाषणों की वीडियो रिकॉर्डिंग वाले सबूतों में आयोग को किसी में कोई कमी नजर नहीं आई और उन्हें क्लीन चिट दे दी.

उसके बाद आयोग के सभाभवन से ऐसी खबरें आने लगीं कि सब कुछ ठीक नहीं चल रहा. अब ऐसा कहा जा रहा है कि मौजूदा तीन में से एक आयुक्त ने पीएम मोदी और अमित शाह को क्लीन चिट देने को लेकर शुरू से कभी हां में हां नहीं मिलाई. उनके अलग रुख के बावजूद दो एक के बहुमत से मोदी-शाह को आयोग ने क्लीन चिट दे दी.

आयोग के गलियारों में दबी जबान से ये चर्चा हो रही है कि क्लीन चिट पूरी तरह क्लीन नहीं है. इसमें एक आयुक्त की असहमति है. आयोग के सूत्र एक आयुक्त का नाम तो ले रहे हैं लेकिन कोई खुलकर सामने नहीं आ रहा. मोदी-शाह को अब तक आयोग से जितनी क्लीन चिट दी गई हैं, उन पर एक ही आयुक्त ने सवाल उठाए. आपत्ति उठाने वाले आयुक्त का कहना है कि जब जिला निर्वाचन अधिकारी से लेकर राज्यों के सीईओ तक जैसी बात कह रहे हैं और भेजे गए सबूत भी उसकी ही पुष्टि कर रहे हैं तो क्लीन चिट का सवाल ही नहीं होना चाहिए. लेकिन दो आयुक्तों के बहुमत से फैसला हो जाता है.

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First published: 5 May 2019, 8:12 IST
 
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