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RTI में खुलासा : राजनीतिक दलों को 99 फीसदी चंदा 10 लाख और एक करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड से मिला

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 April 2019, 11:22 IST

राजनीतिक पार्टियों को इलेक्टोरल बांड के जरिये दिए जाने वाले चंदे पर जहां सुप्रीम कोर्ट में बहस जारी है वहीं एक आरटीआई के जरिये इस बात का खुलासा हुआ है कि मार्च 2018 और 24 जनवरी 2019 के बीच इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से राजनीतिक दलों को मिलने वाला 99.8 फीसदी चंदा 10 लाख रुपये और 1 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बांड के रूप में सबसे ज्यादा मिला. चुनावी बांड के जरिये कोई भी नागरिक या कॉरपोरेट समूह भारतीय स्टेट बैंक से इसे खरीद सकते हैं और एक राजनीतिक पार्टी को दे सकते हैं और ये बांड गुमनाम हैं.

इस योजना को जनवरी 2018 में पेश किया गया था. एक रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान कुल 1,407.09 करोड़ रुपये के बांड खरीदे गए. खरीदे गए बांड में से 1,403.90 करोड़ रुपये 10 लाख रुपये और 1 करोड़ रुपये के उच्चतम मूल्यवर्ग में थे. यह जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ को आरटीआई के जरिये भारतीय स्टेट बैंक से मिली .

 

एसबीआई ने पांच मूल्यवर्ग के बांड बेचे इनमे 1,000 रूपये , 10,000 रुपये, पांच लाख, 10 लाख और पांच करोड़ रुपये शामिल हैं. चंदा देने वालों स्वारा खरीदे गए बांड में 10 लाख रुपये के 1,459 और 1 करोड़ रुपये के 1,258 बांड खरीदे. जबकि 1 लाख रुपये के 318 बांड, 10,000 रुपये के 12 बांड और 1,000 रुपये मूल्यवर्ग में 24 बांड खरीदे आगये.

पार्टियों ने 1,395.89 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बांड को भुनाया. हालांकि, एसबीआई ने यह नहीं बताया कि कितने दलों ने बांड भुनाया और कितने पैसे कमाए. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक दलील देते हुए एक आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया था कि चुनावी बांड असंवैधानिक हैं. अदालत ने कहा कि इससे भारत की चुनावी प्रक्रिया पर जबरदस्त असर हो सकता है, अदालत ने एक अंतरिम आदेश पारित किया जिसमें राजनीतिक दलों को कहा कि वह चुनाव आयोग को चुनावी बांडों का विवरण जमा करें. जिसके लिए 30 मई का समय दिया गया है.

 

First published: 15 April 2019, 11:02 IST
 
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